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Monthly Archives: February 2014

Shayri part 3


ये दुनिया वाले भी बड़े अजीब होते है
कभी दूर तो कभी क़रीब होते ह

दर्द ना बताओ तो हमे कायर कहते है
और दर्द बताओ तो हमे शायर कहते है ….

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“जिंदगी में हद से ज्यादा ख़ुशी और हद से ज्यादा गम का कभी किसी से इज़हार मत करना,

क्योंकि, ये दुनिया बड़ी ज़ालिम है,  हद से ज्यादा ख़ुशी पर ‘नज़र’ और हद से ज्यादा गम पर ‘नमक’ लगाती है.”

********

पानी दरिया में हो या आँखों में ,

गहराई और राज़ दोनोंमें होते हैं!!

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ऐ दोस्त तुम पे लिखना शुरू कहा से करूँ?
अदा से  करूँ या हया से करूँ?
तुम्हारी दोस्ती इतनी खुबसूरत है.
पता नहीं की तारीफ जुबा से करू या दुआ से करूँ?…..

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क़ब्रों में नहीं हमको किताबों में उतारो,,
हम लोग मुहब्बत की कहानी में मरे हैं..!!

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अगर भगवान नहीं हैं
तो जिक्र क्यों. ..?
और अगर भगवान हैं
तो फिर फिक्र क्यों. ..!!

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अजीब शख्स है.. इश्क मे खुशियां तलाशता है….

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हर एक इंसान हवा में उडा फिरता हैं…
फिर न जाने धरती पर इतनी भीड़ क्यों है?

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मयखाने बंद कर दे चाहे लाख दुनिया वाले ,,,
लेकिन!!!!!

शहर में कम नही  है, “”निगाहों”” से पिलाने वाले !!!…

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उम्मीद वर्षों से दहलीज़ पर खडी वो मुस्कान है,
जो हमारे कानों में धीरे से कहती है;
“सब अच्छा होगा”

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शौक था अपना-अपना..

किसी ने इश्क किया,

तो कोई जिंदा रहा…

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” तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी..,

एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे….”

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हम तो मशहुर थे अपनी तनहाइयों के लिए ,
मुद्तों बाद किसीने पुकारा है,
एक पल तो हम रुक कर सोचने लगे,
कया यही नाम हमारा है ?

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बिकने वाले और भी हैं, जाओ जा कर ख़रीद लो हम  ‘कीमत’ से नहीं ‘क़िस्मत’ से मिला करते हैं.

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कुछ ऐसी मुह्हबत उसके दिल में भर दे या रब।।
वो जिसको भी चाहे वो “मैं” बन जाऊं।।

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“तुम क्या जानो शराब कैसे पिलाई जाती है, खोलने से पहले बोतल हिलाई जाती है, फिर आवाज़ लगायी जाती है आ जाओ दर्दे दिलवालों, यहाँ दर्द-ऐ-दिल की दावा पिलाई जाती है”

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ख्वाइश बस इतनी सी है की तुम मेरे लफ़्ज़ों को समझो….

आरज़ू ये नही की लोग वाह वाह करें..

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वोह भी
बेवफ़ा निकले,
औरों की तरहा..

सोचा था की उनसे
ज़माने की बेवफ़ाई का गीला करेंगे..!!

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ईस राह-ऐ-मुहब्बत की बस बात ना पूछिये..

अनमोल जो ईंनसान थे, बे-मोल बीक गये.!

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तेरी तलाश में निकलू भी तो क्या फायदा…
तुम बदल गए हो…
खो गए होते तो और बात थी….

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जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन  क्यूंकि एक मुद्दत से मैंने न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले .!!

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“हमें तो प्यार के दो लफ्ज ही नसीब नहीं,,
और बदनाम ऐसे जैसे इश्क के बादशाह थे हम”!!

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मोहब्बत कब हो जाए किसे पता..

हादसे पूछ के नही हुआ करते …

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सब कुछ किया पर नाम ना हुआ,

महोबत क्यां करली बदनाम हो गए।

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उसकी आँखों में नज़र आता है सारा जहां मुझ को;

अफ़सोस कि उन आँखों में कभी खुद को नहीं देखा।

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उसने मुज से पुछा..मेरे बिना रह लोगे..??

सांस रुक गई..और उन्हें लगा..हम सोच रहे है..

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दावे मोहब्बत के मुझे नहीं आते यारो ..
एक जान है जब दिल चाहे मांग लेना ..

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जरुरी नहीं रौशनी चिरागो से ही हो.
बेटियां भी घर मैं उजाला करती हैं..

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लम्हों की दौलत से दोनों महरूम रहे ,
मुझे चुराना न आया, तुम्हें कमाना न आया

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ये संगदिलों की दुनिया है;
यहाँ संभल के चलना ग़ालिब;
यहाँ पलकों पे बिठाया जाता है;
नज़रों से गिराने के लिए।

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ये जमीनकी फ़ितरत है की हर चिजको सोख लेती है ,,,
वर्ना ,,
इन आँखों से गिरनेवाले आंसुऔ का एक अलग समंदर होता !!!

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मोहब्बत भी अजीब चीज बनायीं खुदा तूने,
तेरे ही मंदिर में,
तेरी ही मस्जिद में,
तेरे ही बंदे,
तेरे ही सामने रोते हैं,
तुझे नहीं, किसी और को पाने के लिए…!

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अब किसी और से मुहब्बत करलू तो शिकायत मत करना…।।
ये बुरी आदत भी मुझे तुमसे ही लगी है…..।।

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टूट  कर  भी  कम्बख्त  धड़कता  रहता  है ,मैने  इस  दुनिया  मैं  दिल   सा  कोई  वफादार नहीं  देखा। ……

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अगर यूँ ही कमियाँ निकालते रहे आप….

तो एक दिन सिर्फ खूबियाँ रह जाएँगी मुझमें….

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मतलबी दुनिया के लोग खड़े हैं, हाथो में पत्थर लेकर,
मैं कहा तक भागू शिशे का मुकद्दर लेकर..

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वो बचपन कितना सुहाना था सर ए आम रोया करते थे …
अब एक आँसू भी गिरे तो लोग हजारों सवाल करते है….

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“आवारगी छोड़ दी हमने
तो लोग भूलने लगे है
वरना
शोहरत कदम चूमती थी
जब हम बदनाम हुआ करते थे…”

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मैं वो शखश नही जो दिल पे खंजर न ले सकूं,
तुम ईतना ईमान रखना, सामने से वार करना…

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पूछा जो हमने किसी और के होने लगे हो क्या ?

वो मुस्कुरा के बोले … पहले तुम्हारे थे क्या .?

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हालात ने तोड़ दिया हमें कच्चे धागे की तरह…

वरना हमारे वादे भी कभी ज़ंजीर हुआ करते थे..

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करनी है खुदा से गुजारिश
तेरी दोस्ती के सिवा कोई बंदगी न मिले,
हर जनम में मिले दोस्त तेरे जैसा
या फिर कभी जिंदगी न मिले।

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‘हम वो हैं जो हार कर भी यह कहते हैं;
वो मंज़िल ही बदनसीब थी, जो हमें ना पा सकी;
वर्ना जीत की क्या औकात; जो हमें ठुकरा दे..

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हर एक इंसान हवा में उडा फिरता है…
फिर न जाने धरती पर इतनी भीड़ क्यों हैl

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किसी ने ग़ालिब से कहा :
सुना है जो शराब पीते हैं उनकी दुआ कुबूल नहीं होती !!

ग़ालिब बोले :
जिन्हें शराब मिल जाए उन्हें किसी दुआ की ज़रूरत नहीं होती ।।……….

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पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है.
अभी तो आए है जमीं पर .
आसमान की उडान अभी बाकी है.
अभी तो सुना है लोगो ने सिर्फ मेरा नाम.
अभी इस नाम कि पहचान बनाना बाकी है…

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जाम पे जाम पीने का क्या फ़ायदा,
शाम को पी सुबह उतर जाएगीm,
अरे दो बून्द दोस्ती के पी ले
ज़िन्दगी सारी नशे में गुज़र जाएगी..

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कौन कहता है कि दिल सिर्फ लफ्जों से दुखाया जाता है..

तेरी खामोशी भी कभी कभी आँखें नम कर देती हैं … !!

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चाँद ने की होगी सूरज से महोब्बत इसलिए तो चाँद मैं दाग है

मुमकिन है चाँद से हुई होगी बेवफ़ाई इसलिए तो सूरज मैं आग है

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मुहब्बत तो दिल देकर, की जाती है मेरे दोस्त।

चेहरा देखकर तो लोग,सिर्फ सौदा करते हैँ।..

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दोस्ती का रिश्ता पुराना नहीं होता;
इससे बड़ा ख़जाना नहीं होता;
दोस्ती तो प्यार से भी पवित्र है;
क्योंकि इसमें कोई पागल या दीवाना नहीं होता।
क्यों मुश्किलों में साथ देते हैं दोस्त;
क्यों गम को बांट लेते हैं दोस्त;
न रिश्ता खून से न रिवाज से बंधा;
फिर भी जिंदगी भर साथ देते हैं दोस्त।

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जनाजा इसीलिए भी भारी हे मेरा..

कि सारे अरमान साथ लिये जा रहा हूँ ।

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यूँ ना बर्बाद कर मुझे, अब तो बाज़ आ दिल दुखाने से ।

मै तो सिर्फ इन्सान हूँ, पत्थर भी टूट जाता है, इतना आजमाने  से ।

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खुद में काबिलियत हो तो भरोसा कीजिये साहिब।
सहारे कितने भी अच्छे हो साथ छोड जाते है।

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युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…

पता नही था की ‘किमत चेहरों की होती है..!!’

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वफादार और तुम…?? ख्याल अच्छा है,

बेवफा और हम…?? इल्जाम भी अच्छा है…

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बोतल में थी तो खामोश थी..
अन्दर गयी तो बवाल हो गयी..

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सामने मंजिल थी और, पीछे उसका वज़ूद…क्या करते, हम भी यारों.

रूकते तो सफर रह जाता… चलते तो हमसफर रह जाता…”

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हजारों झोपड़िया जलकर राख होती हैं,
तब जाकर एक महल बनता है.
आशिको के मरने पर कफ़न भी नहीं मिलता,
हसीनाओं के मरने पर “”ताज महल”” बनता है.

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माना की दूरियां कुछ बढ़ सी गयीं हैं

लेकिन तेरे हिस्से का वक़्त आज भी तनहा गुजरता है…

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मुझे मालूम है कि ये ख्वाब झूठे हैं और ख्वाहिशें अधूरी हैं…

मगर जिंदा रहने के लिए कुछ गलतफहमियां जरूरी हैं…!!

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हम बने थे तबाह होने के लिए……

तेरा छोड़ जाना तो महज़ इक बहाना था….!!

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मैं आपकी नज़रों से नज़र चुरा लेना चाहता हूँ,

देखने की हसरत है बस देखते रहना चाहता हूँ ।

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दर्द तन्हाँ कभी नहीं रहता
ये तुझे, मुझमें तलाश लेता है

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तुम से जिद करते तो हम मांगते क्या…!

खुद से जिद करके तो तुमको मांगा था …

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रुक गया है आसमान में चाँद चलते चलते……
अब तुम्हें, छत से उतरना चाहिए….

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खुद को लिखते हुए हर बार लिखा है ‘तुमको’ …
इससे ज्यादा कोई जिंदगी को क्या लिखता…!!

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उसने पूछा कि कौनसा तोहफा है मनपसंद?
…….
मैंने कहा वोह शाम जो अब तक उधार है…!!

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जो हम में तुम हो और तुम में हम..
तो बताओ, बीच में है काहे का वहम !

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उनकी ना थी खता, हम ही कुछ गलत समझ बैठे यारों……

वो मुहब्बत से बात करते थे, तो हम मुहब्बत समझ बैठे….. !!

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ऐ ज़िन्दगी मुझे तोड़ कर ऐसे बिखेर अब की बार…….

ना खुद को जोड़ पाऊँ मै, ना फिर से तोड़ पाये वो…..!!

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गल्हतफ़हमी की गुंजाईश नहीं सच्ची मुहब्बत में………

जहाँ किरदार हल्का हो कहानी डूब जाती है…….!!

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मेरी थर्ड क्लास शायरी के क़द्रदानों,
फ़र्स्ट क्लास शुक्रिया तो क़बूल करो…

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जिंदगी से कोई चीज़ उधार नहीं मांगी मैंने….
कफ़न भी लेने गए तो जिंदगी अपनी देकर….!!

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कुछ ज़ख्म सदियों बाद भी ताज़ा रहते है……
वक़्त के पास भी हर मर्ज़ की दवा नहीं होती…!!

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हाथ ज़ख़्मी हुए तो कुछ अपनी ही खता थी…..

लकीरों को मिटाना चाहा किसी को पाने की खातिर….!!

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मेरा कत्ल करके क्या मिलेगा तुमको…….
हम तो वैसे भी तुम पर मरने वाले हैं ….!!

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खामोश बैठें तो लोग कहते हैं उदासी अच्छी नहीं………

ज़रा सा हँस लें तो मुस्कुराने की वजह पूछ लेते हैं….!!

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सूखे होठो से ही होती हैं प्यारी बातें …
प्यास बुज़ जाये तो इंसान और अल्फाज़ दोनो बदल जाते हैं ..!!

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“हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं
जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं”

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होठों ने सब बातें छुपा कर रखीं ……
आँखों को ये हुनर… कभी आया ही नहीं ……

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ऐ अंधेरे देख ले मुँह तेरा काला हो गया ….
माँ ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया …

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खामोश हो पर चुप नहीं तुम…
ये आंखें तुम्हारी बहुत बोलती है

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कितनी सदियों के बाद मिले हो,

वक़्त से क्यों, इतना छिले हो!!!?

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इक ज़ख़्मी परिन्दे की तरह जाल में हम हैं,
ऐ इश्क़ अभी तक तेरे जंजाल में हम हैं।

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खुदा भी अब मुझसे बहुत परेशान है……

रोज़ रोज़ जब से दुआ में तुझे मांगने लगा हूँ….!!

********

मालूम होता है भूल गए हो शायद…….
या फिर कमाल का सब्र रखते हो…..!!

********

कब ठीक होता है हाल किसी के पूछने से…..

बस तसल्ली हो जाती है कोई फिकरमंद है अपना…..!!

********

आज फिर बैठे है इक हिचकी के इंतजार में…….

पता तो चले कब हमें याद करते है…..!!

********

वजह पूछोगे उम्र गुज़र जाएगी………

कहा न अच्छे लगते हो तो बस लगते हो ..!!

********

मुस्करा के जो देखा तो कलेजे में चुभ गये………

खँजर से भी तेज लगती हैं आँखे जनाब की…..!!

********

न जाने क्यूं हमें इस दम तुम्हारी याद आती है……

जब आंखों में चमकते हैं सितारे शाम से पहले…!!

********

“ना मुस्कुराने को जी चाहता है,
ना आंसू बहाने को जी चाहता है,
लिखूं तो क्या लिखूं तेरी याद में,
बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता है.”

********

कुछ ना रहा पास तो रख ली संभाल कर तन्हाई
.
.
ये वो सल्तनत है जिसके बादशाह भी हम
वज़ीर भी हम और फ़क़ीर भी हम………

********

ना रख इतना गरूर ..अपने नशे में ए शराब,

तुझ से जयदा नशा रखती है, आँखें किसी की..

********

“इस कदर हर तरफ तन्हाई है,
उजालो मे अंधेरों की परछाई है,
क्या हुआ जो गिर गये पलकों से आँसू,
शायद याद उनकी चुपके से चली आई है

********

“तू देख या न देख,; तेरे दॆखनॆ का गम नहीं,

पर तेरी यॆ ना दॆखनॆ की अदा दॆखनॆ से कम नहीं ..”

*********

इतनी पीता हू….
इतनी पीता हू की मदहोश रहता हू.
सब कुछ समझता हू पर खामोश रहता हू
जो लोग करते ह मुझे गिराने की कोशिश
मे अक्सर उन्ही के साथ रहता हू|.

********

कभी फूलों की तरह मत जीना,
जिस दिन खिलोगे… टूट कर बिखर्र जाओगे ।

जीना है तो पत्थर की तरह जियो;
जिस दिन तराशे गए… “खुदा” बन जाओगे ।।

********

हकीकत में ये ख़ामोशी हमेशा चुप नहीं होती।

कभी तुम ग़ौर से सुनना ये बोहत क़िस्से सुनाती है।

********

बुरा नहीं सोचा मैंने कभी भी किसी के लिए……

जिसकी जैसी सोच उसने वैसा ही जाना मुझे ..

********

तेरी महफिल से उठे तो किसी को खबर तक नही थी !
तेरा मुड़-मुड़कर देखना हमे बदनाम कर गया …

********

“जाने कब-कब किस-किस ने कैसे-कैसे तरसाया मुझे,

तन्हाईयों की बात न पूछो महफ़िलों ने भी बहुत रुलाया मुझे”

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कैद कर दिया सापों को ये कहकर सपेरे ने.
बस अब ईन्सानो को डसने के लिये ईन्सान काफी है.

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ला तेरे पेरों पर मरहम लगा दूं…

कुछ चोट तो तुझे भी आई होगी मेरे दिल को ठोकर मार कर…!!!

********

उनसे कहना कि किस्मत पे इतना नाज़ ना करें,

हमने बारिश में भी जलते हुए मकान देखें हैं

********

मौत का आलम देख कर तो ज़मीन भी दो गज़ जगह दे देती है…

फिर यह इंसान क्या चीज़ है जो ज़िन्दा रहने पर भी दिल में जगह नहीं देता…

********

ये मुकरने का अंदाज़ मुझे भी सीखा दो

वादे नीभा-नीभा के थक गया हूँ मैं…

********

“दीदार की ‘तलब’ हो तो नज़रे जमाये रखना ‘ग़ालिब’
क्युकी, ‘नकाब’ हो या ‘नसीब’…..सरकता जरुर है.”

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रेगिस्तान भी ” हरा ” होता हे..,
जब ” पर्श ” नोटों से भरा होता हे..!

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हमे पता था की उसकी मोहब्बत में ज़हर हैं ;
पर उसके पिलाने का अंदाज ही इतना प्यारा था की हम ठुकरा ना सके !

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लोग कहते है हम मुस्कराते बहुत है…
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते…

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गम में भी हम इस तरह जीते हैं
जैसे शादियों में लोग शराब पीते ह

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शायद ख़ुशी का दौर भी आ जाये एक दिन….

गम भी तो मिल गए थे तमन्ना किये बगैर… !

********

बादलों से कह दो अब इतना भी ना बरसे….

अगर मुझे उनकी याद आ गई,
तो मुकाबला बराबरी का होगा….

********

छीन लेता है हर चीज मुझसे …
ए खुदा…
क्या तू भी इतना गरीब है????

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આવી છે દુનિયા


બધુ જ સારું હોય છે જ્યાં સુધી તમારો સિતારો ઝળહળે છે,
એક વાર પનોતી બેસે પછી આખું આકાશ માથા પર પડે છે.

સારું હોય ત્યારે અજાણ્યા લોકો પણ પાછળ પાછળ ફરે છે,
એક વાર નિષ્ફળતા મળે પછી સગાઓ પણ ઉચાળા ભરે છે.

સિતારો બુલંદ હોય ત્યારે બધા બહુ નમ્ર થઈને મળે છે,
પગ ધરતી પર આવી જાય પછી એ બધા આંખોથી કરડે છે.

સમય હોય સારો ત્યારે તો સિંહ પણ તમારાથી ડરે છે,
જો નીચે પછડાયા તો પછી ગલીનું  કૂતરુંય દાદાગીરી કરે છે.

તમારા સુવર્ણ કાળમાં કેટલાય માણસો તમારા પર મરે છે ,
અને નસીબ ખરાબ હોય ત્યારે લોકો તમારા માથા પર ચડે છે.

સુખના દિવસોમાં તમારો સમય બહુ ઝડપથી સરે છે,
દુખના દિવસો જલ્દી પતે એ માટે તમારું મન રીતસર કરગરે છે.

 

“એક અસામાન્ય સમોસાવાળો”


આજનુ ભારત ઘણું જ અદભુત છે. કઈ કહેવાય નહિ ક્યારે તમને કેવી અજબ ગજબ
વ્યક્તિ મળી જાય. વાત જાણે એમ છે કે,
મારી નોકરી તરફથી ઘરે જવાની ટ્રેનની એ
મુસાફરીની વાત છે. હું ૧૮.૫૦ કલાકે ચર્ચગેટથી ટ્રેનમાં બેઠો, જ્યારે ટ્રેન મરીન લાઇન છોડવાની તૈયારીમાં જ હતી અને
ત્યાં એક સમોસાવાળૉ ખાલી બાસ્કેટ લઇને
ત્યાં આવ્યો અને મારી બાજુની જ સીટ પર બેઠો.

તે ડબ્બામાં ઘણી છુટી છવાઈ જગ્યા ઉપર
ઘણાં બધા લોકો બેઠા હતા. અને તે મારાથી થોડા જ અંતરે બેઠો હતો. મેં એની સાથે
વાતો કરવાનું શરૂ કર્યુ.

મેં કહ્યુ, “આજે તમારા બધા જ સમોસા વેચાઇ ગયા લાગે છે.
સમોસાવાળૉ (સ્મિત કરતાં) : હા ભગવાનની દયાથી બધાજ વેચાઈ ગયા.
મેં કહ્યુ : હું ખરેખર એ વિચારથી દુ:ખી થાવ છું કે, તમેં લોકો આવા એકને એક કંટાળાજનક
કામથી થાકી નથી જતા ?
સમોસાવાળો : શુ કરીએ સાહેબ? આવા સમોસા જ રોજ વેચીને અમેં દરેક સમોસા દીઠ ૭૫ પૈસા કમીશન મેંળવીએ છે.
મેં કહ્યુ : ઓહ્હ્હ !! ખરેખર ?? તમેં એક
દીવસના કેટલા નંગ સમોસા વેચાણ કરો છો ?
સમોસાવાળો : અઠવાડીયામાં કામકાજના દીવસો દરમ્યાન ૪,૦૦૦ થી ૫,૦૦૦ નંગ અને રજાના દીવસોમાં ૩,૦૦૦ નંગ સમોસા એક દીવસમાં વેચાણ કરૂ છું અને હું થોડી વાર માટે કાંઇ જ બોલી ન શક્યો અને એની સામેં અવાક બનીને તાકી જ રહ્યો. કારણ ફક્ત એટલુ જ કે, “એ માણસનું કહેવુ હતુ કે,
તે રોજના ૩,૦૦૦ નંગ સમોસા વેચે છે. એક
નંગદીઠ ૭૫ પૈસા કમીશન એટલે તેની રોજની આવક (કમાણી) રૂ.૨,૦૦૦/- છે.
તેથી તેની દર મહીનાની ૬૦,૦૦૦ ની કમાણી થાય.
હે ભગવાન ! હવે હું તેની પાસે વાતચીત
કરવા લાગ્યો, જે હવે ટાઇમપાસ ન હતો. મેં કહ્યુ : તમેં આ સમોસા જાતે બનાવો છો?
સમોસાવાળો : ના સાહેબ, અમેં સમોસા બનાવનારનાં ત્યાંથી તૈયાર સમોસા મેંળવીએ છે અને ફક્ત તેને વેચીએ છીએ
અને પછી માલિકને બધા જ પૈસા આપી દઈએ છે. તેમાંથી એ અમને નંગ દીઠ ૭૫ પૈસાનું કમીશન આપી દે છે. હવે હું આશ્ચ્રર્યચકિત થઈને એક પણ શબ્દ બોલી ન શક્યો, પણ તે સમોસાવાળાએ
વાત ચાલુ રાખતા મને કહ્યુ “ પરંતુ સાહેબ એક વાત કહું ? અમારી આમાંથી મોટા ભાગની બધી જ કમાણી અમારી રહેણીકરણી અને વસવાટના ખર્ચામાં જ જતી રહે છે અને
બાકી વધેલા નાણાંમાંથી જ અમેં અમારો બીજો ધંધો ચલાવી શકવા સક્ષમ છીએ.
મેં કહ્યુ : બીજો ધંધો? તમેં બીજો કયો ધંધો કરો છો ?
સમોસાવાળો : જમીનનો ધંધો. “ મેં ૨૦૦૭
માં પાલઘરમાં ૧.૫ એકર જમીન ૧૦
લાખમાં ખરીદી હતી. અને ત્યારબાદ થોડા જ
સમયમાં ૬૦ લાખમાં વેચી દીધી હતી. અને હવે મેં ઉમરોલીમાં ૨૦ લાખમાં જમીન ખરીદી છે.
મેં કહ્યુ : તમેં બાકીની રકમ સાથે શું કર્યું?
સમોસાવાળો : બાકી રહેલી રકમમાંથી ૨૦ લાખ મેં મારી છોકરીના લગ્ન માટે રાખ્યા છે. અને બીજા ૨૦ લાખ બેન્કમાં ફીક્સ કર્યા છે.
મેં કહ્યુ : તમે કેટલુ ભણ્યા છો?
સમોસાવાળો : મેં ત્રીજા ધોરણ સુધી ભણીને
ચોથા ધોરણમાં ભણતર છોડી દીધુ હતું, પરંતુ હું સારી રીતે વાંચી અને લખી શકુ છું.
તમારા જેવા ઘણા લોકો જે સારા કપડા પહેરી ટાઈ લગાવી, નવા બુટ પહેરીને છટાદાર
અંગ્રેજી બોલતા હોય અને એરકંડીશનવાળી ઓફીસોમાં નોકરી કરતા હોય છે, પણ મારા માનવા પ્રમાણે તમે લોકો અમારા ગંદા કપડા પહેરતા અને સમોસા વેચતા લોકો કરતા વધારે કમાણી તો નઈં જ કરી શકતા હોવ.
આ સમયે એના આવા પ્રતિભાવ ઉપર હું શું જવાબ આપુ ? કારણ કે, હું એક લાખોપતિ સાથે વાત કરી રહ્યો હતો. અને ત્યાંજ ટ્રેન ખાર સ્ટેશન પર ઉભી રહી. અને
સમોસાવાળો તેની જગ્યા પરથી ઉભો થયો અને મને કહ્યુ, “સાહેબ, મારૂ સ્ટેશન આવી ગયુ છે.
તમારો આગળનો દિવસ શુભ અને મંગલમય જાય તેવી આશા સાથે આવજો.”
મેં કહ્યુ, “તમારી સંભાળ રાખજો” આનાથી વધારે હું તેને શું કહી શકું ? (અને કદાચ કહી શકુ પણ નહી)
એટલે જ કહે છે કે, સામાન્ય માણસોની શક્તિને કદાપી નજર અંદાજ ન કરવી જોઇએ.
ડૉ. અબ્દુલ કલામે પણ કહ્યુ છે કે, છેલ્લી પાટલીએ બેઠેલા વિદ્યાર્થીઓ જ્યાં સુધી સ્પર્ધામાં ભાગ ન લે ત્યાં સુધી જ પહેલી પાટલીએ બેઠેલા વિદ્યાર્થીઓ બુદ્ધીશાળી હોય છે.

ટૂંકમાં, NEVER UNDER ESTIMATE THE
POWER OF COMMON MAN

 

Shayri part 2


Ahistaa Ahistaa Zindagi Se Nafrat Ho Rahi Hai…

Lagta He Dubara Is Dil Ko Muhabat Ho Rahi Hai…

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Kaun kehta hai ki musafir zakhmi nahin hote;
raaste gawah hain,
bas kambakht gawahi nahin dete..

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HAR WAQT JINDGI SE GILE SIKVE THIK NAHI….
KABHI TO CHHOD DO IN KASTIYO KO MOUJO K SAHAARE….

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Aavargi chhod di hamne to log Bhulne lage Hame,

varna Shohrat kadam chumti thi jab hum Badnam huva karte The.

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Kyu Dare, ki Zindagi Me Kya Hoga,
Har Waqt Kyu Soche Ki Bas Bura Hoga,
Badhte Rahe Bas Manzilo Ki ore,
Kuchh Na Bhi Mila To Kya,
Tazurba to naya Hoga.

********

Ab tu gam de ya fir khushi

Ye khuda ab jo hai teri marji….

********

Hak se de to teri Nafrat bhi Sar Aankho par. . .

Kheriyat me to teri mohabbat bhi manjur nahi. . .

********

Kuch Nasha To Aapki Baat Ka Hai;
Kuch Nasha To Dheemi Barsaat Ka Hai;
Humein Aap Yun Hi Sharabi Na Kahiye;
Is Dil Par Asar To Aap Se Mulakat Ka Hai!

********

Baat to hai aam si, per itni aam bhi nahi…………………,

Sub ko khushiyan mil jati hain , mera hissa kho jata hai…

*******

Bohat Mushkil Ho Gaya Hai Khud Ko Sambhal Rakhna,

Magar Woh Keh Gayaa Hai “Apna” Khaiyal Rakhna

*******

Meray Bachpan Ke Din Bhi Kya Khoob The…. ,

Be-Namazi Bhi Tha Aur Be-Gunah Bhi…

********

Tum Mohabbat bhi Maosam Ki Tarha Nibhate Ho,

Kabhi baraste Ho Kabhi ek boond Ko Tarsate Ho,

********

Mayoos Ho Gaya Hun Mai Zindagi Ke Is Safar Se,

Maqsad Ki Muhabat Aur Matlab Ki Dosti Se….!

********

Ajeeb halat hote hain is Muhabbat mein Dil ke ,

Udaas jab bhi Yaar ho Qasoor apna lagta hai…

********

Hum Ko Maloom Nahin Chahat Ke Taqaze Lekin ,

Hum Ne Teri Baaton Ke Siwa Har Baat Bhula Rakhi Hai

********

Dal de apni duaon ke kuchh alfaz meri jholi me,

Kya pata tere lab hile aur meri zindagi sawar jaye..

********

Anjaam-e-wafaa ye hai,

jisne bhi muhabbat mein..

Marne ki duaa maangi, jeene ki sazaa paai!!!!!

********

Woh Rasta Jo Hamain Uske Dil Tak Le Jata

Umar Saari Usi Rastay Ki Talaash Mai Guzri…..

********

Koi to hai mere andar mujhe sambhale hue ‘Rakshat’..

Ke be-qaraar sa reh kar bhi bar-qaraar hun main…

*******

Nazuk Mizaaj Hai Woh Pari Kuch Is Qadar,

Payal Jo Pehni Paon Mein To Cham Cham Se Darr Gai…

********

Sach Kaha Tha Kisine Tanhai Me Jina Sikh . . . . .

Mohabbat Jitani Bhi Sachi Ho Sath Chhod Hi Jati Hai…

********

Aap Ko Main Ne Nigaahon Me Basa Rakha Hai…!!

Aaina Choriye” Aainey Me Kya Rakha Hai….!!!!!

********

HAR WAQT JINDGI SE GILE SIKVE THIK NAHI….

KABHI TO CHHOD DO IN KASTIYO KO MOUJO K SAHAARE….

********

Youn Bhi To Raaz Khul Hi JaayeGa Ek Din Humari Mohabbat Ka…!!

Mehfil Mein Jo Hum Ko Chorr Kar Sab Ko Salaam Karte Ho…!!

********

Tere Ishq Se Mili Hai Mere Wajood Ko Ye Shohrat…!

Mera Jikr Hi Kaha Tha Teri Daastan Se Pehle…

********

naraaz kyu hote ho chale jayenge teri mehfil se

muje mere dil ke tukde to uthane to do…

********

Be wafaa wakt thaa..

Tum thy…

ya Muqaddar meraa

baat itni hy k anjaam Judaai niklaaa.

********

Maut Se Keh Do Ki Hum Se Naraazgi Khatam Kar le Ab…!

Wo Bahut Badal Gaye Hai Jinke Liye Hum Jiya Karte Hain…

********

Tu hosh me thi phir bhi hume pehchaan na paai

Ek hum hai ki pee kar bhi tera naam lete rehte hai…

********

Un parindo ko kaid karna meri fitrat me nahi…

jo mere dil k pinjre me reh kar bhi dusro ke sath udne ke shauk rakhte hai…

********

Tum rakh na sakoge mera tohfa
sambhal kr…

Warna abhi dil de deta apne sine
se nikal kar..!!!

********
Hamare baad nahi aayga tumhe chahat ka maza……

Tum sab se kehty firogy mujhe chaho uski tarah…

********

Tum Aaj Har Saans K Sath Yaad Aa Raahe Ho,,

Ab Teri Yaad Ko Rok Dunnn… .. . Ya Apni Saans Ko…??

********

Paas Rahne Se Bhi Kam Nahi Hota…!!

Faaasla Jo Dilo’n Mein Hota Hai…!!

********

Bohat Rokta Hoon Khud Ko Tumhein Yaad Karne Sy . . .

Lakein Kya Karon, Ye Nadan Dil Na-Farmaan Bohat Hai…

********

Har Raat Guzarti Hai Meri Taron Ke Darmiyaa’n.

Main Chaand To Nahi Mgar Tanha Zarur hoon…

********

Dhoond raha hon Lekin Nakaam hoo abhi Tak….,

Wo Lamha, jis mein tu yaad Na aayi ho….

*******

Jinn Ke Paas Hoti Hain Umer Bhar Ki Yadain,

Woh Log Tanhai Mein Bhi Tanha Nahi Hotay..

********

Pachtaya bahot uss k darwaze per dastak de kar

dard ki inteha ho gai jab uss ne poocha kon ho tum..

********

Mohbbat Main Jhukna Koi Ajeeeb Baat Nahi,

Chamakta Suraj Bhi to Dhal Jata Ha Chaand k Liye.! …

********

Maujood thi Udaasi abhe Pichhli Raat Ki,,

Behla tha DiL Zara Sa K Phir Raat ho Gai.!

********

Hum bhi maujood thy taqdeer k darwaazey par…

Log daulat par girey, humney tujhe maang liya….

********

Un Ko Dekha To kisi chiz ki Gumshudgi Ka Ehsaas Huwa

Hath Seene Pe Jo Rakha To Dil Maujood Na Tha,…

********

Mere aib mujhe ungliyon pe ginwaao,

Bas meri ghair maujoodgi mein mujhe bura na kehna..!

********

Ab tak Utarty hain Wahan khushbo k Qafily…

Bhooly Se likh diya tha…
Tera Naam jis Jagah.

********

Tohmaten To Lagti Rahi Roz Nayi Nayi Hum Par…….!!!

Magar Jo Sab Se Haseen Ilzaam Tha Woh Tera Naam Tha…

********

Kabhi Jo Bicharna Chaho To Ye Soch Lena….

Meri Saanso Ko Tum Bin Chalna Nahi Aata…

********

Badi mushkil se bnaya tha apny ap ko kabil us k….

us ne ye keh kr bikhair diya…..

k tujh se muhabbat to ha pr tujhy pany ki chaht nai……..

********

Unka waada hai ki woo laut ayenge, issi umeed par hum jiye jayenge, yeh intezaar bhi unhi ki tarah pyaara hai, kar rahe the, kar rahe hai or kiye jayenge.

********

Jeene ki arzoo me mare jaa rahe hai log….

Marne ki aarzoo me jee raha hu me..

********

Qatal Huwa Humara Iss Tarha
Qiston Main..!

Kabhi Khanjar Badal Gaye Kabhi
Qaatil Badal Gaye…!

********
Sukoon milta hai doh lafz kaagaz par utaar kar…

Keh bhi deta hu aur awaaz bhi nahi aati…

********

” Teri yaadon ki baarish jab bhi
barasti hai mujh par…..

Main bheeg zaroor jaata hoon
sirf palkon ki hadd tak…..

********

Dil sulagta hai Tere sard ravaiyye se Qateel

Dekh is barf ne kya aag lga rakhi hai..

********

Khwab me b WO ab nahi Aaty
Nafratain in dino Arooj pe hain..

Dikhaway Ki Mohabbat Se Behter Hai K Hum Se Nafrat Hi Karo…

********

Hum Sache Jazbon Ki Badi Qadar Kia Krte Hain…

Ye alag bat h ki taqdeer lipat kr rone lagi,
warna baahein toh tujhe dekh kar feli thi…

*********

Chai ke cup se uthte dhuein mein teri shakl nazar aati hai,

Tere khyalon mein kho kar aksar meri chai thandi ho jaati hai.`

*********

Mai Tumse kaise kahun Yar-e-Meharban Mere…

K Tu Hi Ilaaj Hai meri har Udaasi ka…

********

Hadd se badh chuka hai aapka nazar andaaz karna

aisa salook na karo k hum bhulne pe mazbur ho jaye!!

********

Kitnay Majboor Hain Taqdeer Kay Haathon,

Na usy panay ki Auqat, Na usy khony ka hosla….!

********

Ho Sakti Hy Muhabbt Zindgi Meh Dubara B…

Bas Hosla Ho,,Ek Dafa Phir “Barbaad” Hone Ka…!!!

********

Pehla Sa Wo JunooN,,
Wo Mohabbat Nahi Rahi,,

Kuch Kuch Sambhal Gaye Hain,
Unki Duaa Se Hum..!!

*******

Mayoos Ho Gaye Hain hum Zindagi ke Safar Sy,

Maqsad Ki Mohabat , Matlab Ki
Dostiyaa , Dikhawy K Rishty…!

*******

“MOHABBAT” k ilawa Kuch Nahi Tha teri Ankhon Me,

Yeh “NAFRAT” Ab Zamane Ki Kahan Se seekh Li Tum ne…!!!

********

Muhabbat Hay K Nafrat Hay Koi Itna Tou Samjhaye..

Kabhi Main Dil Say Ladta Hun, Kabhi Dil Mujh Say Ladta Hay…!!

********

Tum Jante Ho Mery Dil Ki Awaaz….???

khair Choro!! Jante Hote To Mere Hote…!!

********

Tum, Tum aur sirf Tum,
Lo khatam hui yeh dastan dil ki..
Khuda Na Kary _____ .

Tuje Tuj Sa Miley Koi . !!

********

Teri yaad se to acchhi meri sharaab hai zaalim. …

Kambakht rulaane Ke bad sula to deti hai mujko. …

********

Meri Takmeel Mein Shaamil Hai Tera Hissa Bhi,

Mein Agar Tujh Se Na Milti To Adhoori Rehti…

********

Meri Tum Bebasi daikho

Mujhay Tumse Mohabbat Kay Siwa Kuch be Nahi Ata……

********

Suno !

Ye jo ishq ha na…,,

Jaan le leta ha,, Magar phir bhi maut nahi ati…!!

********

Jate Hue Us Shakhs Ne Ek Ajab Bad’dua Si Di..!

Tujhe MiLein do Jahan Ki Khushiyan Par Koi Mujh Sa Na Mile..!

********

Wo Log Q miLte hi Utar jate hain diL main

Jin Logon se Qismat k Sitare nhi miLte…

********

Tera Bhi Hota Agar DiL, Ae IshQ

Din Main Taare Tujhe Bhi Dikha Daiti…

********

Mere Sajdon Mein Kami To Na Thi Aye KHUDAa

Kya Mujh Se Bhi Barh K Kisi Ne MaanGa Tha Usey…

********

Bhooool Jaaata Hooon Saaari Duniyaaa ………!

Mujhy Tum Itna Yaaaad Aaaty Ho…

********

Gilaa Banta Hi Nahi Be’Rukhi Ka…!!

DiL Hi To Tha____ Bhar Gaya HoGa…!!

********

Hum Dono Mil Bethen Gy To Raat Guzar Jaye Gi, .

Tanhai Ka Mujh Se Yeh Kehna Bohat Acha Laga…

********

Kabhi PathaR ki Thokar se Bhi NhiN ati KharaaSh,,,,

Kabhi Ek zra si Baat se InsaaN bikher Jata he……!!!!!

*******

Halaat kuch iss tarah badlay uss k or meray dermiyan.

Na usay meri zarurat rehi na mujhay uss ki tamana…

*******

Ay Tabib ! Ek Bar Tou Kr dy Dawa-e-Dard-e-Dil,

Agli Bar Toba, So Baar Toba, Hum Muhabbat Na kary Gy………………

*******

Tery Grajney Se bohot khOff Aata hai ..

Ay Badal ..

Tu Be-Awaaz hi BaraS liya kar mere AnSuon ki tarah…..

*******

Abb koiiii aarzo nhiii baki..

justaju meriii akhriiii tum thy….!

********

Betab Kar Gayi Mujhe Jaadu Bhari Nazar…..

Hum Unke Dekhne Ki Ada Dekhte Rahe….

*******

Jab Jaan Pyari Thi Toh Dushman Hazaron The…

Ab Marne Ka Shauk Hua To Qatil Nahi Milte….

********

Agar khuda nahi to zikre kyu …

aur khuda hai to phir fikre kyu……

*******

Khafa nahi hu tujse ae zindagi

aadat si pad gai hei ruthne ki..

*******

Mat Chaho Kisi Ko Itna Toot Kar Zindagi Me

Bichard Gaye Toh Har Ek Ada Tang Karegi..!!

********

Mulaqate jaruri hei rishte bachaane ke liye

lagaakar bhul jaane se poudhe sukh jaate hei…

*******

Bus ik khayal sy anso chupa lye hum ne

udas rah kar ksi ko udas kya karna!!!?

********

Ansu0n ko khabar kaise hui teri judai ki..

Shayad ye khud hi nikal aye hain teri talash me…

*******

Mujhe Na Dhoond Zameen-o-Asman ki Gardishon mein,,,,,

Mein Agar tere dil Mein Nahin to kaheen bhi nahi…

*******

Umeed -e- wafa na rakhna un logon se dosto .

Jo milte h kisi aur se aur hote h kisi or ke…

********

Dil Ki Duniya Kuch Iss Tarah Se Ujdi,

Usne Dard Ka Aadi Banna Ke Dard Dena Chodd Diya!

********

Betab Kar Gayi Mujhe Jaadu Bhari Nazar…..

Hum Unke Dekhne Ki Ada Dekhte Rahe….

********

Muqaddar Mein Raat Ki Neend Nahi Toh Kya Huva,

Jab Mout Aayegi Toh Jee Bhar Ke Soa Lain Ge.

*******

KHayal_e_Yarr mein neend ka tassawur kaisa?????

Ankh lagti he nai hai Ankh lagi hai jub se..

********

Nahi Rahi Woh Muhabbat Ki Haqiqat Aaj K Daur Main,,,

Nafz Ki Pyaas Bujhane Ko Log Ishq Ka Naam Dete Hain…

********

Khud Se Hi Fursat Na Mili Kabhi Warna

Hum Agar Kisi K Hotay Sirf Tumhare Hotay…

********

Shikway, To Youn Karte Ho Mujh Se

Jese Sirf, Mere Hee Ho Tum…

********

Ye tera khel na ban jaye haqiqat ek din…

Ret pe likh k mera naam mitaya na karo…

********

Ene to bas kem chho puchhyu hatu….

Mara mate ey kya ochhu hatu!!!!?

********

Aksar Log Hame Bhul Jate Hai,
Aur Hum Bewkuf
Unki Yaando Me,
Apna “AASHIYANA” Bana Lete Hai.!!

*******

Tere Husn Ko Parde Ki Zarurat Hi Kya Hai,

Kaun Hosh Mein Rehta Hai
Tujhe Dekhne Ke Baad.!

*******

Usne iss nazakat se mere hotho ko chuma ,

Ki Roza bhi na tuta aur iftari bhi ho gayi,

*******

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#+919558767835

 

Shayri


“गलत कहेते है लोग की सफेद रंग मै वफा होती है…दोस्तो…!!!!

अगर ऐसा होता तो आज “नमक” जख्मो की दवा होता…..”

********

“कई रिश्तों को परखा तो नतीजा एक ही निकला,
जरूरत ही सब कुछ है,मुहब्बत कुछ नहीं होती ।”

********

बडी खामोशी से भेजा था गुलाब उसको…
पर खुशबू ने शहर भर में तमाशा कर दिया.

********

तू रूठा रूठा सा लगता है
कोई तरकीब बता मानाने की

मैं ज़िन्दगी गिरवी रख दूंगा
तू क़ीमत बता मुस्कुराने की

********

कुछ सही तो कुछ खराब कहते हैं,
लोग हमें बिगड़ा हुआ नवाब कहते हैं,
हम तो बदनाम हुए कुछ इस कदर,
की पानी भी पियें तो लोग शराब कहते हैं…!!!

********

कितना भी चाहो ना भूला पाओगे
हमसे जितना दूर जाओ नज़दीक पाओगे
हमे मिटा सकते हो तो मिटा दो
यादें मेरी, मगर….
क्या सपनो से जुदा कर पाओ गे हमे!!

********

अब तुझे रोज़ ना सोचें तो तड़प उठते हैं हम…..!
एक उम्र हो गयी है तेरी याद का नशा करते करते….!!

********

जिंदगी में दोस्त बहुत कम मिलेंगे,
हर मोड़ पे गम ही गम मिलेंगे.
जिस मोड़ पे आपको छोड़ देगी ये दुनियाँ,
उस मोड़ पे आपको सिर्फ़ हम मिलेंगे.

********

कसूर मेरा था तो कसूर उनका भी था,
नज़र हमने जो उठाई थी तो वो झुका भी सकते थे…”

********

तुम छत पे ना जाया करो……..
शहर मेँ बेवजह, ईद की तारीख बदल जाती है…

********

तुम खुश-किश्मत हो जो हम तुमको चाहते है…

वरना,

हम तो वो है जिनके ख्वाबों मे भी लोग इजाजत लेकर आते है…!!

********

अजीब कशमकश थी, कि जान किसको दे,

वो भी आ बैठे थे, और मौत भी…….

********

“कल किसी और ने खरीद लिया तो शिकायत ऩ करना,
इसलिए आज हम सबसे पहले तेरे शहर मे बिकने आये है.”

********

तनहा रहेने का भी अपना मज़ा है दोस्तों…….

यकीन होता है की कोई छोड़कर नहीं जायेगा,
और
उम्मीद नहीं होती किसी के लौट आने की…!!

********

वो सो जाते हे अक्सर हमें याद् किये बगैर,
हमें नींद भी नहीं आती उनसे बात किये बगैर.

कसूर उनका नहीं हमारा है….
उन्हें चाहा भी तो उनकी इजाज़त के बगैर……!!

********

हर कोई मुझे जिंदगी जीने का तरिका बताता है।
उन्हे कैसे समझाऊ की एक ख्वाब अधुरा है मेरा…
वरना जीना तो मुझे भी आता है.

********

कुछ ईस तरह झटकाइ उसने अपनी गीली जुल्फे नहाने के बाद दोस्तों

की आज सारे शहर में बारिश का मौसम छा गया……..

********

अगर प्यार में पैसे की अहमियत
नहीं होती तो हर कहानी में
लड़की के ख्वाबों में कोई राजकुमार
ही क्यों होता है?
कभी सुना है कि “मेरे सपनों का मोची,
बारात ले कर आएगा” ???….

********

ये वक़्त बेवक़्त मेरे ख्यालों में आने की आदत छोड़ दो तुम,
कसूर तुम्हारा होता है और लोग मुझे आवारा समझते हैं..!!

********

ख्वाइश बस इतनी सी है की तुम मेरे लफ़्ज़ों को समझो….
आरज़ू ये नही की लोग वाह वाह करें.

********

गिरा दे जितना पानी है तेरे पास ऐ बादल.

ये प्यास किसी के मिलने से बुझेगी तेरे बरसने से नही।

********

किसी को मिल गया मौका, बुलन्दियों को छूने का,
मेरा नाकाम होना भी किसी के काम तो आया।

********

मुस्करा के जो देखा तो कलेजे में चुभ गये………
खँजर से भी तेज लगती हैं आँखे जनाब की…..!!

********

मैं जानता हूँ …. फिर भी पूछता हूँ …
तुम आईना देख कर बताओ … मेरी पसंद कैसी हैं .…

********

ना जाने इस ज़िद का नतीजा क्या हो…..
समझता दिल भी नहीं, वो भी नहीं,मैं भी नहीं….!!

********

आदत मुझे अँधेरों से डरने की डाल कर……..
कोई मेरी जिंदगी को रात कर गया…..!!

********

मुझे देख कर तेरी हैरानी लाज़मी है…..
इस दौर में इंसान कम ही मिला करते हैं…!!

********

है तमन्ना फिर, मुझे वो प्यार पाने की…….
दिल है पाक मेरा , ना कोशिश कर आज़माने की …!!

********

तेरी इस बेवफ़ाई पे फिदा होती है जान मेरी….
खुदा ही जाने… अगर तुझमें
वफ़ा होती तो क्या होता…!!

********

वो कतरा बनके हुए आपे से बाहर …
मैँ दरिया होकर भी अपनी औकात मेँ हूँ” …

********

हुनर-ओ-इश्क अब सीख कर आया हूँ………
चलो फिर से खेल दिल का खेलते है…..!!

********

खुदा भी अब मुझसे बहुत परेशान है……
रोज़ रोज़ जब से दुआ में तुझे मांगने लगा हूँ….!!

********

तुम बहुत दिल-नशीन थे मगर…….
जब से किसी और के हो गए हो….ज़हर लगते हो…..!!

********

इस कदर शिद्दत से चाहा था मैने उसको यारो…….
अगर दुश्मन भी होता तो ानिभाता उम्रभर……!!

********

न जाने क्यूं हमें इस दम तुम्हारी याद आती है……
जब आंखों में चमकते हैं सितारे शाम से पहले…!!

********

खेल रहा हूँ इसी उम्मीद पे मुहब्बत की बाजी…….
कि एक दिन जीत लेंगे उन्हें, सब कुछ हार के अपना….!!

********

लगता है इस बार मुझे मोहब्बत होकर ही रहेगी,
आज रात ख्वाब में मैंने खुद को बरबाद होते देखा है….

********

हम भी अक़्सर इन फूलो  कि तरह तन्हा रहते हैँ..
कभी ख़ुद टूट जाते है, कभी लोग हमे तोड़ जाते है..

********

ऊँची इमारतों में छुप गया मकान मेरा……..
कुछ लोग मेरे नसीब का… सूरज भी ले गए….

********

ठंड के कहर में, वो फकीर भी मर गया….
जो एक रुपये में,लाखों की दुआएँ देता था.

********

अपनी दोस्ती का बस
इतना सा असूल है…

ज़ब आप कुबूल है तो
आपका सब कुछ कुबूल है..

********

मेरा नसीब कहता है
मेरे हाथों की लकीरों में
हर तरफ
तेरा नाम लिखा है
फिर
तूँ मेरे साथ
क्यूं नहीं है
या तो
लकीरों का
इम्तहान ले रही है
या फिर
खुद के हाथ से
मेरा नाम मिटा
रही है !!!!!

********

इश्क़ और तबियत का कोई भरोसा नहीं,
मिजाज़ से दोनों ही दगाबाज़ है, जनाब।

********

मगरूर हमें कहती है तो कहती रहे दुनिया,
हम मुड़ कर पीछे किसी को देखा नहीं करते…

*******

बस यही मासूम सा रिश्ता है तुमसे,
कि शामिल रहते हो, मेरी हर दुआ में..|

********

कभी तो यकीन कर लो तुम मेरी मोहब्बत का,
कहीँ उमर न गुज़र जाये मुझे आज़माने मेँ…

********

कुछ करना ही है तुझको तो ये करम कर दे ..
मेरे खुदा तू मेरी ख्वाहिशों को ही कम कर दे. !

********

दर्द तो अकेले ही सहते हैं सभ…
भीड़ तो बस फ़र्ज़ अदा करती है..

********

इस कदर भूखा हूँ ऐ मेरे दोस्तों..
कि आजकल धोखा भी खा लेता हूँ!!

*******

भूख रिश्तों को भी लगती है,
प्यार परोस कर तो देखिये…….!

********

एक कब्र पर लिखा था…

“किस को क्या इलज़ाम दूं दोस्तो,
जिन्दगी में सताने वाले भी अपने थे और दफनाने वाले भी अपने थे..”

********

मेरी मंज़िल मेरी हद ।
बस तुमसे तुम तक ।।
ये फ़क्र है कि तुम मेरे हो ।
पर फ़िक्र है कि कब तक ।।

********

बहुत आसान है पहचान इसकी
अगर दुखता नहीं तो दिल नहीं है
मशहूर हो गया हूँ तो ज़ाहिर है दोस्तो
इलज़ाम सौ तरह के मेरे सर भी आयेंगे,थोड़ा सा अपनी चाल बदल कर चलो , सीधे चले तो पींठ में खंज़र भी आयेंगे…..
अगर है दम तो चल डुबा दे मुजको,

समंदर नाकाम रहा, अब तेरी आँखो की बारी.
नजर में बदलाव है उनकी, हमने देखा है आजकल !

एक अदना सा आदमी भी , आँख दिखा जाता है !!
ना इतना चाह मुझे की तेरा तलब्दार बन जाऊ,
तेरी मोहब्बत दीवानगी का में हकदार बन जाऊ,
मेरे मुक़द्दर तक़दीर की तू परवाह ना किया कर,
ऐसा ना हो की में खुद तुझ में तेरी तस्वीर बन जाऊ…
क्या फर्क है दोस्ती और मोहोब्बत में,
रहते तो दोनों दिल में ही है…?

लेकिन फर्क तो है…..

बरसो बाद मिलने पर दोस्ती सीने से लगा लेती है,
और मोहोब्बत नज़र चुरा लेती है…!!
दिन तो कट जाता है शहर की रौनक में ,
कुछ लोग याद बहुत आते है दिन ढल जाने के बाद…
ये वक़्त बेवक़्त मेरे ख्यालों में आने की आदत छोड़ दो तुम,
कसूर तुम्हारा होता है और लोग मुझे आवारा समझते हैं..!!
“सुनकर ज़माने की बातें , तू अपनी अदा मत बदल,,
यकीं रख अपने खुदा पर,,यूँ बार बार खुदा मत बदल……!!
तुमने कहा था हर शाम तेरे साथ गुजारेगे,

तुम बदल चुके हो या फिर तेरे शहर में
शाम ही नहीं होती?
तेरी मोहब्बत की तलब थी तो हाथ फैला दिए वरना,

हम तो अपनी ज़िन्दगी के लिए भी दुआ नहीं करते…
ये कफ़न, ये कब्र, ये जनाज़े,
सब रस्म ऐ दुनिया है दोस्त,
मर तो इन्सान तब ही जाता है,
जब याद करने वाला कोई ना हो.
“हम अपने पर गुरुर नहीं करते,
याद करने के लिए किसी को मजबूर नहीं करते.
मगर जब एक बार किसी को दोस्त बना ले,
तो उससे अपने दिल से दूर नहीं करते.”
क्या फर्क है दोस्ती और मोहोब्बत में,
रहते तो दोनों दिल में ही है…?

लेकिन फर्क तो है…..

बरसो बाद मिलने पर दोस्ती सीने से लगा लेती है,
और मोहोब्बत नज़र चुरा लेती है…!!
अरमान था तेरे साथ जिंदगी बिताने का,
शिकवा है खुद के खामोश रह जाने का,
दीवानगी इस से बढकर और क्या होगी,
आज भी इंतजार है तेरे आने का.

सफ़र मोह्हबत का करके तो देखो इंतजार हमसफ़र का करके तो देखो समझ जायेंगे प्यार को तुम्हारे एक बार दिल से इज़हार तो करके देखो
“रफ़्तार कुछ ज़िन्दगी की यूँ बनाये रख ग़ालिब,
कि
दुश्मन भले आगे निकल जाए
पर
दोस्त कोई पीछे न छूटे…….
फ़लक पर कबूतर दिखे जब कभी,

बहुत याद आयीं तेरी चिठ्ठियाँ..
फिर से मुझे मिट्टी में खेलने दे खुदा ,……………

ये साफ़ सुथरी ज़िन्दगी,
ज़िन्दगी नहीं लगती।
“लोग कहते हैं पिये बैठा हूँ मैं,
खुद को मदहोश किये बैठा हूँ मैं,
जान बाकी है वो भी ले लीजिये,
दिल तो पहले ही दिये बैठा हूँ मैं”
पाना है जो मुकाम वो अभी बाकी है.
अभी तो आए है जमीं पर . आसमान की उडान अभी बाकी है.
अभी तो सुना है लोगो ने सिर्फ मेरा नाम.
अभी इस नाम कि पहचान बनाना बाकी है….
वो इस कमाल से खेले थे इश्क की बाजी …..!!
मैं अपनी फतह समझता रहा मात होने तक…!!!
“जब इश्क और क्रांति का अंजाम एक ही है तो राँझा बनने से अच्छा है भगतसिंह बन जाओ”
अजीब था उनका अलविदा कहना !सुना कुछ नहीं और कहा भी कुछ नहीं! ँ बर्बाद हुवे उनकी मोहब्बत में, की लुटा कुछ नहीं और बचा भी कुछ नहीँ !
मुस्कुराना तो मेरी शख्सियत
का एक हिस्सा है दोस्तों…..
तुम मुझे खुश समझ कर
दुआओ में भूल मत जाना….
“डर मुझे भी लगा फांसला देख कर;
पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर;
खुद ब खुद मेरे नज़दीक आती गई;
मेरी मंज़िल मेरा हौंसला देख कर।”

********

क़दर किरदार की होती है… वरना…
कद में तो साया भी इंसान से बड़ा होता है..

********

बेगाना हमने नही किया किसी को अपने से,
जिसका दिल भर गया वो छोड़ता चला गया….

********

बेखबर हो गए है कुछ दोस्त हमसे,
जो हमारी ज़रूरत को महसूस नहीं करते.

कभी बहुत बातें किया करते थे हमसे,
अब खेरियत तक नहीं पूछते…!!!

********

कभी ऐसी भी बेरुखी देखी है तुमने

“”एय दिल “”

लोग आप से तुम ,
तुम से जान ,
और जान से अनजान हो जाते हैं…

********

सुनो, आज खुशी मिली थी डिबिया में बंद कर के रख ली है

तुम मिलोगें, तो मिल-बाँट के खायेगें, नहीं तो शायद मीठी न लगे !!

********

मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं,
पर सुना है सादगी मे लोग जीने नहीं देते।

********

बर्बाद कर के मुझे उसने पूछा, करोगे फिर मुहब्बत मुझसे ?………

लहू लहू था दिल मगर होंठों ने कहा…”इंशा-अल्लाह”….!!

********

कुछ सही तो कुछ खराब कहते हैं,
लोग हमें बिगड़ा हुआ नवाब कहते हैं,

हम तो बदनाम हुए कुछ इस कदर,
की पानी भी पियें तो लोग शराब कहते हैं…!!!

********

कुछ करना ही है तुझको तो ये करम कर दे .. मेरे खुदा तू मेरी ख्वाहिशों को ही कम कर दे.. !

********

हम इजहार करने मे ,
थोडे ढीले हो गए ।
और इस बीच उन के,
हाथ पीले हो गए.

********

बस इतना ही कहा था मैने की बरसों से हैं प्यासे …… होंठ पे रख के होंठ उसने खामोश कर दिया हमें

********

मुझको क्या हक…
मैं किसी को मतलबी कहूँ,

मै खुद ही ख़ुदा को…
मुसीबत में याद करता हूँ

********

लोग शोर से जाग जाते हैं,

मुझे तुम्हारी खामोशी सोने नहीं देती ! ! !

********

फकीर हूँ सिर्फ तुम्हारे दिल का,
बाकी दुनिया का तो सिकन्दर ही हु….

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हथेलिया भर भर के दर्द न दे मुझे,
दर्द के समंदर ले बैठा हूँ में….

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कदम रुक से गए आज फूलो को बिकता देख …
वो अक्सर कहा करते थे की प्यार फूलो जैसा होता हें…

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“अगर मिलती मुझे एक दिन की बादशाही..

तो ऐ दोस्तों…

मेरी रियासत में तुम्हारी तस्वीर के सिक्के चलते…”

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धोखा दिया था जब तूने मुझे. जिंदगी से मैं नाराज था,
सोचा कि दिल से तुझे निकाल दूं. मगर कंबख्त दिल भी तेरे पास था….ं

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खुद पे भरोसा है तो खुदा साथ है
अपनो पे भरोसा हे तो दुआ साथ है
जिदंगी से हारना मत ऐ दोस्त
ज़माना हो ना हो
ये दोस्त तेरे साथ ह

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मैखाने से दीवानों का रिश्ता है पुराना
दिल मिले तो मैखाना दिल टूटे तो मैखाना”

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तुम न रख सकोगे मेरा तोहफा संभालकर

वरना मै अभी दे दूँ, जिस्म से रूह निकालकर

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भरी जेब ने ‘ दुनिया ‘ की पहेचान mujh se करवाई…
और
खाली जेब ने ‘ इन्सानो ‘ की……

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#ChetanThakrar

#+919558767835

 

मैनेज मेंट फंडां


एक रात जब पूरी दुनिया सो रही थी, तभी एक धोबी के घर में एक चोर घुस आया। धोबी गहरी नींद में सो रहा था, लेकिन उसका कुत्ता और गधा जाग रहे थे। कुत्ता अपने मालिक को सबक सिखाना चाहता था, क्योंकि वह उसका ख्याल नहीं रखता था। इसलिए वह नहीं भौंका। गधे को चिंता होने लगी और उसने कुत्ते से कहा कि अगर वह नहीं भौंका तो उसे ही कुछ करना होगा। कुत्ते ने अपना मन नहीं बदला तो गधा ही जोर-जोर से रेंकने लगा। गधे का रेंकना सुनकर चोर भाग गया। धोबी उठा और गधे को बिना वजह रेंकने के लिए पीटने लगा।

कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि दूसरे के काम में टांग अड़ाने से और दूसरे के हिस्से का काम करने से कुछ भला नहीं होने वाला। इसलिए अपने में मस्त रहें।

चलिए अब इसी कहानी को दूसरे नजरिए से देखते हैं।

धोबी एक अव्वल दर्जे कॉर्पोरेट मैनेजमेंट का आदमी था। उसमें चीजों को अलग नजरिए से देखने और अलग सोचने की क्षमता थी। उसे यकीन था कि आधी रात को गधे के रेंकने की जरूर कोई वजह रही होगी। वह घर से थोड़ा बाहर निकला और तथ्यों की जांच पड़ताल कर उसने पाया कि घर में चोर घुसा था और गधा सिर्फ उसे आगाह करना चाहता था। गधे की पहल और ड्यूटी से बढ़कर काम करने की ललक को देखते हुए धोबी ने उसे ढेर सारी घास दी और पसंदीदा पालतू जानवर बना लिया। वहीं कुत्ते की जिंदगी में ज्यादा बदलाव नहीं आए सिवाय इसके कि गधा अब और उत्साह से कुत्ते का काम भी करने लगा। सेलरी बढऩे के समय पर कुत्ते को ८ मिले और गधे को ९ अंक। जल्द ही कुत्ते को अहसास हुआ कि उसकी सभी जिम्मेदारियां गधे ने संभाल ली हैं और वह अब आराम से समय काट सकता है। गधे पर अब अच्छा परफॉर्म करने का बोझ बढ़ गया। जल्द ही उस पर ढेर सारा काम आ गया और वह दबाव में रहने लगा। इससे परेशान होकर वह धोबी का घरछोडऩे की सोचने लगा।

कहानी से अब भी वही शिक्षा मिलती है कि दूसरे के काम में टांग अड़ाने से, दूसरे के हिस्से का काम करने से आपका भला नहीं होने वाला। इसलिए अपने में मस्त रहें।

डिस्क्लेमर- इस कहानी का कोई भी पात्र काल्पनिक नहीं है। इनका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से संबंध सुनियोजित है।

 

સપનામાં તો બધા જીવે છે,


સપનામાં તો બધા જીવે છે,
વસ્તવિકતમાં કોણ રહે છે ?????
સંબંધ બાંધવા માટે વર્ષો વિતાવે,
પણ તોડતાં સમયે ક્યાં વિચારે છે ?????
બધાનો પ્રેમ તો બધા ચાહે છે,
પણ આપવામાં કોણ માને છે ?????
વાયદા કરવામાં તો બધા માહિર છે,
નિભાવવા માટે કોણ તૈયાર થાય છે ?????
વાતો થશે જીવવાની અને રીતોની,
પણ ખરેખર અહીં કોણ આવું જીવે છે ?????
આતો દેખાડાની દુનિયા છે,
સાચા પ્રેમની કોને જરૂર છે ?????
હું તો બધા માટે જીવાનો પ્રયત્ન કરું છું,
અહીં આવા મણસોની ક્યાંય જરૂર નથી !!!!