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मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है..

02 ઓક્ટોબર

कुछ जिद्दी, कुछ नक्चढ़ी हो गई है
मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है

अपनी हर बात अब मनवाने लगी है
हमको ही अब वो समझाने लगी है
हर दिन नई नई फरमाइशें होती है
लगता है कि फरमाइशों की झड़ी हो गई है

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है

अगर डाँटता हूँ तो आखें दिखाती है
खुद ही गुस्सा करके रूठ जाती है
उसको मनाना बहुत मुश्किल होता है
गुस्से में कभी पटाखा कभी फुलझड़ी हो गई है

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है

जब वो हँसती है तो मन को मोह लेती है
घर के कोने कोने मे उसकी महक होती है
कई बार उसके अजीब से सवाल भी होते हैं
बस अब तो वो जादू की छड़ी हो गई है

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है

घर आते ही दिल उसी को पुकारता है
सपने सारे अब उसी के संवारता है
दुनियाँ में उसको अलग पहचान दिलानी है
मेरे कदम से कदम मिलाकर वो खड़ी हो गई है

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है…

(Source: Whatsapp group)

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2 responses to “मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है..

  1. yuvrajjadeja

    ઓક્ટોબર 12, 2014 at 2:54 પી એમ(pm)

    ખૂબ સુંદર કાવ્ય ..

     

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