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Shayri part 9

25 Mar

सोचा था घर बना कर बैठुंगा सुकून से…
पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला !!

********

भले जुबान अलग पर जज्बात तो एक है,
उसे खुदा कहूँ या भगवान बात तो एक है…

*********

एक घड़ी ख़रीदकर हाथ मे क्या बाँध ली,,
वक़्त पीछे ही पड़ गया मेरे..!!

********

वादोँ से बंधी जंजीर थी जो तोड दी मैँने,
अब से जल्दी सोया करेँगेँ मोहब्बत छोड दी मैँने !!

*******

हम ने पूछा आज मीठे में क्या है ?
उसने ऊँगली उठाई और होंठों पे रख दी..

*******

पढ़नेवाले की कमी है …..
वरना …..
गिरते आँसू भी एक किताब है…………

********

नसीब अच्छे ना हो तो खूबसूरती का कोई फायदा नही ।
दीलो के शहेनशाह अकसर फकीर होते है।

*********

दर्द ज़ाहिर कभी करने नहीं देता मुझको
अश्क आंखों में भी भरने नहीं देता मुझको
जानता हूँ , कि मैं अब टूट चुका हूँ लेकिन
वो तो इक शख्स बिखरने नहीं देता मुझको !

********

काला न कहो मेरे महबूब को;
काला न कहो मेरे महबूब को;
खुदा तो तिल ही बना रहा था;
पर प्याला ही लुढ़क गया.

*********

“दिली तमन्ना है कि मैं भी अपनी पलकों पे बैठाऊँ तुझको,
बस तू अपना वजन कम करले, तो मेरा काम आसान हो जाए”

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भर आई मेरी आँखे जब उसका नाम आया..इश्क नाकाम सही फिर भी बहुत काम आया..हमने महोब्बत में ऐसी भी गुज़ारी रातें..
जब तक आँसु ना बहे दिल को ना आराम आया..

********

रिश्वत भी नहीं लेती कम्बख्त जान छोड़ने की….!

ये तेरी याद मुझे बहुत ईमानदार लगती है….!!

*******

वक्त पे न पहचाने कोई ये अलग बात,

वैसे तो शहर में अपनी पहचान बहुत हैं।।।

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परिंदों सी उड़ान भरी थी तुझ को पाने को।
तेरा आसमां देख चक्कर खा गए।

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क्यूँ उदास बेठे हो इस तरहा अंधेरे मैं,,
दुःख कम नहीं होते रौशनी बुझाने से.

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ना मस्ज़िद को जानते हैं,
ना शिवालों को जानते है!
जो भूखे पेट होते हैं,
निवालों को जानते है!

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मोहब्बत भी होती है तो ज़रुरत के पेश-ए-नज़र…॥
अब एक नज़र मेँ लुट जाने का ज़माना नहीँ रहा…॥

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जिन्दगी आज कल गुजर रही है इम्तिहानो के दौर से…..
एक जख्म भरता नही दूसरा आने की जिद करता है…

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भरम है .. तो भरम ही रहने दो …. जानता हूं मोहोब्बत नहीं है …
पर जो भी है … कुछ देर तो रहने दो …

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तू जो चाहे तो मैं ज़िन्दगी हिचकियों में गुज़ार
दूँ….!
बस मुझे याद करने का…… तू वादा कर दे ….

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ये तेरा घर ये मेरा घर किसी को देखना हो गर…
तो पहले आ के माँग ले, मेरी नज़र तेरी नज़र…

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एक अजीब सवाल किया उसने मुझ से
“मुझ पे मरते हो तो जिंदा क्यूँ हो ?

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तू छोड़ दे कोशिशें…..इन्सानों को पहचानने की…!
यहाँ जरुरतों के हिसाब से …. सब नकाब बदलते हैं…!

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बताओ ना..!! कैसे तुम्हे भुलाउं ?.
तुम तो वाकिफ़ हो इस हुनर से..

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हीरे की काबिलियत रखते हो तो, अँधेरे में चमका करो…!
रौशनी में तो कांच भी चमका करते है ….!!!

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आपकी दोस्ती हमारे सुरों का साज है, आप जैसे दोस्त पर हमें नाज़ है,
चाहे कुछ भी हो जाये जिंदगी में, दोस्ती कल भी वैसी ही रहेगी, जैसी आज है.

********

नसीब अच्छे ना हो तो खूबसूरती का कोई फायदा नही ।
दीलो के शहेनशाह अकसर फकीर होते है।

********

फिर कहीं से दर्द के सिक्के मिलेंगे​:​
ये हथेली आज फिर खुजला रही है​।

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हौसला मुज में नहीं उसको भूलाने का,
काम सदियों का लम्हों में कहाँ होता है ?

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चैन से रहने का हमको मशवरा मत दीजिये…
अब मजा देने लगी हैं जिदगी की मुश्किलें…!!!

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सबके कर्ज़े चुका दूं मरने से पहले ऐसी मेरी नीयत है ….

मौत से पहले तू भी बता दे ज़िन्दगी तेरी क्या क़ीमत है !!!!!

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न कहा करो हर बार की हम छोड़ देंगे तुमको,

न हम इतने आम हैं, न ये तेरे बस की बात है…!!

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एक तेरी ख़ामोशी जला देती है इस पागल दिल को;
बाकी तो सब बातें अच्छी हैं तेरी तस्वीर में।

********

सीढ़ियाँ उनके लिए बनी हैं,
जिन्हें छत पर जाना है |
लेकिन जिनकी नज़र ,आसमान पर हो,
उन्हें तो रास्ता ख़ुद बनाना है |

*******

उम्र ने तलाशी ली, तो जेबों से लम्हे बरामद हुए…..
कुछ ग़म के, कुछ नम थे, कुछ टूटे, कुछ सही सलामत थे……

*******

हम तो आँखों में संवरते हैं, वहीँ संवरेंगे,
हम नहीं जानते आईने कहाँ रखें हैं …

********

खुदा से भी पहले तेरा नाम लिया है मैंने;
क्या पता तुझे कितना याद किया है मैंने;
काश सुन सके तू धड़कन मेरी;
हर सांस को तेरे नाम से जिया है मैंने.

********

ये ज़िन्दगी सवाल थी..
जवाब माँगने लगे

फरिश्ते आ के ख़्वाब मेँ ..
हिसाब माँगने लगे

********

मुफ्त में नहीं आता,यह शायरी का हुनर….

इसके बदले ज़िन्दगी हमसे,
हमारी खुशियों का सौदा करती है…!!

********

जो पीने-पीलाने की बात करते है,
कह दो ऊनसे कभी हम भी पीया करते थे,,

जीतने मे यह लोग बहक जाते है,,
ऊतनी तो हम ग्लास मे ही छोड दीया करते थे…

********

मेरी आवारगी में कुछ कसूर तुम्हारा भी है….
ऐ.. दोस्त
जब तुम्हारी याद आती है तो घर अच्छा नही लगता..

*******

चूमना पड़ता है ” फांसी का फंदा ” ….
चरखा चलाने से कभी ” इंकलाब ” नहीं मिलता

********

इशारा तो मदद का कर रहा था डूबने वाला

मगर यारा-ऐ-साहिल ने सलाम-ऐ-अलविदा समझा

********

सिर्फ तूने ही कभी मुझको अपना न
समझा…….
जमाना तो आज भी मुझे तेरा दीवाना कहता है…….

*********

एक बार देखा था उसने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए,

बस! इतनी सी हकीकत है, बाकी सब कहानिया है…

*********

बहेकने के लिए तेरा एक खयाल काफी है
हाथो मे हो फ़िर से कोई जाम ज़रूरी तो नही..

*********

नहीं भूलती दो चीज़ें चाहे जितना भुलाओ……….
“एक घाव”…….
“एक लगाव”…

********

“कौन कौन आता है चौखट पर तेरी ….
एक बार अपनी मौत की अफवाह उड़ा के
तो देख…!”

*********

मुश्किलें जरुर हैं, मगर ठहरा नही हूँ मैं,
मंज़िल से जरा कह दो, अभी पहुंचा नही हूँ मैं.

********

ईलाज न ढुँढ तु ईश्क का वो होगा ही नही
ईलाज मर्ज का होता है ईबादत का नही..!

********

“नसीबों के खेल भी अजीब होते हैं,
प्यार में आंसू ही नसीब होते हैं,
कौन होना चाहता हे अपनों से जुदा,
पर अक्सर बिछड़ते हैं वो जो करीब होते हैं.. ”

********

वो शख़्स जो झुक के तुमसे मिला होगा …
य़कीऩन उसका क़द तुमसे बड़ा होगा …!

********

क्या बात करे यार ईस दुनीया की..

जो सामने है ऊसे बुरा केहते है,

और जीसे कभी देखा नही ऊसे “खुदा“ केहते है..

*********

वो जो हमारे लिए ख़ास होते हैं;
जिनके लिए दिल में एहसास होते हैं;
चाहे वक़्त कितना भी दूर कर दे उन्हें;
पर दूर रहकर भी वो दिल के पास होते हैं

********

वो भी जिन्दा है,मैं भी जिन्दा हूँ…
क़त्ल सिर्फ इश्क़ का हुआ है ….!!!!!

*********

“जब होता है तुम्हारा दीदार, दिल धड़कता है बार-बार,
आदत से मजबूर हो तुम,ना जाने कब माँग लो उधार”

********

“मुझ को मुझ में जगह नहीं मिलती..
तू है मौजूद इस क़दर मुझ में..”

********

बदलती चीज़ें हमेशा अच्छी लगती हैं,

लेकिन

बदलते हुए अपने कभी अच्छे नहीं लगते।

********

ख्वाहिशों को जेब में रखकर निकला कीजिये, जनाब;
खर्चा बहुत होता है, मंजिलों को पाने में!

*********

एक नफरत ही हैं जिसे दुनिया चंद लम्हों में जान लेती हैं…
वरना चाहत का यकीन दिलाने में तो जिन्दगी बीत जाती हैं ।

********

नशा हम किया करते है इलज़ाम शराब को दिया करते है…

कसूर शराब का नहीं उनका है जिनका चहेरा हम जाम मै तलाश किया करते है…

********

अगर इन आंसूओं की कुछ किमत होती,

तो कल रात वाला तकिया अरबों में बिकता ….

*********

इश्क़ में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने न दिया
वर्ना क्या बात थी किस बात ने रोने न दिया

आप कहते थे के रोने से न बदलेंगे नसीब
उम्र भर आपकी इस बात ने रोने न दिया

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यूँ नज़रें वो नीचे किए चले जा रहें हैं, पास आशिक़ खड़े यूँ परेशाँ हुए जा रहें हैं ॥

कोई कहता है ज़ालिम अपनी नज़र तो उठा, हम तेरे रूख का दीदार करने को मरे जा रहें हैं ॥

********

मैं खुद पहल करूँ या उधर से हो इब्तिदा;

बरसों गुज़र गए हैं यही सोचते हुए।

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उसे गजब का शौंक है हरियाली का,
रोज आकर जख्मों को हरा कर जाती है…!!!!

**********

“हमारे आंसूं पोंछ कर वो मुस्कुराते हैं,
उनकी इस अदा से वो दिल को चुराते हैं,
हाथ उनका छू जाये हमारे चेहरे को,
इसी उम्मीद में हम खुद को रुलाते हैं।”

********

ए खुदा रखना मेरे दुष्मनो को भी मेहफूज ..!
वरना मेरी तेरे पास आने की दुवा कौन करेगा ..!!

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कितने अनमोल होते है, ये यादों के रिश्ते भी ,
कोई याद ना भी करे, तो चाहत फिर भी रहती है !!!

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एक तन्हा मै हु एक तन्हा मेरा दिल है,
चारो तरफ रोंनके है खुशियों का शोर है।
रोज नया दिन है रोज रात पुरानी है ,
तन्हाई की और मेरी अलग प्रेम कहानी है

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कौन कहता है की खूबसूरती… उम्र की मोहताज है ….. हमने आज भी पुराने पन्नो पर, नए अफसाने लिखे देखे है

********

कोशिश बहुत की, राज़-ए-मुहब्बत बयाँ न हो..
मुमकिन कहाँ था, आग लगे और धुआँ न हो..!!

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ज़िन्दगी ग़मों का एक परिंदा है खुशिया आज कल चुनिन्दा है

कभी याद कर लिया करो इस नाचीज़ को यारो यह शख्स बुरा ही सही मगर अभी जिन्दा है

*********

“खुदा से कोई बात अंजान नहीं होती,
इन्सान की बंदगी बेईमान नहीं होती.

कही तो माँगा होगा हमने भी एक प्यारा सा दोस्त, वर्ना यूंही हमारी आपसे पहचान न होती..”

********

कहेते है इश्क ऐक गुनाह है
जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

*******

“खोने की दहशत और पाने की चाहत न होती,
तो ना ख़ुदा होता कोई और न इबादत होती .”

********

मुजरा देखने गए मेरे दोस्त साथ हमे भी ले गए वो,
सब उसका हुस्न देखते रहे और मैं उसकी मजबूरी”..

*******

“मंदिरो मे हिंदू देखे..
मस्जिदो में मुसलमान..
शाम को जब मयखाने गया..
तब जाकर दिखे इन्सान..”

********

तोहमतें तो लगती रहीं रोज़ नई नई…..हम पर….

मगर जो सब से हसीन इलज़ाम था वो …….तेरा नाम था..!!!!!

*******

मैं अपनी मौज़ में डूबा हुआ जज़ीरा हूँ
उतर गया है समंदर बुलन्द पा के मुझे

*******

अजीब लोग बसते है तेरे शहेर मे जालीम
मरम्त कांच की करते है पथ्थर के औझार से !!!!!

********

गम ना कर ज़िंदगी बहुत बड़ी है,
चाहत की महफ़िल तेरे लिए सजी है,
बस एक बार मुस्कुरा कर तो देख,
तक़दीर खुद तुझसे मिलने बाहर खड़ी है….

********

तुमने क्या सौचा कि तुम्हारे सिवा कोई नही मुझे चाहने वाला,

पगली छोङ कर तो देख, मौत तैयार खङी है मुझे अपने सीने लगाने के लीऐ…

********

हँस कर कुबूल क्या कर ली हर सजा हमने…
दस्तूर बना लिया दुनिया ने भी.. इल्जाम लगाने का..!!

*********

तेरी बेरुखी को भी रुतबा दिया हमने ,
तेरे प्यार का हर क़र्ज़ अदा किया हमने ,
मत सोच के हम भूल गए है तुझे ,
आज भी खुदा से पहले याद किया है तुझे

*******

” अहेसान तो तेरा भी है एक मुझ पर ज़ालीम
इन नजरों से ना तु नीकला
न मुझे नीकलने दीया.”

********

दोस्तों से बिछड़ कर यह हकीकत खुली…
बेशक,
कमीने थे पर रौनक उन्ही से थी!!

********

मै तब भी अकेला नहीं था,
नहीं आज भी हु,
तब यारो का काफिला था,
आज यादो का कांरवा है ….

********

पास आकर सभी दूर चले जाते हैं, हम अकेले थे अकेले ही रह जाते हैं,

दिल का दर्द किसे दिखाएं, मरहम लगाने वाले ही जख्म दे जाते हैं |

********

हमसे पूछो क्या होता है पलपल बिताना,
बहुत मुश्किल होता है दिल को समजाना,

यार ज़िंदगी तो बीत जाएगी,
बस मुश्किल होता है कुछ लोगो को भूल पाना

********

तमन्ना दिल की एक हसरत है, पूरी हो जाए तो इनसान खुशकिस्मत है।

न पूरी हो, तो गम न करना, क्योकि अधूरी रहना तो, तमन्नाओ की फितरत है…..

*******

ैमेरी आँखों से जो झाँक रहा है
वह दर्द मेरा नहीं, तुम्हारा ही है

ये आँखें तो बस आइना है, नज़र
आता है जो अक्स, तुम्हारा ही ह

********

ख़त्म हो भी तो कैसे, ये मंजिलो की आरजू …
ये रास्ते है के रुकते नहीं, और इक हम के झुकते नही

*********

वो दोस्ती हो मुहब्बत हो चाहे सोना हो

कसौटियों पे परखना ज़रूर पड़ता है

********

दिल टूट गया है फिर भी कसक सीने में बाकी है
नशे मैं मदहोश हैं तो क्या पैमाने मैं जाम अब भी बाकी है.

********

हथेलियों पर मेहँदी का “ज़ोर” ना डालिये,

दब के मर जाएँगी मेरे “नाम” कि लकीरें…!!!!

********

लिखने ही लगा था, की खुश हूँ तेरे बगैर….

आँसू, कलम उठाने से पहले ही गिर गए….

********

बड़ी सादगी से उसने कह दिया, रात को सो भी लिया कर….
रातो को जागने से मोहब्बत लौट नहीं आती ….

********

ना जाने क्यु कोसते है लोग बदसुरती को..!

बरबाद करने वाले तो हसीन चहेरे होते है..!!

*********

क़ब्र की मिट्टी हाथ में लिए सोच रहा हूँ;

लोग मरते हैं तो ग़ुरूर कहाँ जाता है।

********

दावे मोहब्बत के मुझे नहीं आते यारो ..
एक जान है जब दिल चाहे मांग लेना ..

*******

ना करूं तुझको याद तो खुदकी साँसों में उलझ जाता हूँ मैं

समझ नहीं आता की ज़िन्दगी साँसों से हे या तेरी यादों से..

*******

समेट कर परेशानियाँ सारे जहान की ..
कुछ ना बन सका तो मेरा दिल बना दिया ……….

********

फिर ग़लतफैमियो में डाल दिया..
जाते हुए मुस्कुराना ज़रूरी था..??

********

तेरी वफ़ा के तकाजे बदल गये वरना,
मुझे तो आज भी तुझसे अजीज कोई नहीं…!!!

*********

लाख चाहूँ के तुझे याद ना करूँ मगर,
इरादा अपनी जगह
बेबसी अपनी जगह |

********

“यूँ तो बहुत से हैं रास्तें, मुझ तक पहुंचने के,

राह-ऐ-मोहब्बत से आना, फासला कम पड़ेगा…”

********

जिस नगर भी जाएँ.. किस्से है कम्बख्त दिल के..

कोई देके रो रहा है.. तो कोई लेके रो रहा है..

*********

तमन्ना दिल की एक हसरत है, पूरी हो जाए तो इनसान खुशकिस्मत है।

न पूरी हो, तो गम न करना, क्योकि अधूरी रहना तो, तमन्नाओ की फितरत है…..

*******

जिनके आँगन में अमीरी का पेड लगता है,
उनका हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है।

********

हमसे कायम ये भरम है वरना,
चाँद धरती पे उतरता कब है…

********

मुझमें ऐब बहुत होंगे मगर एक खूबी भी है…….
मैं किसी से ताल्लुक मतलब के लिए नहीं रखता…

********

सुना था कभी किसी से , ये खुदा की दुनिया है मोहोब्बत से चलती हैं,
करीब से जाना तो समझे , ये स्वार्थ की दुनिया हैं बस जरुरत से चलती हैं !!

********

हैं सब के दुःख एक से, मगर होसलें हैं जुदा-जुदा…
कोई टूट कर बिखर गया.. . कोई मुस्कुरा कर चल दिया..

********

रात मैंने अपने दिल से तेरा रिश्ता पूछा
कमबख्त कहता है जितना मै उसका हूँ उतना तो तेरा भी नही….

********

ये राहें ले जायेंगी मंज़िल तक,
हौसला रख ए मुसाफ़िर ..
कभी सुना है क्या ..???
अंधेरे ने सवेरा होने ना दिया ..!!

********

किसी शायर ने मौत को क्या खूब कहा है :-
ज़िन्दगी में दो मिनट कोई मेरे पास न बैठा ,
आज सब मेरे पास बैठें जा रहे थे ,
कोई तोहफा न मिला आज तक मुझे और
आज फूल ही फूल दिए जा रहे थे
तरस गए हम किसी के एक हाथ के लिए ,
और आज कंधे पे कंधे दिए जा रहे थे .
दो कदम साथ न चलने को तैयार था कोई ,
और आज काफिला बन साथ चले जा रहे थे ,
आज पता चला मुझे की “मौत ” कितनी हसीन होती है
कमबख्त …..हम तो यूहीं जिंदगी जीये जा रहे थे ..

********

चाहे वफ़ा में ठोकरे खाते रहो,
फिर भी रस्मे वादे निभाते रहो.
यही तो इश्क का दस्तूर है यारो,
की जख्म खाते रहो और बस मुस्कुराते रहो.

********

मेरे लफ़्ज़ों से न कर मेरे क़िरदार का फ़ैसला।।
तेरा वज़ूद मिट जायेगा मेरी हकीक़त ढूंढ़ते ढूंढ़ते।।

*******

बेआबरू होके महेफिल से निकल गये हम ,
किसी और की आबरू की खातिर…..

*********

कौन गुज़ारता है यहाँ जिंदगी,
वह तो खुद-ब-खुद गुज़रती रहती हैं…….

*********

मेरी चाहतों की खता थी जो तुझे प्यार के काबिल समझा मैंने,
वरना इस गुलिस्तान में कमी न थी फूलों और बहारों की।

*********

क्यू बार बार ताकते हो शीशे को ,
नज़र लगाओगे क्या मेरी इकलौती मुहब्बत को…!!!

********

“वादे “तो उसने कीये लेकीन
उसके इरादे “नेक” नही थे ॥

********

मुझे दुआएं दिल से मिली हैं,
कभी खरीदने को जेब में हाथ नहीं डाला…।

********

जिंदगी हमारी यूं सितम हो गई
खुशी ना जानें कहां दफन हो गई,

********

अब अपने ज़ख़्म दिखाऊँ किसे और किसे नहीं …!

बेगाने समझते नहीं और अपनोको दिखते नहीं…..,!!

********

उसने बड़े अदब से सवाल किया…कहाँ है घर आप का…?
और हमने भी कह दिया के हम घर में नहीं….लोगों के दिल में राज करते हैं….

********

तू बेशक अपनी महफिल मे मुझे बदनाम करती हैं ।

मेरी खामोशी मेरी जुबान का काम करती है ।

*********

इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत
का अन्दाजा वो मुझे सलाम करते है जिन्हे तु सलाम करती हैं ।

*********

हमेशा देर से समझता हुँ ज़िंदगी के दावँ पैच ।

फिर क़िस्मत जीत जाती है,मेरे समझदार होने
तक ।।

*********

अगर प्यार में पैसे की अहमियत
नहीं होती तो हर कहानी में
लड़की के ख्वाबों में कोई राजकुमार
ही क्यों होता है ???
कभी सुना है कि “मेरे सपनों का मोची,
बारात ले कर आएगा”…. ???

********

आराम से कट रही थी तो अच्छी थी,
जिंदगी तू कहाँ इन आँखों की, बातों में आ गयी..!!!

********

जितनी भीड़ ,
बढ़ रही ज़माने में
लोग उतनें ही,
अकेले होते जा रहे हे……..

********

करेगा जमाना भी हमारी कदर एक दिन,
देख लेना..
बस जरा वफ़ा की बुरी आदत छुट जाने दो…..!

********

अगर जींदगी मे कुछ पाना हो तो
तरीके बदलो.. ईरादे नही

********

मुझको धुंड लेता है रोज किसी बहानोंसे
दर्द हो गया है वाक़िफ़ मेरे ठीकानोंसे .

*********

मरने वाले तो खैर बेबस हैं,
जीने वाले कमाल करते हैं।

********

किताबों के पन्नों को पलटते
वक्त अक्सर मैं सोचता हूँ…

यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग…

*********

“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …
अगर नहीं है तो हक़ कैसा ..?”

***********

हाथ में खंजर ही नहीं आंखोमे पानी भी चाहिए ,
ऐ खुदा मुझे दुश्मन भी खानदानी चाहिए .

********

जिंदगी हमारी यूं सितम हो गई
खुशी ना जानें कहां दफन हो गई,

*********

ऊपर वाला भी आशिक है साला अपना ,
किसी और का होनें नहीं देता मुझे …..

********

झुकाया तुने, झुके हम – बराबरी ना रही
ये तो बंदगी हुई मेरे दोस्त, आशकी ना रही ।

**********

बहुत मह्सूस होता है…!
तेरा मह्सूस ना करना.!!

********

टूट कर भी कम्बख्त धड़कता रहता है ,
मैने इस दुनिया मैं दिल सा कोई वफादार नहीं देखा। ……

*******

मैंने आंसू को समझाया, भरी महफ़िल में ना आया करो,
आंसू बोला, तुमको भरी महफ़िल में तन्हा पाते है,
इसीलिए तो चुपके से चले आते है…

********

मेरी आँखों में महोब्बत की चमक आज भी है
हालाकी उस को मेरे प्यार पर शक आज भी है

********

नाव में बेठ के धोये थे उस ने हाथ कभी
पुरे तालाब में मेहँदी की महक आज भी है

*******

“ना हँसते ख़ुद-ब-ख़ुद तो…कब के मर जाते……
ज़िन्दगी तूने तो कभी,मुस्कुराने की वज़ह नहीं दी”

*******

पढ़नेवाले की कमी है …..
वरना …..
गिरते आँसू भी एक किताब है……

*******

दौलत के तराजू में तोलों तो फ़कीर हैं हम…दरियादिली में हम जैसा नवाब कोई नहीं……

********

हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली।
कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली।

********

सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ।
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली।।….

********

“संग ए मरमर से तराशा खुदा ने तेरे बदन को,

बाकी जो पत्थर बचा उससे तेरा दिल बना दिया ”

*******

यही अंदाज है मेरा समंदर फतह करने का,
मेरी कागज की कश्ती में कई जूगनु भी होते है…..

*********

रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि,

रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ..???

*******

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