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Monthly Archives: જુલાઇ 2014

अच्छी आदत का प्रतिफल


एक बर्फ बनाने की विशाल फैक्ट्री थी! हजारों टन बर्फ हमेशा बनता था ! सैकड़ों मजदूर व अन्य कर्मचारी एवं अधिकारी वहां कार्य करते थे ! उन्ही में से था एक कर्मचारी अखिलेश ! अखिलेश उस फैक्ट्री में पिछले बीस वर्षों से कार्य कर रहा था ! उसके मृदु व्यहार, ईमानदारी,एवं काम के प्रति समर्पित भावना के कारण वो उन्नति करते करते उच्च सुपरवाइजर के पद पर पहुँच गया था ! उसको फैक्ट्री के हर काम की जानकारी थी ! जब भी कोई मुश्किल घडी होती सब, यहाँ तक की फैक्ट्री के मालिक भी उसी को याद करते थे और वह उस मुश्किल पलों को चुटकियों में हल कर देता था ! इसी लिए फैक्ट्री में सभी लोग ,कर्मचारी ,व् अन्य अधिकारी उसका बहुत मान करते थे ! इन सब के अलावा उसकी एक छोटी सी अच्छी आदत और थी वह जब भी फैक्ट्री में प्रवेश करता फैक्ट्री के गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड से ले कर सभी अधिनिस्त कर्मचारियों से मुस्कुरा कर बात करता उनकी कुशलक्षेम पूछता और फिर अपने कक्ष में जा कर अपने काम में लग जाता !और यही सब वह जब फैक्ट्री का समय समाप्त होने पर घर पर जाते समय करता था ! एक दिन फैक्ट्री के मालिक ने अखिलेश को बुला कर कहा ” अखिलेश एक मल्टी नेशनल कम्पनी जो की आइसक्रीम बनती है ने हमें एक बहुत बड़ा आर्डर दिया है और हमें इस आर्डर को हर हाल में नीयत तिथि तक पूरा करना है ताकि कंपनी की साख और लाभ दोनों में बढ़ोतरी हो तथा और नई मल्टी नेशनल कंपनियां हमारी कंपनी से जुड़ सके ! इस काम को पूरा करने के लिए तुम कुछ भी कर सकते हो चाहे कर्मचारियों को ओवरटाइम दो बोनस दो या और नई भर्ती करो पर आर्डर समय पर पूरा कर पार्टी को भिजवाओ “अखिलेश ने कहा ठीक है में इस आर्डर को समय पर पूरा कर दूंगा ! मालिक ने मुस्कुरा कर अखिलेश से कहा “मुझे तुमसे इसी उत्तर की आशा थी”

अखिलेश ने सभी मजदूरों को एकत्रित किया और आर्डर मिलाने की बात कही और कहा “मित्रो हमें हर हाल में ये आर्डर पूरा करना है इसके लिए सभी कर्मचारियों को ओवरटाइम, बोनस सभी कुछ मिलेगा साथ ही ये कंपनी की साख का भी सवाल है “!एक तो कर्मचारियों का अखिलेश के प्रति सम्मान की भावना तथा दूसरी और ओवरटाइम व बोनस मिलाने की ख़ुशी ,सभी कर्मचरियों ने हां कर दी ! फैक्ट्री में दिन रात युद्धस्तर पर काम चालू हो गया !अखिलेश स्वयं भी सभी कर्मचारियों का होसला बढ़ाता हुआ उनके कंधे से कन्धा मिला कर काम कर रहा था ! उन सभी की मेहनत रंग लाइ और समस्त कार्य नीयत तिथि से पूर्व ही समाप्त हो गया ! सारी की सारी बर्फ शीतलीकरण (कोल्ड स्टोरेज) कक्ष जो एकविशाल अत्याधुनिक तकनीक से बना हुआ तथा कम्प्यूटराइज्ड था , में पेक कर के जमा कर दी गई ! सभी कर्मचारी काम से थक गए थे इस लिए उस रोज काम बंद कर सभी कर्मचारियों की छुट्टी कर दी गई सभी कर्मचारी अपने अपने घर की तरफ प्रस्तान करने लगे !

अखिलेश ने सभी कार्य की जांच की और वह भी घर जाने की तैयारी करने लगा जाते जाते उसने सोचा चलो एक बार शीतलीकरण कक्ष की भी जाँच कर ली जाये की सारी की सारी बर्फ पैक्ड और सही है की नहीं ,यह सोच वो शीतलीकरण कक्ष को खोल कर उसमे प्रवेश कर गया ! उसने घूम फिर कर सब चेक किया और सभी कुछ सही पा कर वह जाने को वापस मुडा ! पर किसी तकनीकी खराबी के कारण शीतलीकरण कक्ष का दरवाजा स्वतः ही बंद हो गया ! दरवाजा ऑटोमेटिक था तथा बाहर से ही खुलता था इस लिए उसने दरवाजे को जोर जोर से थपथपाया पर सभी कर्मचारी जा चुके थे उसकी थपथपाहट का कोई असर नहीं हुआ उसने दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की पर सब कुछ बेकार रहा ! दरवाजा केवल बाहर से ही खुल सकता था !अखिलेश घबरा गया उसने और जोर से दरवाजे को पीटा जोर से चिल्लाया पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई ! अखिलेश सोचने लगा की कुछ ही घंटों में शीतलीकरण कक्ष का तापक्रम शून्य डिग्री से भी कम हो जायेगा ऐसी दशा में मेरा खून का जमना निश्चित है ! उसे अपनी मोत नजदीक दिखाई देने लगी !उसने एक बार पुनः दरवाजा खोलने की कोशिश की पर सब कुछ व्यर्थ रहा !कक्ष का ताप धीरे धीरे कम होता जा रहा था ! अखिलेश का बदन अकड़ने लगा ! वो जोर जोर से अपने आप को गर्म रखने के लिए भाग दौड़ करने लगा ! पर कब तक आखिर थक कर एक स्थान पर बैठ गया ! ताप शुन्य डिग्री की तरफ बढ़ रहा था ! अखिलेश की चेतना शुन्य होने लगी ! उसने अपने आप को जाग्रत रखने की बहुत कोशिश की पर सब निष्फल रहा ! ताप के और कम होने पर उसका खून जमने के कगार पर आ गया ! और अखिलेश भावना शुन्य होने लगा ! मोत निश्चित जान वह अचेत हो कर वही ज़मीन पर गिर पड़ा !

कुछ ही समय पश्चात दरवाजा धीरे से खुला ! एक साया अंदर आया उसने अचेत अखिलेश को उठाया और शीतलीकरण कक्ष से बाहर ला कर लिटाया उसे गर्म कम्बल से ढंका और पास ही पड़ा फैक्ट्री के कबाड़ को एकत्रित कर उसमे आग जलाई ताकि अखिलेश को गर्मी मिल सके और उसका रक्तसंचार सुचारू हो सके ! गर्मी पाकर अखिलेश के शरीर में कुछ शक्ति आई उसका रक्तसंचार सही होने लगा ! आधे घंटे के बाद अखिलेश के शरीर में हरकत होने लगी उसका रक्तसंचार सही हुआ और उसने अपनी आँखे खोली ! उसने सामने गेट पर पहरा देने वाले सुरक्षा गार्ड शेखर को पाया ! उसने शेखर से पुछा मुझे बाहर किसने निकला और तुम तो में गेट पर रहते हो तुम्हारा तो फैक्ट्री के अंदर कोई कार्य भी नहीं फिर तुम यहाँ कैसे आये ?शेखर ने कहा “सर में एक मामूली सा सुरक्षा गार्ड हूँ ! फैक्ट्री में प्रवेश करने वाले प्रत्येक पर निगाहे रखना तथा सभी कर्नचारियों व अधिकारियो को सेल्यूट करना ये ही मेरी ड्यूटी है ! मेरे अभिवादन पर अधिकतर कोई ध्यान नहीं देता कभी कभी कोई मुस्कुरा कर अपनो गर्दन हिला देता है !पर सर एक आप ही ऐसे इंसान है जो प्रतिदिन मेरे अभिवादन पर मुस्कुरा कर अभिवादन का उत्तर देते थे साथ ही मेरी कुशलक्षेम भी पूछते थे ! आज सुबह भी मेने आपको अभिवादन किया आपने मुस्कुरा कर मेरे अभिवादन का उत्तर दिया और मेरे हालचाल पूछे! मुझे मालूम था की इन दिनों फैक्ट्री में बहुत काम चल रहा है जो आज समाप्त हो जायेगा ! और काम समाप्त भी हो गया सभी लोग अपने अपने घर जाने लगे ! जब सब लोग दरवाजे से निकल गए तो मुझे आप की याद आई की रोज आप मेरे से बात कर के घर जाते थे पर आज दिखी नहीं दिए ! मेने सोचा शायद अंदर काम में लगे होंगे ! पर सब के जाने के बाद भी बहुत देर तक आप बहार आते दिखी नहीं दिए तो मेरे दिल में कुछ शंकाएं उत्पन्न होने लगी ! क्यों की फैक्ट्री के जाने आने का यही एकमात्र रास्ता है इसी लिए में आपको ढूंढते हुए फैक्ट्री के अंदर आ गया ! मेने आपका कक्ष देखा मीटिंग हाल देखा बॉस का कक्ष देखा पर आप कही दिखाई नहीं दिए !मेरा मन शंका से भर गया की आप कहाँ गए ?कोई निकलने का दूसर रास्ता भी नहीं है ! में वापस जाने लगा तो सोचा चलो शीतलीकरण कक्ष भी देख लू ! पर वो बंद था ! में वापस जाने को मुडा पर मेरे दिल ने कहा की एक बार इस शीतलीकरण कक्ष को खोल कर भी देखूं ! में आपात्कालीन चाबियाँ जो मेरे पास रहती है ,से कक्ष खोला तो आपको यहाँ बेहोश पाया !

अखिलेश एक टक शेखर के चहरे की और देखे
जा रहा था उसने सपने में भी नहीं सोचा था की उसकी एक छोटी सी अच्छी आदत का प्रतिफल उसे इतना बड़ा मिलेगा !उसकी आँखों में आंसू भर आये उसने उठ कर शेखर को गले लगा लिया !

अगर दोस्तों इस कहानी में कुछ सार नजर आये तो कोशिश करे की सभी लोग इस कहानी को पढ़ सके और एक अच्छी आदत चाहे वह छोटी सी ही क्यों ना हो अपने जीवन में उत्तर सकें !

 
1 ટીકા

Posted by on જુલાઇ 27, 2014 in બોધ કથાઓ

 

આજનો માનવી હવે Whatsapp કરતો થઈ ગયો.


આજનો માનવી હવે Whatsapp કરતો થઈ ગયો.
જગ થી જુદો આજે એનો Look થઈ ગયો.

માતા પિતા ને કદી નમન કરતો નહી,
અજાણ્યાંને Good morning કહેતો થઈ ગયો.

સામે મળે છતાં કેમ છો? એવું પુછતો નહી,
હવે Online વાતો કરતો થઈ ગયો.

ખોટા સંબંધો પાછળ રોજ ઉજાગરા કરતો ,
દિલ ના સંબંધો ને Unfriend કરતો થઈ ગયો.

ડાહી સાસરે જાય નહી ને ગાંડી ને સમજાવે,
એવા Status Upload કરતો થઈ ગયો.

મંદિરો માં ઊભા રહીને મોબાઈલ જુવે અને,
રાતે bhagwan na phota ni post પર પ્રભું ને Like કરતો થઈ ગયો.

“સખા” સાચવી ને ચાલજે અહી આડંબર છે,
ખરા ટાણે સંબંધો Logout કરતો થઈ ગયો.

આજનો માનવી હવે whatsapp કરતો થઈ ગયો.

 
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Posted by on જુલાઇ 27, 2014 in અંગત

 

ટૅગ્સ:

12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व व महिमा, 


“” भगवान शिव की भक्ति का महीना सावन शुरू हो चुका है। शिवमहापुराण के अनुसार एकमात्र भगवान शिव ही ऐसे देवता हैं, जो निष्कल व सकल दोनों हैं। यही कारण है कि एकमात्र शिव का पूजन लिंग व मूर्ति दोनों रूपों में किया जाता है। भारत में 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं। इन सभी का अपना महत्व व महिमा है। 

ऐसी मान्यता भी है कि सावन के महीने में यदि भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए जाएं तो जन्म-जन्म के कष्ट दूर हो जाते हैं। यही कारण है कि सावन के महीने में भारत के प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। आज हम आपको बता रहे हैं इन 12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व व महिमा-“”

1- सोमनाथ

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत का ही नहीं अपितु इस पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है, कि जब चंद्रमा को दक्ष प्रजापति ने श्राप दिया था, तब चंद्रमा ने इसी स्थान पर तप कर इस श्राप से मुक्ति पाई थी। ऐसा भी कहा जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चन्द्र देव ने की थी। विदेशी आक्रमणों के कारण यह 17 बार नष्ट हो चुका है। हर बार यह बिगड़ता और बनता रहा है। 

2- मल्लिकार्जुन

यह ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर का महत्व भगवान शिव के कैलाश पर्वत के समान कहा गया है। अनेक धार्मिक शास्त्र इसके धार्मिक और पौराणिक महत्व की व्याख्या करते हैं। 

कहते हैं कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार जहां पर यह ज्योतिर्लिंग है, उस पर्वत पर आकर शिव का पूजन करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होते हैं। 

3- महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 

यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कही जाने वाली उज्जैन नगरी में स्थित है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता है कि ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां प्रतिदिन सुबह की जाने वाली भस्मारती विश्व भर में प्रसिद्ध है। महाकालेश्वर की पूजा विशेष रूप से आयु वृद्धि और आयु पर आए हुए संकट को टालने के लिए की जाती है। उज्जैनवासी मानते हैं कि भगवान महाकालेश्वर ही उनके राजा हैं और वे ही उज्जैन की रक्षा कर रहे हैं।

4- ओंकारेश्वर

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप स्थित है। जिस स्थान पर यह ज्योतिर्लिंग स्थित है, उस स्थान पर नर्मदा नदी बहती है और पहाड़ी के चारों ओर नदी बहने से यहां ऊं का आकार बनता है। ऊं शब्द की उत्पति ब्रह्मा के मुख से हुई है। इसलिए किसी भी धार्मिक शास्त्र या वेदों का पाठ ऊं के साथ ही किया जाता है। यह ज्योतिर्लिंग औंकार अर्थात ऊं का आकार लिए हुए है, इस कारण इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है।

5- केदारनाथ

केदारनाथ स्थित ज्योतिर्लिंग भी भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में आता है। यह उत्तराखंड में स्थित है। बाबा केदारनाथ का मंदिर बद्रीनाथ के मार्ग में स्थित है। केदारनाथ समुद्र तल से 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। केदारनाथ का वर्णन स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है। यह तीर्थ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। जिस प्रकार कैलाश का महत्व है उसी प्रकार का महत्व शिव जी ने केदार क्षेत्र को भी दिया है।

6- भीमाशंकर

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा से इस मंदिर का दर्शन प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं तथा उसके लिए स्वर्ग के मार्ग खुल जाते हैं।

7- काशी विश्वनाथ

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह उत्तर प्रदेश के काशी नामक स्थान पर स्थित है। काशी सभी धर्म स्थलों में सबसे अधिक महत्व रखती है। इसलिए सभी धर्म स्थलों में काशी का अत्यधिक महत्व कहा गया है। इस स्थान की मान्यता है कि प्रलय आने पर भी यह स्थान बना रहेगा। इसकी रक्षा के लिए भगवान शिव इस स्थान को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेंगे और प्रलय के टल जाने पर काशी को उसके स्थान पर पुन: रख देंगे। 

8- त्र्यंबकेश्वर

यह ज्योतिर्लिंग गोदावरी नदी के करीब महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग के सबसे अधिक निकट ब्रह्मागिरि नाम का पर्वत है। इसी पर्वत से गोदावरी नदी शुरू होती है। भगवान शिव का एक नाम त्र्यंबकेश्वर भी है। कहा जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग रूप में रहना पड़ा। 

9- वैद्यनाथ 

श्री वैद्यनाथ शिवलिंग का समस्त ज्योतिर्लिंगों की गणना में नौवां स्थान बताया गया है। भगवान श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का मन्दिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उसे वैद्यनाथ धाम कहा जाता है। यह स्थान झारखंड राज्य (पूर्व में बिहार ) के देवघर जिला में पड़ता है। 

10- नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के बाहरी क्षेत्र में द्वारिका स्थान में स्थित है। धर्म शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता है और नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर है। भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है। द्वारका पुरी से भी नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूरी 17 मील की है। इस ज्योतिर्लिंग की महिमा में कहा गया है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां दर्शन के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

11- रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरं नामक स्थान में स्थित है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ-साथ यह स्थान हिंदुओं के चार धामों में से एक भी है। इस ज्योतिर्लिंग के विषय में यह मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। भगवान राम के द्वारा स्थापित होने के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम दिया गया है। 

12- धृष्णेश्वर मन्दिर

घृष्णेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के समीप दौलताबाद के पास स्थित है। इसे घृसणेश्वर या घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं और आत्मिक शांति प्राप्त करते हैं। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है। बौद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित एलोरा की प्रसिद्ध गुफाएं इस मंदिर के समीप स्थित हैं। यहीं पर श्री एकनाथजी गुरु व श्री जनार्दन महाराज की समाधि भी है।

 
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Posted by on જુલાઇ 24, 2014 in અંગત

 

ટૅગ્સ:

પિતા- પુત્રી


દીકરી દાંપત્યનો દીવડો
ચર્ચા દરમિયાન મિત્રે કહ્યું.

હું પત્ની કરતાંય મારી દીકરીને વધારે
પ્રેમ કરું છું. જાણો છો કેમ ?

એ ચાર વર્ષની હતી ત્યારે મારી માતાનું
અવસાન થયેલું. હું એ દિવસે ખૂબ રડ્યો હતો. મને યાદ છે મારી દીકરીએ મારા
આંસુ લૂછતાં કહ્યું હતું :

પપ્પા, તમે રડો નહીં…તમે રડો છો તેથી મને પણ રડુ આવે છે .

આજે પણ હું બીમાર હોઉં અને એ સાસરેથી મળવા આવે છે ત્યારે એને જોઈને હું મારા બધાં દુઃખો ભૂલી જાઉં છું. મને લાગે છે કે
પત્ની ઘણીવાર આંસુનું કારણ બની રહે છે પણ દીકરી તો હંમેશા આંસુનું મારણ બની રહેતી હોય છે. કદાચ એ જ કારણે તેની વિદાયવેળાએ મા કરતાં બાપને વધુ વેદના થાય છે. કેમ કે મા રડી શકે છે, પુરુષો આસાનીથી રડી શકતા નથી.

દીકરી વીસ-બાવીસની થાય ત્યાં સુધીમાં બાપને તેના વાત્સલ્ય પ્રેમની આદત પડી જાય છે. દીકરી ક્યારેક મા બની રહે છે, ક્યારેક દાદી બની જાય છે તો ક્યારેક મિત્ર બની રહે છે. સુખ હોય ત્યારે દીકરી બાપના હોઠનું સ્મિત બની રહે છે. અને દુઃખમાં બાપના આંસુ લૂછતી હથેળી બની જાય છે.
જોતજોતામાં દીકરી મોટી થઈ જાય છે. અને એક દિવસ પાનેતર ઓઢી વિદાય થાય છે. જતી વેળા પિતાની છાતીએ વળગીને સજળનેત્રે એ કહે છે :

‘પપ્પા, હું જાઉં છું… મારી ચિંતા કરશો
નહીં.. તમારી દવા બરાબર લેજો..”

અને ત્યારે પોતાની આંખમાં ઉમટી આવતાં આંસુઓને તે રોકી શકતો નથી.
કવિ કાલિદાસના અભિજ્ઞાન શકુંતલ માં
શકુન્તલાને વિદાય કરતાં કણ્વ ઋષિ કહે છે :
સંસાર છોડીને સંન્યાસી બનેલા અમારા જેવા વનવાસીને પુત્રી વિદાયનું આટલું દુઃખ થતું હોય તો સંસારીઓને કેટલું થતું હશે ?

એકવાર મારે એક લગ્નમાં જવાનું બન્યું હતું. મિત્રની દીકરીના લગ્ન હતાં. દીકરીને સાસરે વળાવ્યા બાદ ઘરમાં ઢીલા થઈને બેઠેલા અમારા મિત્રે કહ્યું હતું :  આજપર્યંત મેં કદી ભગવાનને પ્રાર્થના કરી નથી, પણ આજે સમજાય છે કે દરેક દીકરીના બાપે ભગવાનને એક જ પ્રાર્થના કરવી જોઈએ-પ્રભુ, તું સંસારના સઘળા પુરુષોને ખૂબ સમજુ અને શાણા બનાવજે કેમ કે એમાંથી કોક મારી દીકરીનો પતિ બનવાનો છે. સંસારની બધી સ્ત્રીઓને તું ખૂબ પ્રેમાળ બનાવજે કેમ કે એમાંથી કોક મારી દીકરીની સાસુ કે નણંદ બનવાની છે. ભગવાન, તારે આખી દુનિયાનું પુનઃનિર્માણ કરવું પડે તો કરજે પણ મારી દીકરીને કોઈ વાતે દુઃખ
પડવા દઈશ નહીં !

એક પરિણિત સ્ત્રી પતિ અને પિતા નામના બે કિનારા વચ્ચે વહેતી નદી જેવી હોય છે. એ પતિને કહી શકતી નથી કે તમે મારી સાથે મારા પિયરમાં આવીને વસો, અને પિતાને કહી શકતી નથી કે તમે મારા સાસરામાં આવીને રહો. એથી દીકરી જ્યારે પોતાના પતિ સાથે પિયરમાં થોડા દિવસ રહેવા આવે છે ત્યારે એક છત તળે પિતા અને પતિના સાનિધ્યમાં તેને એવી તૃપ્તિ મળે છે માનો કોઈ શ્રદ્ધાળુને એકીસાથે રામ અને કૃષ્ણના દર્શન થયા હોય !.

હમણાં જ નિવૃત્ત થયેલા એક આચાર્યમિત્રે એક વાત કહી :

અગર તમારા ઘરમાં દીકરી ના હોય તો પિતા- પુત્રીના પ્રેમની ઘનિષ્ટતા તમે કદી જાણી શકવાના નથી. તમે બસ એટલું કરજો, ગમે તેવાં મનદુઃખો જન્મે તોય પુત્રવધૂને તેના પિતા વિશે કટૂ વચનો કદી સંભળાવશો નહીં. દીકરી ભગવાન વિરુદ્ધ સાંભળી લે છે પણ પોતાના પિતા વિરુદ્ધ તે સાંભળી શકતી નથી..

Source: Whatsapp msg

 
 

ટૅગ્સ:

એક લાખ


આપ સૌ મુલાકાતીઓ નો ખુબ ખુબ આભાર, આપ બધા ના પ્રેમ અને સાથ થી આ બ્લોગ ને ૨ વરસ ના ગાળા મા 1,00,000 HIT મળી ચુકી છે.

અને આપ બધાં નો પ્રેમ હર વિક વધતો જ જાય છે એ બદલ ખૂબ ખૂબ આભાર.

 
4 ટિપ્પણીઓ

Posted by on જુલાઇ 5, 2014 in અંગત

 

તો ખોબો ભરાઇ એટલું મળશે..


એક સ્ત્રી પોતાના નાના બાળકને સાથે લઇને કરીયાણાની દુકાને ખરીદી કરવા માટે ગઇ. જ્યારે સ્ત્રી ખરીદી કરી રહી હતી ત્યારે નાનો બાળક વેપારીની સામે જોઇને હસતો હતો. વેપારીને બાળકનું આ નિર્દોષ હાસ્ય ખુબ ગમ્યુ. જાણે કે આખા દિવસનો થાક ઉતરતો હોય એમ લાગતુ હતુ.

વેપારીએ બાળકને પોતાની પાસે બોલાવ્યો. બાળક જેવો વેપારી પાસે ગયો એટલે વેપારીએ નોકર પાસે ચોકલેટની બરણી મંગાવી. ઢાંકણ ખોલીને બરણી બાળક તરફ લંબાવી અને કહ્યુ , ” બેટા, તારે જેટલી ચોકલેટ જોઇતી હોય એટલી તારી જાતે લઇ લે.”

છોકરાએ જાતે ચોકલેટ લેવાની ના પાડી. વેપારી વારંવાર બાળકને ચોકલેટ લેવા કહેતો રહ્યો અને બાળક ના પાડતો રહ્યો. બાળકની મા દુર ઉભી ઉભી આ ઘટના જોઇ રહી હતી. થોડીવાર પછી વેપારીએ પોતે બરણીમાં હાથ નાંખીને એક મુઠ્ઠી ભરીને ચોકલેટ બાળકને આપી. બાળકે પોતાના બંને હાથનો ખોબો ધરીને વેપારીએ આપેલી ચોકલેટ લઇ લીધી. વેપારીનો આભાર માનીને કુદતો કુદતો પોતાની મા પાસે જતો રહ્યો.

દુકાનેથી પાછી ફરતી વખતે માએ આ બાળકને પુછ્યુ , ” બેટા , તને પેલા કાકા ચોકલેટ લેવાનું કહેતા હતા તો પણ તું ચોકલેટ કેમ નહોતો લેતો ? ” છોકરાએ પોતાનો હાથ માને બતાવતા કહ્યુ , ” જો મમ્મી મારો હાથ તો બહુ જ નાનો છે મેં મારી જાતે જ બરણીમાં હાથ નાંખીને ચોકલેટ લીધી હોત તો મને બહુ ઓછી ચોકલેટ મળી હોત પણ અંકલનો હાથ બહુ મોટો હતો એમણે મુઠી ભરીને ચોકલેટ આપી તો મારો આખો ખોબો ભરાઇ ગયો.”

મિત્રો , આપણા હાથ કરતા ઉપરવાળાનો હાથ અને હૈયુ બહુ મોટા છે માટે માંગવાને બદલે શું આપવું એ એના પર છોડી દેવુ જોઇએ. આપણી જાતે લેવા જઇશું તો નાની મુઠી ભરાય એટલુ મળશે અને એના પર છોડી દઇશું તો ખોબો ભરાઇ એટલું મળશે…

 

ટૅગ્સ:

સગાઇ


એક છોકરા ની સગાઇ થઇ .બંને ખુબ ખુશ હતા . બે જણા ફરવા ગયા તો છોકરા ની કાર નો અકસ્માત થતા રહી ગયો ..

થોડા ટાઇમ પછી ફરી એ લોકો ફરવા ગયા, ફરી છોકરા ની કાર નો અકસ્માત થયો ;છોકરી ને કઈ ના થયું પણ છોકરા ने બહુ ગંભીર ઈજા થઇ..

ઘણા મહિના પછી છોકરો સાજો થયો ..
પણ છોકરા ના ઘર વાળા ને અને છોકરા ને શંકા જવા લાગી કે જ્યાર થી આ છોકરી એના જીવન માં આવી છે ત્યાર થી એમને કૈક ના કૈક ખરાબ થવા લાગ્યું છે .

એવું માની ને એમને છોકરી સાથે સગાઇ તોડી નાખી ..છોકરી આઘાત સહન ના કરી શકી અને એને આત્મહત્યા કરી દીધી ..સમય વીતતો ગયો પણ છોકરા નું ક્યાય નક્કી નતું થતું …

પછી એક દિવસ છોકરો જ્યોતિષ ને બતાવ वा ગયો …જ્યોતિષે કુંડળી જોઈ ને કીધું કે તમે તો થોડા સમય પેહલા જ મરી ગયા હોવા જોઈએ નક્કી તમને કોઈક ના નસીબ થી બચી ગયા હશો ..

આ સંભાળતા છોકરા ને એહસાસ થયો કે જે છોકરી ને મેં છોડી દીધી એના નસીબ થી જ હું બચી ગયો હતો . બસ આ જ આઘાત માં ને આઘાત માં ગાડી ચલાવતા એનો અકસ્માત થયો અને એ પણ મારી ગયો ….

નોધ : કોઈ પણ આવનારી લક્ષ્મી પર દોષ દેતા પેહલા પોતાના નસીબ વિશે વિચારી લેવું જોઈએ . લક્ષ્મી હમેશા ઘર માં ખુશી જ લાવે છે એ ભલે ને પછી વહુ હોય કે દીકરી …