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Shayri Part 35

21 Jan

अल्फ़ाज़ के कुछ तो कंकर फ़ेंको,

यहाँ झील सी गहरी ख़ामोशी है।

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धीरे धीरे बहुत कुछ बदल रहा है…
लोग भी…रिश्ते भी…और कभी कभी हम खुद भी….

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जागना भी कबूल हैं तेरी यादों में रात भर,
तेरे एहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ |

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मत दो मुझे खैरात उजालों की……

अब खुद को सूरज बना चुका हूं मैं..

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तू वैसी ही है जैसा मैं चाहता हूँ…

बस..
मुझे वैसा बना दे जैसा तू चाहती है…..

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ए खुदा अगर तेरे पेन की श्याही खत्म है तो मेरा लहू लेले,
यू कहानिया अधूरी न लिखा कर..

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जाते वक्त उसने मुजसे अजीब सी बात कही

तुम जिंदगी हो मेरी, और मुझे मेरी जिंदगी से नफरत है…

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एक बात हमेशा याद रखना ‘खुश-नसीब’ वोह नहीं जिसका नसीब अच्छा है

बल्कि खुश-नसीब वोह है….जो अपने नसीब से खुश है……

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जिंदगी हमेशा एक नया मौका देती है…
सरल शब्दों में उसे ‘कल’ कहते हैं !!

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ये जो मेरे हालात हैं एक दिन सुधर जायेंगे

मगर तब तक कई लोग मेरे दिल से उतर जायेंगे

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दो बूंद मेरे प्यार की पी ले,

जिन्दगी सारी नशे मे गुज़र जाएगी.

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आज भी इस उम्मीद से सिगरेट पीते हैं यारों…
कभी तो जलेगी सीने में रखी तस्वीर उसकी…

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खुद पुकारेगी मंज़िल तो ठहर जाऊँगा..
वरना खुद्दार मुसाफिर हूँ, गुज़र जाऊँगा ।

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दुनिया सिर्फ नतीजो को इनाम देती है
कोशिशो को नही..

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जख्म है कि दिखते

…….. नही ,

मगर ये मत समझिए
कि दुखते नही…..!!

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रात होते ही,
तेरे ख़यालों की सुबह हो जाती है

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शिकायत तुम्हे वक्त से नहीं खुद से होगी,
कि मुहब्बत सामने थी, और तुम दुनिया में उलझी रही.

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काश कि तुम कोई दिसम्बर होते,
साल के आखिर मे आ तो जाते …

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आज तक उस थकान से दुख रहा है बदन,
एक सफ़र किया था मैंने ख़्वाहिशों के साथ ।।

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कहीं जरूरत से कम तो कहीं जरूरत से ज्यादा।
ए कुदरत तुझे हिसाब किताब करना नहीं आता।

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शहर में बिखरी हुई हैं, ज़ख्म-ए-दिल की खुशबुएँ..
ऐसा लगता है के दीवानों का मौसम आ गया..

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मुश्किल भी तुम हो, हल भी तुम हो ,

होती है जो सीने में ,वो हलचल भी तुम हो …

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आज लफ्जों को मैने शाम को पीने पे बुलाया है,

बन गयी बात तो ग़ज़ल भी हो सकती है…

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इश्क़ की दुनिया है जनाब
यहाँ कुछ भी हो सकता है

दिल मिल भी सकता है
और खो भी सकता है

जिसे तुम चाहते हो
किसी और का भी हो सकता है

तुम समझो इबादत
वोह गुनाह भी हो सकता है

बेपनाह मोहोब्बत का
मामूली हाल भी हो सकता है

दोस्त समझो जिसे
वोह रकीब भी हो सकता है

जाम समझो जिसे
वोह ज़हर भी हो सकता है

सुकून समझो जिसे
वोह कहर भी हो सकता है

अपना समझो जिसे
वोह सपना भी हो सकता है

इश्क़ की दुनिया है जनाब
यहाँ कुछ भी हो सकता है !!

आसिम !!

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सब नजरीये की बात्त है जनाब…!!

कर्ण से कोइ पुछे, दुर्योधन कैसा था…!!!

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हादसों का खोफ दिलमें था मगर ऐसा न था,
अपनी ही आवाज से, पेहले कभी चोंका न था ।

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तुम मेरी जिंदगी का वो एकलौता सच हो,
जिसके बारे में मैंने दुनिया के हर सख्श से झूठ कहा हैं..

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आईना हूं तेरा, क्यूं इतना कतरा रहे हो..

सच ही कहूंगा, क्यूं इतना घबरा रहे हो..👈🏻

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दो आँखो में दो ही आँसू

एक तेरे लिए ..।
एक तेरी खातिर….।

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बस इतनी दाद देना….बाद मेरे मेरी उल्फ़त की…!
कि जब मैं याद आऊँ….तो खुद से प्यार कर लेना…!!

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जो दिल के आईने में हो वही हे प्यार के काबिल…

वरना दिवार के काबिल तो हर तस्वीर होती हे ….

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तेरी महफ़िल…… और….. मेरी
आँखें…..
दोनों भरी-भरी हैं……!!

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अगर कहो तो आज बता दूँ मुझको तुम कैसी लगती हो।

मेरी नहीं मगर जाने क्यों, कुछ कुछ अपनी सी लगती हो।

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जिन्हें प्यार नहीं रुलाता उन्हें प्यार की निशानियाँ रुला देती हैं.

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खुद की तारीफ कर खुश होना सीख़ लो दोस्तों,
तुम्हारी बेइज्जती कर मजे लूटने वाले बहुत हैं…

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तेरे पास जो है उसकी क़द्र कर और सब्र कर दीवाने,

यहाँ तो आसमां के पास भी
खुद की जमीं नहीं है……।।।

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तुम दूर बहुत दूर हो मुझसे.. ये तो जानता हूँ मैं…

पर तुमसे करीब मेरे कोई नही है ये बात तुम भी कभी न भूलना

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हमारा दर्द फैला पडा था कागज पर
जो समझा रो दिया जो न समझा मुस्कुरा दिया…

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जब भी देखता हूँ तेरी मोहब्बत की पाकीज़गी

दिल करता है तेरी रूह को काला टीका लगा दूँ…

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मुझे गरीब समझ कर महफिल से निकाल दिया”……
”क्या चाँद की महफिल मे सितारे नही होते ”

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मुझें मोहब्बत हो गयी है ,

अकेलेपन से,

मैं ….बच तो जाऊँगा ना …???

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लोगो ने कुछ दिया, तो सुनाया भी बहुत कुछ;
ऐ खुदा;

एक तेरा ही दर है, जहा कभी “ताना” नहीं मिला!

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क्या जरूरत, क्यों जफाएं बागबां तेरी सहें,
जा तुझे गुलशन मुबारक, मुझको वीराने बहुत।

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दिल से नाज़ुक नही, दुनिया में कोई चीज साहिबा,

लफ्ज़ का वार भी, खंजर की तरह लगता है..!

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इतना भी ना तराशो कि वजूद ही ना रहे हमारा……

हर पत्थर की किस्मत मे नहीं होता संवर कर खुदा हो जाना….

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ये दिल तुम्हारे पास गिरवी है, इसलिए तुम्हारी कदर करते हैं….

वरना तेरी जो फितरत है .. वो नफरत के भी काबिल नही …….

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मेरी ज़िन्दगी में एक ऐसा शक्श भी है,,,

जो मेरी पूरी ज़िन्दगी है और मै उसका एक लम्हा भी नही…

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कुछ रिशते ऐसे होते हैं..जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।

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हद से बढ़ जाये ताल्लुक़ तो गम मिलते हैं,
हम इसीवास्ते हर शख्स से कम मिलते हैं.

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में उनमे से नहीं हु जो बोल के फिर जाये,
में वो हूँ , जो बोलू वो कर के मिट जाये।
-चेतन

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क्रोध हवा का वह झोंका है,
जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है ।

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“सिर्फ तुम ही नहीं अजीज…तुम्हारी आदतें भी अजीज हैं..,

कि तुम भुल भी जाते हो…तो भी बुरा नहीं लगता…!”

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तेरी खवाहीश कर ली तो कौन सा गुनाह कर दिया!

लोग तो इबादत मैं पुरी कायनात मांगते है!

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जिन्हें पता है कि अकेलापन क्या होता है, वो लोग
दूसरों के लिए हमेशा हाजिर रहते हैं..!!

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उसकी जरूरत उसका इंतजार और अकेलापन..

थक कर मुस्कुरा देता हूँ, मैं जब रो नहीं पाता.

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अपने लफ्ज़ों पर गौर कर के बता,

लफ्ज़ कितने थे, और तीर कितने….?

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फूल भी दे जाते हैं ज़ख़्म गहरे कभी-कभी…
हर फूल पर यूँ ऐतबार ना कीजिये…

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मैं पैसा हूँ

मुझे आप मरने के बाद ऊपर नहीं ले जा सकते

मगर जीते जी मैं आपको
बहुत ऊपर ले जा सकता हूँ

मैं पैसा हूँ

मैं कुछ भी नहीं हूँ मगर मैं निर्धारित करता हूँ

कि लोग आपको कितनी इज्जत देते है

मैं पैसा हूँ

मैं बोलता नहीं….

मगर

सबकी बोलती बंद करवा सकता हूँ

मैं पैसा हूँ

मुझे पसंद करो
सिर्फ इस हद तक की

लोग आपको नापसन्द न करने लग

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यूँ तो मसले और मुद्दे बहुत हैं लिखने को मगर
कमबख्त़ इन कागज़ों को तेरा ही ज़िक्र अज़ीज़ है!!!

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इरादे भी रूठा है बच्चे की तरह …

की मुजे चाँद चाइये या कुछ बी नहीं ……

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परखता रहा उम्र भर, ताकत दवाओं की,

दंग रह गया देख कर, ताकत दुआओं की!

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बदलते वक्त के साथ तू , बदला है,

ये इश्क है तेरा या फिर , बदला है.!!

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अकेले ही गुज़रती है ज़िन्दगी.

लोग तसल्लियां तो देते हैं पर साथ नहीं.

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मुफ़्त में सिर्फ माँ बाप का प्यार मिलता है इसके बाद
दुनिया में हर रिश्ते के लिए कुछ न कुछ चुकाना पड़ता है..!

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क़यामत के रोज़ फ़रिश्तों ने जब माँगा उससे ज़िन्दगी का हिसाब;

ख़ुदा, खुद मुस्कुरा के बोला, जाने दो, ‘मोहब्बत’ की है इसने।

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“नींद तो अब भी बहुत आती है मगर…

समझा-बुझा के मुझे उठा देती हैं जिम्मेदारियां..!!

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तुमको देखा तो मौहब्बत भी समझ आई,
वरना इस शब्द की तारीफ ही सुना करते थे..

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जैसे लोग शराब में पानी मिलाते है,
वैसे हम तेरी याद में शराब मिलाते है।
-चेतन

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अब तेरी नशीली आँखों का नशा नहीं मिलता,
सुक्र है शराब का, तेरी कमी नहीं दिलाता।
– चेतन

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तेरी आँखों की सादगी देखने नहीं मिलती,
इसीलिए शराब से नाता जोड़ लिया मैंने ।
– चेतन

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युँ तो मुद्दते 🏻गुजार दी है हमने तेरे बगैर..

मगर आज भी तेरी यादों का एक झोंका

मुझे  टुकड़ो मे बिखेर देता है …

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काश कोई तो पैमाना होता मुहब्बत को नापने का,

तो शान से आते तेरे सामने सबूत के साथ….

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वो साथ थे तो एक लफ़्ज़ ना निकला लबों से..

दूर क्या हुए कलम ने क़हर मचा दिया………

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काश मै ऐसी बात लिखूँ तेरी याद मे,

तेरी सूरत दिखाई दे हर अल्फ़ाज़ मे..

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एहसान ये रहा तोहमते लगाने वालों का मुझ पर,

उठती हुई उँगलियों ने मुझे मशहूर कर दिया।

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तु अपने सारे गम OLX पे बेच दे;
मेने FLIPCART से तेरे लिए ढेर सारी खुशियाँ मंगवाई है….!!!

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बात बस इतनी सी है

की अब “तुम ” “तुम “ना रहे

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वो चाहते है,
जी भर के प्यार करना…
हम सोचते है,
वो प्यार ही क्या,
जिससे जी भर जाये…

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ना चाँद अपना था , ना तू अपना था,
काश दिल भी मान लेता की सब सपना था

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तन्हाई बेहतर है …….

झूठे रिश्तों से….

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काश किस्मत भी नींद
की तरह होती ,
हर सुबह खुल जाती….

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कहने को ही मैं अकेला हूं
पर हम चार है
एक मैं.. मेरी परछाई.. मेरी तन्हाई.. और तेरा एहसास..

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क्या कहूँ मैं कहने को शब्द नहीं मिल रहे,

चलो आज खामोशी ही महसूस कर लो…!!

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लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में..

तुम तरस नहीं खाते, बस्तियाँ जलाने में…

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आ जाओ सीने से लिपट जाओ मेरे…
ये दिसम्बर की सर्द हवाएँ तुम्हे बीमार ना कर दे ।।

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कोई चादर वफ़ा नहीं करती
वक़्त जब खींच-तान करता है…..

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ज़िंदगी चैन से गुज़र जाए…
गर तू ज़हन से उतर जाए..

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तुम्हारा नाम लेने से मुझे सब जान जाते हैं…
मैं वो खोई हुई इक चीज हूँ जिसका पता तुम हो…

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ज़माना हो गया देखो मगर चाहत नहीं बदली
किसी की ज़िद नहीं बदली मेरी आदत नहीं बदली

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मोहब्बत में ज़बरदस्ती अच्छी नही होती,
जब आप का दिल चाहे,
तब मेरे हो जाना
हम नाराज़ ज़रूर होते है,पर नफरत नहीं करते…

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वो मंजर ही मौहब्बत में बड़ा दिलकश गुजरा,
किसी ने हाल ही पूछा था और आँखें भर आई

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“तेरे रोने से उन्हें कोई फर्क नही पड़ता ऐ दिल,,,,.
जिनके चाहने वाले ज्यादा हो वो अक्सर बेदर्द हुआ करते हैं…।”

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सब कहते है हम खाली बैठे है,
उन्हें क्या खबर क्या समेटे बैठे है !!

*******

कुछ यादें खरीदी हैं….
दिन खर्च करके

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अगर तुम्हे यकीन है तुम्हारे शक पर…
तो हमें शक है तुम्हारे यकीन पर…..

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मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली यारो..
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते है|

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रिवाज तो यही हे दुनिया का मिल जाना और बिछड जाना,

तुम से ये कैसा रिशता है ना मिलते हो ना बिछडते हो|

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अफसोस ये नही है कि दर्द कितना है,

दर्द ये है कि तुम्हे परवाह नही है………!!!

*******

सुनो…
मोहब्बत नहीं आती ना तुम्हे ??………….
“रहम” तो आता होगा….

*******

“नामुमकिन” ही सही मगर,

“महोब्बत” तुजसे ही है..!

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सूरज रोज़ अब भी बेफ़िज़ूल ही निकलता है ….

तुम गए हो जब से ,
उजाला नहीं हुआ ….

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दो चम्मच हँसी और चुटकी भर नखरे तेरे,
बस अब यही है ख़ुशी की खुराक मेरी

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खुशीओ का भी क्या कहना. ?

ऐक बच्चा खुश हुआ खरीद कर गुब्बारा..
दुसरा बच्चा खुश हुआ बेच कर गुब्बारा..!!!

*******

ये किस मोड़ पर, तुम्हे बिछड़ने की सूझी,

मुद्दतों बाद तो संवरने लगे थे….हम…!!!

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तारीख़ तो बदलती है हर साल।
ए-ख़ुदा,
अब के बरस हालात भी तो बदल दे

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अंजान अगर हो तो गुज़र क्यूँ नहीं जाते…
पहचान रहे हो तो ठहर क्यूँ नही जाते !

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उफ… ये गजब की रात
और ये ठंडी हवा का आलम,
हम भी खूब सोते …अगर

उनकी बांहो में होते…

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गुस्सा बहोत होते हो हमसे

मोहोब्बत हो गयी है क्या !!!

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” ठण्ड बढ़ती जा रही है,

तेरे नखरे की तरह……”

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तुझको लेकर मेरा ‪ख्याल‬ नही बदलेगा…

साल बदलेगा मगर दिल का हाल नहीं बदलेगा।।

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कहाँ मिलता है कभी कोई समझने वाला ,
जो भी मिलता है समझा के चला जाता है …

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परेशां हूँ कि परेशानी नहीँ जाती,

बचपन तो गया मगर नादानी नहीँ जाती…

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🏻जिन्दगी का एक ओर वर्ष कम हो चला,
कुछ पुरानी यादें पीछे छोड़ चला..

कुछ ख्वाईशैं दिल मे रह जाती हैं..
कुछ बिन मांगे मिल जाती हैं ..

कुछ छोड़ कर चले गये..
कुछ नये जुड़ेंगे इस सफर मे ..

कुछ मुझसे बहुत खफा हैं..
कुछ मुझसे बहुत खुश हैं..

कुछ मुझे मिल के भूल गये..
कुछ मुझे आज भी याद करते हैं..

कुछ शायद अनजान हैं..
कुछ बहुत परेशान हैं..

कुछ को मेरा इंतजार हैं ..
कुछ का मुझे इंतजार है..

कुछ सही है
कुछ गलत भी है.
कोई गलती तो माफ कीजिये और
कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिये।

*******

मेरी जिन्दगी को अधूरा कर दिया
वाह रे मोहब्बत तुने अपना काम पूरा कर दिया.

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एक दूसरे से बिछड़ के हम कितने रंगीले हो गये…

मेरी आँखें लाल हो गयी और तेरे हाथ पीले हो गए..

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इंकार जैसी लज्जत इक़रार में कहां..
बढ़ता रहा इश्क ग़ालिब, उसकी नही-नही से..

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मैं खुद भी अपने लिए अजनबी हूँ,

मुझे गैर कहने वाले – तेरी बात में दम है…!!!

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बेशक ही वो शतरंज में माहिर रहे होंगे..
क्योंकि उनकी चाल पर हजारो फ़िदा है..!

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वो उम्र भर कहते रहे तुम्हारे सीने में दिल ही नहीं..

दिल का दौरा ये दाग भी धो गया..!!

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पर्दा तो होश वालों से किया जाता है ,

बेनकाब चले आओ हम तो नशे में है..!!

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ये कहाँ की रीत,, जागे कोई ,, सोये कोई……

रात सबकी है , तो सबको नींद आनी चाहिये………

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हंसी आती ये सोचकर कि दर्द कोई
समझता नही……

मगर उन्हीं दर्दनाक अल्फ़ाज़ो पर दाद देते है लोग..

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शुक्र करो कि हम दर्द सहते हैं, लिखते नहीं ।
वरना कागजों पर लफ़्ज़ों के जनाज़े उठते ॥

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मौत आएं तो दिन बदले शायद,,,,

जिंदगी ने तो मार ही डाला है…

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वो मेरे हाथो की लकीरे देखकर अक्सर मायूस हो जाते है….

शायद, उन्हे भी एहसास हो गया है की वो मेरी क़िस्मत मे नही है.

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बूढा दिसम्बर जवां जनवरी के कदमों मे बिछ गया

लो इक्कीसवीं सदी को सोलहवां साल लग गया

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ऐ नए साल… बता तुझ में नया क्या है..?

तू नया है तो दिखा सुबह नई, शाम नई…
वरना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई..

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ना जहर है ना शहद है ये ईश्क नशा है साहब ।
जो चडा रहेता है दिल पे निंद आंखो से चुराता है ।

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सौ बार कहा दिल से चल भूल भी जा उसको,
सौ बार कहा दिल ने तुम दिल से नहीं कहते।

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काश ये साल दो हिस्सों में बंट जाये….

मैं फिर से 20 का और तू 16 की हो जाये….

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दिसंबर सा मैं..जनवरी सी तुम..
करीब हो के भी बहुत दूर हैं हम.!!

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मै नासमझ ही सहीं मगर वो तारा हूं..

जो तेरी एक ख्वाहिश के लिये..सौ बार टूट जाऊं…..

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रात को उठ ना सका दरवाजे की दस्तक पे.
सुबह बहुत रोया तेरे पैरों के निशां देख कर..

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तुम मुझ पर लगायो मै तुम पर लगाता हूँ ।।
ये जख्म मरहम से नही आरोपो से भर जायेंगे ।।

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मोहब्बत और मौत की पसंद भी अजीब हे,

एक को दिल चाहिये , दुसरे को धडकन !!

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हमने तो महेफीलमे सीफॅ दील खोला था
खामोश रहेकर भी वो अकेले मे डोला था

जिगर ठककर

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हजारों ने दिल हारे हैं तेरी सूरत देखकर

कौन कहता है तस्वीरें जुआ नहीं खेलती…

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टूट गया… सरफिरी हवाओं का… सारा ग़ुरूर…

इक दिया… खूली छतपर… रातभर जलता रहा…

*******

रात सारी तड़पते रहेंगे हम अब ,

आज फिर ख़त तेरे पढ़ लिए शाम को..!!

*******

मौम के पास कभी आग को लाकर देखूँ,

सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ……

*******

पंछी की आवाज सुनके,
में जाग गया ।
आँखे खोली तो
सबेरा हो गया था ।
जब
में
लालटेन खरीदने बाजार गया
तब
पैसे मांगे दुकानदार ने,
मेने जेब में देखा
वही फिर से अँधेरा मिला ।

कवी जलरूप

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रफ्ता रफ्ता में तुम्हे अच्छा लगने लगूँगा ।
अजनबी हूं आज,
कल अपना लगने लगूँगा ।

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तुजे सचमुच जुड़ना है अगर मेरी जिंदगी के साथ।

तो क़ुबूल कर मुझे मेरी हर कमी के साथ।

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इंसानी फितरत ने इश्क को बदनाम कर दिया,

वर्ना इश्क तो आज भी राधा और श्याम को ढूंढता है!

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बड़ी जल्दी सीख लेता हूँ जिंदगी का सबक ,

गरीब बच्चा हूँ बात-बात पे जिद नहीं करता !!

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फ़िक्र सोती थी चैन से पहले,

अब मुझे रात भर जगाती है…!!!

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अपनों से अच्छा तो ग़म है,..

कभी साथ ही नहीं छोड़ता…:

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आओ कुछ देर ज़िक्र कर्रें उन दिनों का,

जब तुम हमारे और हम तुम्हारे थे..!

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ऐ इश्क़..

तेरा वकील बन के बुरा किया मैनें….

यहाँ हर शायर तेरे खिलाफ सबूत लिए बैठा हैं….

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शायर कहकर बदनाम ना कर,

मैं तो
रोज़ शाम को दिनभर का ‘हिसाब’ लिखता हूँ !

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जब जब लोग परेशान हो जाते हैं…

काफ़ी हद तक इंसान हो जाते हैं…

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बहुत खूब है यूँ आपका..शब्दों में मुझे लिखना,…

वरना तो सबने मुझे सदा.. बेजुबां ही माना है…!!!

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काटो पर चलने वाला इंसान अपनी मंजिल पर जल्दी पहुँच जाता है ।क्योकी काटे पैरो की रफ्तार बढ़ा देते है ।

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सबका दिल रखने मैं अक्सर मेरा दिल टूट जाता हे |

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ऐ-चांद; ख़बरदार ! जो आज निकलने में देरी की,
भूखे रहने की आदत नहीं है मेरे चांद को…..

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गहरी नींद सोने वाले मोहब्बत कर नही सकते,
सुकून कहाँ है इतना मोहब्बत करने वालो को..

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टूटे हुए काँच की तरह चकनाचूर हो गया,
किसी को लग ना जाऊँ, इसलिए सबसे दूर हो गया…!!!

*******

मुझे बना के वो खुदा भी सोच मे पड गया के इस
पगले के लिए पगली केसी बनावूं ॥

*******

मुझे उन आंखों मे कभी आंसु अच्छे नही लगते,
जीन आंखों मे मै अकसर खुद के लिये प्यार देखता हुं……..॥

*******

फिर नहीं लौटा,
वक़्त,
वो शाम,
और
मेरा चैन !!

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मेरी ख्वाइशें तो आसमान तक पहुचने की है,
पर मेरा चाँद धरती पर ही है…

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हमारी मोहब्बत जरूर अधूरी रह गयी होगी पिछले जन्म मे,

वरना इस जन्म की तेरी ख़ामोशी मुझे इतना बेचैन न करत|

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औरो की तरह हम नही लिखते है डायरियां..!!

बस याद तुम्हारी आती है और बन जाती है शायरियाँ..!!

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पीने 🏻से कर चुका था मैं तौबा मगर…..
तेरे होटों 🏻का रंग देख के नीयत बदल गई…

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आज भी प्यारी है मुझे तेरी हर निशानी ….
फिर चाहे वो दिल का दर्द हो या आँखो का पानी

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काश उनका चेहरा आता रोज हमारे ख्वाब में

मर जाते पर नींद से उठने की जुर्रत नहीं करते

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काश हमे बेपरवाह रहना सिखाए कोई हम थक गए परवाह करते करते……

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मासूमियत का इससे पवित्र
प्रमाण कहीं देखा है ????

एक बच्चे को
उसकी माँ मार रही थी

और बचाने के लिये बच्चा
माँ को ही पुकार रहा था…

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इसमें कोई शक नही, तुम ख्यालों में हो।

पर तेरा मेरा मिलना, अब भी सवालों में है॥

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सजा ये है की बंजर जमीन हूँ अब,

जुर्म ये है कि बारिशों से इश्क किया मैंने……….!!

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सहारे ढुंढ़ने की आदत नही हमारी,

हम अकेले पूरी महफ़िल के बराबर है…

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ऐ मुसीबत मेरे पास सोच समजकर आना,,

मेरी माँ की दुवा कही तेरे लिए मुसीबत ना बन जाए…

*******

बड़ा कीमती खिलौना है मेरा दिल.

इसे खेलने आसमान से परी आयी थी!…

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तलाश सिर्फ सुकून कि होती हैं ..
नाम रिश्ते का चाहे जो भी हो ..!!

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ऐ मोहब्बत तुझे पाने की कोई राह नहीं,

शायद तू सिर्फ उसे ही मिलती है जिसे तेरी परवाह नही।

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प्यार ख़रीदा नहीं जाता दोस्तों….!!
लेकिन उसकी कीमत जरुर चुकानी पड़ती है…..!!

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जिन के चेहरे होते है ‘चाँद’ जैसे,
उनके “दिलों में “दाग “ही होते है..!!

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हुं शोधु छु तने पास मां।
तुं शोधे छे मने रास मां।।

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शराब पीकर हम नही लडखडाये कभी,
मगर आप की पहली नजरने हमे हीला दिया ।
– वैभव

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हल्की-फुल्की सी है जिंदगी…

बोझ तो ख्वाहिशों का है..!!

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एहसास अगर हो तो महसूस करों मोहब्बत को,

हर बात का इजहार लबों से हो ये जरूरी तो नही….

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सैकड़ों शिकायतें रट रखी थी… उन्हें सुनाने को किताबों की तरह…

वो मुस्कुरा के ऐसे मिले… कि एक भी याद नहीं आई…

*******

” लहू बेच-बेच कर जिसने परिवार को पाला,
बो भूखा सो गया जब बच्चे कमाने वाले हो गए..”

*******

तुम्हारी यह मुस्कुराहटें,
खुशियों की जैसे आहटें !

जीना कैसा तुम बिन अभी,
बिछड़ना ना तूम अब कभी,
सह ना पाएंगे जुदाई हम,
तुम से है कायम मेरी हँसी !

बिगाड़ी तुमने ही आदतें !

चाहेंगे तुम्हें टूट कर हम,
बनाएंगे एक नया घर हम,
हर पल सिर्फ़ खुशियां होंगी,
साथ काटेंगे यहाँ सफर हम !

रहेंगी ज़िंदा हमसे चाहतें !

तुम्हारी यह मुस्कुराहटें,
खुशियों की जैसे आहटें !

*******

ज़ुबान की हिफाज़त,
दौलत से ज्यादा मुश्किल है..!!!

*******

सच कहा किसीने नहीं आता मुझे व्यापर,
खुशियां बेचदी मेने लोगो के गम खरीदने के लिए।

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हवाँए हड़ताल पर है शायद,,,

आज तुम्हारी खुशबू नहीं आई….

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हमारा अंदाज कोइ ना लगाए तो ठीक होगा.
क्योकी अंदाज तो बारीश का लगाया जाता है तुफान का नही..!!

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खुद को देखते हुए आयने में मेने एक दरार देखी,
पता नहीं टुटा में था की आयना ।

*******

खैर कुछ तो किया उसने…!!!
चलो तबाह ही सही…!!!

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चाहे कितनी भी तकलीफ दे इश्क़ ।..

पर सुकून भी इश्क़ से ही होता है. .

*******

तुझको ख्वाबो में देखने वाला….!

कितनी मुश्किल से जागता होगा….!!

*******

कल तक था में जिसका साया,
आज बन गया हु उसीसे पराया

*******

मत पूछिए कि कैसे सफ़र काट रहे हैं
हर साँस एक सज़ा है मगर काट रहे हैं

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मुकद्दर की लिखावट का इक ऐसा भी कायदा हो…!!!
देर से किस्मत खुलने वालों का दुगुना फायदा हो… !!!

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जिन दोस्तों के बिना शाम गुजरतिँ ना थी कभी,
आज उनके बिना दिवाली गुजर गई…

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“तुझमें और मुझमें फर्क सिर्फ इतना सा है कि…,

तेरा कुछ कुछ हूँ मैं…और मेरा सब कुछ है तू…।”

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बड़ी दूर से आये है,
टुटा दिल वापीस लाये है..!!

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हमारे तो होठ भी इतनी बातें नहीं करते……

ए…..सनम ..

जितनी तुम्हारी आंखें करती है….

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तेरे दिल तक पहुंचे मेरे लिखे हुए हर लब्ज बस इसी मकसद से मेरे हाथ कलम पकडते है….

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दिल की ना सुन ये फ़कीर कर देगा…

हम जो उदास बैठे है नवाब थे कभी…

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तेरा ज़िक्र..तेरी फिक्र ..तेरा एहसास…तेरा ख्याल..!!!

तू खुदा नहीं ….फिर हर जगह मौज़ूद क्यूँ है…!!

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🏼ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही ख़्वाहिशों का है
ना तो किसी को गम चाहिए…
ना ही किसी को कम चाहिए….!!

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इंसानियत.. दिल मे होती है.. हैसियत मे नही.
उपरवाला.. कर्म देखता है.. वसीयत को नही..!!

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नाराजगियों को कुछ दैर चुप रह कर मिटा लिया करो…
गलतियों पर बात करने से रिश्ते उलझ जाते हैं….

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मेरे कमरे में अँधेरा नहीं रहने देता
आपका ग़म मुझे तन्हा नहीं रहने देता

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बड़ा कीमती खिलौना है मेरा दिल.

इसे खेलने आसमान से परी आयी थी!…

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हुं शोधु छु तने पास मां।
तुं शोधे छे मने रास मां।।

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प्यार ख़रीदा नहीं जाता दोस्तों….!!
लेकिन उसकी कीमत जरुर चुकानी पड़ती है…..!!

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वो तो शायरों ने लफ्जो से सजा रख्खा है..
वर्ना मोहब्बत इतनी भी हसीँ नही होती..

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ऐ मोहब्बत तुझे पाने की कोई राह नहीं,

शायद तू सिर्फ उसे ही मिलती है जिसे तेरी परवाह नही।

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तड़प रहे है हम तुमसे एक अल्फाज के लिए
तोड़ दो खामोशी हमें जिन्दा रखने के लिए…

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हम तुझ से बात किये बिना रह सकते है

तुझे याद किये बिना नही​

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अगर तेरे बिना जीना आसान
होता तो,

कसम मुहब्बत की तुझे याद करना भी गुनाह समझते….

*******

तलाश सिर्फ सुकून कि होती हैं ..
नाम रिश्ते का चाहे जो भी हो ..!!

*******

सहारे ढुंढ़ने की आदत नही हमारी,

हम अकेले पूरी महफ़िल के बराबर है…

*******

ऐ मुसीबत मेरे पास सोच समजकर आना,,

मेरी माँ की दुवा कही तेरे लिए मुसीबत ना बन जाए…

*******

सजा ये है की बंजर जमीन हूँ अब,

जुर्म ये है कि बारिशों से इश्क किया मैंने……….!!

*******

रिश्ते का तार टूटे तो बताना मेरे दोस्तों…

थोड़ा बहुत “REPAIRING WORK” हम भी जानते हे…!!!

*******

प्रेम से रहो दोस्तों जरा सी बात पे रूठा नहीं करते
पत्ते वहीं सुन्दर दिखते हैं जो शाख से टूटा नही करते…!

*******

एक मिनट में जिंदगी नहीं
बदलती,
पर एक मिनट सोच कर लिया हुआ फैसला,
पूरी जिंदगी बदल देता है.

*******

तेरे होठों पे मेरा नाम खुदा खैर करे,
जप रहा हो मौलवी श्रीराम को जैसे !!

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झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नही है…!!

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ख्वाहिशे…

मेरी “अधुरी” ही सही पर,
कोशिशे मै “पूरी” करता हुं…!!!

*******

यु गरीब कहकर खुदकी
तौहीन ना कर
“ए बंदे…

गरीब तो वो लोग है
जिनके पास “ईमान”नही…!!!!

*******

“बहूत डर लगता है मुझे उन लोगों से”
“जो बातों में मिठास” और दिल में ‘जहर’ रखते हैं..

*******

“दुनिया से चाहे जितना छिप लो मुखौटे लगा के..

जिंदगी आईने की तरह खींच लेती है,
सेल्फ़ी हकीकत की…!!

*******

इश्क़ का पता नही लेकिन
जो तुझसे है वो किसी और से नही..

*******

तेरे बग़ैर इश्क़ हो तो कैसे हो

इबादत के लिए ख़ुदा भी तो ज़रूरी होता है

*******

जहन में कुछ सवाल जिंदगी ने ऐसे भी छोङे हैं,
जिनका जवाब हमारे पास सिर्फ ‘‪खामोशी‬’ है l

*******

अलफ़ाज़ नहीं बचे अब सबकुछ लिख चूका हूँ,

शायद मोहब्बत के खातिर पूरी तरह बिक चूका हूँ…..

*******

मशवरा तो अच्छा था उनका  की,
हमें भूल जाओ,
साफ ही कह देते की बहुत ज़ी लिए
अब मर जाओ।

*******

भरोसा जितना कीमती होता है
धोखा उतना ही महंगा हो जाता है…..

*******

आज किसी ने ये बात कहके दिल तोड़ दिया

के लोग तेरे नहीं तेरी शायरी के दिवाने हैं….

*******

होती अगर मोहब्बत बादल के साये की तरह,

तो मै तेरे शहर मे कभी धूप ना आने देता..

*******

कोई और तरीक़ा बताओ जीने का,

साँसे ले ….. ले …..कर थक गये है !!

*******

कौन सी शाम की बात लिखू
हुई थी या नहीं वोह मुलाक़ात लिखू

ढलते हुए शाम के साये में
उभरते हुए जज़्बात लिखू

अँधेरे खड़े थे लेकर रातों का सहारा
लड़खड़ाते कदमो से कैसे लिखू

बंध थे सारे मयखाने के दरवाज़े
लरज़ते हाथो से कैसे फ़रियाद लिखू

अदब से खड़े थे अलफ़ाज़ खयालो के पीछे
कौन सा ख्याल छुपाऊ और कौन सा लिखू

अक्सर कलम की जगह ले लेती है शमशीर
जब जब हथेलियों पर तेरा नाम लिखू

हुस्न बेपर्दा भी देखा है मैंने
चमक उसके नूर की कैसे में लिखू

हसीन  थी  घड़ियाँ और  मजबूर थे लम्हे
एक ही पन्नें पर दोनों कैसे लिखू  !

आसिम !

*******

जितने भी जख्म थे सबको सहलाने आये है, वो माशुक खंजर के सहारे मरहम लगाने आये हैं…….

*******

“आप उन्हीं के लिए खास हैं….

जिन्हें आपसे कुछ आस है !”

*******

बस रखी है झूठी मुस्कान,इतना में सुधर गया,
रहता था जो हर पल खुश,वो तो कब का बिखर गया

*******

सच को लफ़्ज़ों की दरकार नही होती,
तुमने सर हिला दिया मुझे यकीं हो गया

*******

अगर मेरी शायरियो से बुरा लगे तो बता देना दोस्तों,

में दर्द बाटने के लिए लिखता हु, दर्द देने के लिए नही..

*******

“कोई ताबीज ऐसा दो की मैं चालाक हो जाऊ ,

बहुत नुकसान देती है मुझे ये सादगी मेरी ।”॥

*******

तेरी याद जब आती है तो उसे रोकते नही हैं हम,
क्यूँकि जो बगैर दस्तक के आते हैं वो अपने ही होते हैं…

*******

इतनी बाते सोच रखी है तुम्हेँ सुनाने के लिए……
पर तुम हो कि आते ही नहीँ हो मनाने के लिए….

*******

चाहता था मै भी तुम्हे दिल की बात सुनाना,
पर तुमने कहा आता नहीं मुझे रूठे को मनाना

*******

तुम होते तो होता बस इतना ।

कि हम जी रहे होते ।।

*******

दर्द नसीब से मिलता है मेरी जान..
औक़ात कहाँ है तेरी मुझे तड़पाने की..

*******

ढूंढ़ने में बड़ा मजा आता है…

दिल में बसा कोई अपना जब खो जाता है…

*******

बारिश की बूँदों में झलकती है तस्वीर उनकी‬‎और हम उनसे मिलनें की चाहत में भीग जाते हैं‬..!!!

*******

अच्छा है तुम्हारा दिल, खवाबो से मान जाता है..

कम्बक्त हमारा दिल है की रूबरू होने को तड़पता है…

*******

यकीन करो आज इस कदर याद आ रहे हो तुम; जिस कदर तुम ने भुला रखा है मुझे।

*******

हसीनाओ की आदत ही होती है जलाने की,
तूम चिराग बन बैठे यही तुम्हारी भूल है।
– वैभव

*******

तुम आसपास ना आया करो
जब मैं शराब पीता हूं..

क्या है कि दुगना नशा संभाला नहीं जाता…..

*******

तुझसे मैँ इजहार ऐ मोहब्बत इसलिए भी नही करता,
सुना है बरसने के बाद बादलो की अहमियत नही रहती|

*******

दिखावा मत कर शहर मे ‘शरीफ’ होने का . . .
लोग ‘ खामोश ‘ तो है. पर ‘ ना – समज ‘ नहीं ! !

*******

मैं जख्म खरीदता हूँ,
मोहब्बत के भाव में..

*******

सुनो जिसकी फितरत थी बगावत🏼 करना ,.,
हमने उस दिल पे हुक़ूमत की है ,.,!!

*******

“जो लोग सिर्फ तुम्हे काम के वक़्त याद करते हे उन लोगो के काम ज़रूर आओ

क्यों के वो अंधेरो में रौशनी ढूँढ़ते हे और वो रौशनी तुम हो”

*******

दिखते हैं पर नज़र नहीं आते …. कुछ लोग कितने दूर हो जाते हैं

*******

ईतना भी मगरूर ना हो ऐ हसीना,
तु आखरी हसी नही,
और में पहला आशीक नही।
– वैभव

*******

उस रात को लिखना भी मुश्किल सा है यार,
एक रात में सो जिन्दगी जी ली हमने।
– वैभव

*******

ईतना भी मगरूर ना हो ऐ हसीना,
तु आखरी हसी नही,
और में पहला आशीक नही।
– वैभव

*******

मै रंग हुँ तेरे चेहरे का,
जितना तू खुश रहेगी उतना मैं निखरता जाऊँगा..

*******

तुझे रात भर ऐसे याद करता हूँ मैं….

जैसे सुबह इम्तेहान हो मेरा..

*******

तेरे लबों  का मुझ पर असर
कुछ यूं हो गया, तूने छुआ मेरे

लबों को और मैं गज़ल बन गया !

*******

चलो कि हम भी ज़माने के साथ चलते हैं,

नहीं बदलता ज़माना तो हम बदलते हैं..

*******

फूल बेचारे अकेले रह गये हे शाख पर..

गाँव की सब तितलीयो के हाथ पीले हो गये..

*******

उसने फूल जब छुआ होगा !!

होश खुश्बू के भी उड़ गए होंगे !!

*******

तुम से मिलकर सबसे नाते तोड लिए थे,
हमनें बादल देखके मटके फोड लिए थे !!

*******

सुकून मिलता है दो लफ्ज़ कागज़ पर उतार कर,
चीख भी लेता हूँ और आवाज भी नहीं होती..

*******

“ले लो वापस…ये आँसू…ये तड़प…और ये यादें सारी…

नही हो तुम अगर मेरे…तो फिर ये सजाएँ कैसी….

*******

शुक्र करो कि हम दर्द सहते हैं, लिखते नहीं ।

वरना कागजों पर लफ़्ज़ों के जनाज़े उठते ॥

*******

हर किसी की कोई न कोई बुरी आदत होती हैं……..

लेकिन मेरी तुम हो ….

*******

मजा चख लेने दो उसे गेरो की मोहबत का भी, इतनी चाहत के बाद जो मेरा न हुआ वो ओरो का क्या होगा।

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खूबसूरत ये सारे नज़ारे हो गए
जिस घडी से हम तुम्हारे हो गए
अंकित गोरसीया

*******

“आशिक़ी लिखें , दीवानगी लिखें या अपनी ख़ामोशी लिखें …,

दिल के जज़्बात अब अल्फ़ाज़ नहीं बनते आखिर आज क्या लिखें”॥

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एक हमे आवारा केहना, कोइ बडा इलजाम नही,
दुनिया वाले दिल वालों को, ओर बहुत कुछ केहते है ।

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ना जाने, करीब आना किसे कहते हैं..
मुझे तो, तुमसे दूर जाना ही नहीँ आता…!!

*******

ज़िन्दगी !!!
आज फिर खफा हे,
जाने दो न यारों ,
कहाँ पहेली दफा है !!!

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तेरी यादो को पसन्द आ गई है मेरी आँखों की नमी..

हँसना भी चाहूँ तो रूला देती है तेरी कमी…!!

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“जिसे पूजा था हमने वो खुदा तो न बन सका,

हम ईबादत करते करते फकीर हो गए…!!!

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जाने ये कैसा ज़हर दिलों में उतर गया…
परछाईं ज़िंदा रह गई इंसान मर गया…!!!!

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जी तो चाहता है,,,तुम्हे अपने दिल में छुपा लू …
मगर ना वक्त ने इजाजत दी और ना कभी तुम ने…

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“तेरी तस्वीर जब इतना सूकून  देती है…
खुदा जाने
क्या होता होगा जब तुम गले मिलती होगी

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रिश्ते का नाम जरूरी नहीं होता मेरे दोस्त..
कुछ बेनाम रिश्ते रुकी जिंदगी को साँस देते है..

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भूला नही पा रहा..जब से तुझे लिखने लगा हूँ..

माँ ठीक कहती थी..लिखने से देर तक याद रहता हैँ..!!

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“गम ना कर ऐ दोस्त तकदीर बदलती रहती है,

शीशा शीशा ही रहता है तस्वीर बदलती रहती है”

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दिसम्बर आ गया है जरा अपना ख्याल रखना..!! .
बुजुर्ग कहते है.. . सर्दियों में अक्सर चोटें, ज्यादा दर्द देती है..!!

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ना जाने कौन कौन से विटामिन और प्रोटीन हैं तुझ में….?
जब तक तेरा दीदार न कर लूँ तब तक बैचेनी रहती..

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” अच्छी किताबें
और सच्चे  लोग
तुरंत समझ में नहीं आते ॥”

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“तुम नफरत का धरना कयामत तक जारी रखो,

मैं प्यार का इस्तीफा जिंदगी भर नहीं दूंगा”..!!

*******

#ChetanThakrar

#+919558767835

 

 
1 Comment

Posted by on January 21, 2016 in Shayri

 

Tags:

One response to “Shayri Part 35

  1. મૌલિક રામી "વિચાર"

    January 22, 2016 at 7:50 am

    Amazing….

     

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