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Shayri Part 36


नज़रिया बदल के देख,
हर तरफ नज़राने मिलेंगे
ऐ ज़िन्दगी यहाँ तेरी
तकलीफों के भी दीवाने मिलेंगे .

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“कभी हमसे भी पूछ लिया करो हाल-ए-दिल,
कभी हम भी तो कह सकें दुआ है आपकी”

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खुदा ने पूछा …..क्या सजा दूँ ….तेरे प्यार को,….
दिल से आवाज़ आई…मुझसे मोहब्बत हो जाये …..मेरे यार को ……

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साँसों का टूट जाना तो बहुत छोटी सी बात है दोस्तो,
जब अपने याद करना छोड़ दे, मौत तो उसे कहते है !!

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कमाल करते हो तुम भी,

ऐ मेरे दिल…!

उसे फुरसत नहीं और तुम्हें चैन नहीं..!

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मुझे तुमसे प्यार  हो गया है,….!!
बार बार तुम  याद आ रही है….!!

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मुझे इंतज़ार करना बेहद पसंद है,
क्यू की ,  ये वक़्त उम्मीद से भरा होता है !

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डरता हूँ कहने से की मोहब्बत है तुम से,
कि मेरी जिंदगी बदल देगा तेरा इकरार भी और इनकार भी..

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पत्थर की दुनिया जज़्बात नही समझती,
दिल में क्या है वो बात नही समझती,
तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है
पर चाँद का दर्द वो रात नही समझती…

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नहीं मिला मुजे कोई तुम जैसा आज तलक,
पर ये सितम अलग है कि मिले तुम भी नहीं..!

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आँखों ने तुझे देखा था,और दिल ने पसंद किया…
बता,आँखे निकाल दूँ,,,या सीने से दिल..

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तेरे हि ख्याल पर खत्म हो गया ये साल..
तेरी ही ख्वाहिश से शुरू, हुआ नया साल….

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रोज़ रोज़ जलते हैं, फिर भी खाक़ न हुए,
अजीब हैं कुछ ख़्वाब भी, बुझ कर भी राख़ न हुए…

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“मतलब” बहुत वजनदार होता है …!
निकल जाने के बाद हर रिश्ते को हल्का कर देता है …!!

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तेरे होंठो को देखा तो एक बात उठी जहन में
वो लफ्ज़ कितने नशीले होंगे, जो इनसे होकर गुजरते है

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मेरे अकेलेपन का मजाक करने वालो
जरा सोचो तो,
तुम्हारे साथ जो भीड़ खड़ी है,,
उसमे कौन किसका है..??

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रजाईयां नहीं हैं उनके नसीब में।
गरीब गर्म हौसले ओढ़कर सो जाते है।।

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आज हुई उनसे गुफ्तगू तो मैंने भी ये जाना
शायरियों में ढूंढ़ता है कोई बारीकियां मेरी,

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हर एक दुआ में हम तो यही कहते हैं।
वो सदा खुश रहें जो दिल में मेरे रहते हैं।

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कोई ऐसा शक्श मुझे भी दे…
ऐ मौला..
जो मुझे बस खोने से डरता हो…!!!

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सुख मेरा, काँच सा था..
ना जाने कितनों को चुभ गया

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” बुरा ” हमेशा वही बनता हे,
जो ” अच्छा ” बनके टूट चूका होता हे !

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दुपट्टा क्या रख लिया सर पे,वो दुल्हन नजर आने लगी…!!
उनकी तो अदा हो गई और जान हमारी जाने लगी…!!

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खुश किस्मत होते है वो जो तलाश बनते है किसी की,
वरना पसंद तो कोई भी किसी को भी कर लेता है..

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सुन  पागल
ये   दिल बड़ी बेबस चीज़ है
देखता  सब को है
पर ढूंढता  सिर्फ उनको है….!!

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उम्र ढ़लते देर कहाँ लगती है…..
साल भी चार दिन पुराना हो गया

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वाकई पत्थर दिल ही होते हैं शायर…!!
वर्ना अपनी आह पर वाह सुनना कोई मज़ाक नहीं…!!

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आशियाने बनें भी
तो कहाँ जनाब…
जमीनें महँगी हो चली हैं
और,दिल में लोग जगह नहीं देते..

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रख लो आईने हज़ार तसल्ली के लिए……!!
पर सच के लिए तो,आँखें ही मिलानी प़डेगी….!!!

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पीने से कर चुका था मैं तौबा मगर…
तेरे होंठों का रंग देख के नीयत बदल गई…

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इत्तफाक से तो नही हम दोनो  टकराये…..
कुछ तो साजिश खुदा की भी होगी….

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मेरी तो बस एक छोटी सी ख्वाहिश है.
की….
तुम्हारी कोई ख्वाहिश अधूरी ना रहे…..

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रोज रोज हर रोज आप मेरा दिल तोड़़ते हो….
कभी कभी इसको जोड़ने की भी मोहलत दे दिया करो….❗❗❗

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चलो मर जाते हैं तुम पर…!!
बताओ दफ़न करोगे सीने में…?

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“तुझे तो मिल गये होंगे कई साथी नये लेकिन,
मुझे हर मोड़ पऱ तेरी कमी महसूस होती है !!”

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मैं गया था सोच कर, बात ‘बचपन’ की होगी,
दोस्त मुझे अपनी ‘तरक़्क़ी’ सुनाने लगे…..

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क्यूँ हर बात में कोसते हो तुम लोग नसीब को,
क्या नसीब ने कहा था की मोहब्बत कर लो !!

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मांगी थी खुशियां अपने लिए खुदा से, और देखो…
तुम मिल गये मुझे, खुशियां तलाशते तलाशते…

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अजीब खेल है ये मोहब्बत का;
किसी को हम न मिले, कोई हमें ना मिला!

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हरकतें सौ तरह की अब ये दिल कर रहा है,
तेरी आंखों में जो भी लिखा, गौर से पढ़ रहा है ।

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“इतना तो किसी ने चाहा „ भी न होगा तुमहै,
जितना मैंने „ सिर्फ…… सोचा „ है तुम्हे „

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काश कोई मिले इस तरह के फिर जुदा ना हो,
वो समझे मेरे मिज़ाज़ को और कभी खफा ना हो।

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सुनशान सी लग रही है ये शायरों की बस्ती…..!
क्या किसी के दिल में दर्द नहीं रहा.!!

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ए मौत जरा जल्दी कर,
तेरे इंतजार में हूँ मैं !!

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खूबसूरती न सूरत में है…न लिबास में है…
निगाहें जिसे चाहे…उसे हसीन कर दें…

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लोग चुप रहने लगे हैं आजकल……
गलतफहमियां…..बोलने लगी हैं….!!

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मोहब्बत भी उधार कि तरह होती है ….
“साहब”
लोग ले तो लेते है .. मगर देना भूल जाते है.

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बुरा कैसे बन गया साहब…
दर्द लिखता हुँ किसी को देता तो नही…

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जो रिश्ते गहरे होते है…….
वो अपनापन का शोर नही मचाते…..!!

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तुम मुझे हँसी-हँसी में खो तो दोगे
पर याद रखना, फिर आंसुओं में ढ़ूंढ़ोगे।🌾

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मोहब्बत की खूबसूरत कहानी तो लिख दी मैंने…
मगर एक तुम्हें मनाने में अब भी नाकाम हूँ मैं…!!

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कुछ इसलिये भी हम शायरी भेजा करते है,
ऐ दोस्तों…
हमारा तो कोई नहीं मगर.
आपका तो कोई हो.!!!😊

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बहुत पाक रिश्ते होते है नफरतों के,
कपड़े अक्सर मोहब्बत में ही उतरते हैं…

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कुछ् बातों के मतलब है और कुछ मतलब की बातें,
जब से फर्क जाना जिंदगी आसान बहोत हो गयी

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कहीं बाजार में मिल जाये तो लेते आना
वो चीज़ जिसे दिल का सुकून कहते हैं…

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मेरी ख़ूबीयो पर तो…..यहाँ सब खामोश रहते हैं ..
चर्चा मेरे बुराई पे हो तो…गूँगे भी बोल पड़ते हैं …

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दूर रहकर भी आपकी ख़बर रखते हैं..
हम पास आपको कुछ…इस कदर रखते हैं…!!

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बाज़ार बड़ा मंदा है साहेब…..
ख़ुशी की किल्लत है और
ग़म कोई ख़रीद नहीं रहा!!!!

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दुनियाँ में इतनी रस्में क्यों हैं;
प्यार अगर ज़िंदगी है तो इसमें कसमें क्यों हैं;
हमें बताता क्यों नहीं ये राज़ कोई;
दिल अगर अपना है तो किसी और के बस में क्यों है।

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यूँ उम्र कटी दो अल्फ़ाज़ में…
एक “काश” में,एक”आस” में..

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रिश्तों को कभी धोखा मत दो,
पसंद ना आऐ तो उसे पूर्णविराम कर दो,,,

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मौत सबको आती है…
अफ़सोस ! जीना सब को नही आता…

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मत देख कोई शख्स गुनाहगार है कितना,
बल्कि,
यह देख, तेरे साथ वफादार है कितना…

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मेरे लिए अहसास मायने रखता है….
रिश्ते का नाम..
चलो..! तुम रख लो..!!

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रूठे-रूठे से रहते हो
तरकीब बताओ मनाने की।

हम जिंदगी गिरवी रख देंगे
तुम कीमत बताओ मुस्कुराने की।

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खोए हुए तो हम खुद है ,
और देखो ना हम ढूंढने तुम्हें निकले है..

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काश तुम पूछो की मुझसे क्या चाहिये,
मैं पकडू बस तेरा हाथ और कहूँ
सिर्फ तेरा साथ चाहिये…

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बाहर जाकर सेल्फी लेना मजबूरी हो गया है
खुश दिखना, खुश रहने से जरूरी हो गया है,

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मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में….
बस हम गिनती उसी की करते है,
जो हासिल ना हो सका….

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गुजर गया आज का भी दिन यूँ ही बेवजह,,,,,,,
ना मुझे फुरसत मिली और ना तुझे खयाल आया..

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“सोचा था न करेंगे किसी से दोस्ती,
न करेंगे किसी से वादा,
पर क्या करे दोस्त मिला इतना प्यारा
की करना पड़ा दोस्ती का वादा,”

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बहाना कोई ना बनाओ तुम मुझसे खफा होने का…
तुम्हें चाहने के अलावा कोई गुनाह नहीं है मेरा…

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“वो मुझसे दूर रहकर खुश है,
और मैं उसे खुश देखने के लिए दूर हूँ…

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तुम बिन……चलते तो हैं,
पर……पहुँचते कहीं नहीं…!!!

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तुम्हारा होना बिल्कुल रविवार की सुबह जैसा है,
कुछ सूझता नहीं है…. बस अच्छा लगता है !!!

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ख़ुशी कहा हम तो “गम” चाहते है,
ख़ुशी उन्हे दे दो जिन्हें “हम” चाहते हे.

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मैं जो सब का दिल रखता हूँ,
सुनो,मैं भी एक दिल रखता हूँ…

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कौन कहता है की दिल..सिर्फ लफ्जों से दुखाया जाता है,
तेरी ख़ामोशी भी कभी कभी..आँखें नम कर देती है..

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पूछा किसीने की याद आती है उसकी,
मैंने मुस्कुराकर कहा की तभी तो ज़िंदा हूँ !!

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जिसको जो कहना है कहने दो अपना क्या जाता है,
ये वक्त वक्त की बात है और वक्त सबका आता है !!

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इश्क़ का तो ऐसा हिसाब है कि.
बंद हो चुका नंबर भी डिलीट करने को दिल नहीं करता…!!

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सुन ना और सुनना,
पर,
मुझको ना भुलाना ।

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तुम उलझे रहे हमें आजमाने में
और हम हद से गुजर गये तुम्हे चाहने में.

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तमाम लोगों को अपनी अपनी मंजिल मिल चुकी,
कमबख्त हमारा दिल है, कि अब भी सफर में है।

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लौट आती है हर बार मेरी दुआ खाली,
जाने कितनी ऊँचाई पर खुदा रहता है।

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झुका हूँ तो कभी सिर्फ अपनों के लिए
और लोग इसे मेरी मज़बूरी समझ बैठे

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मोहबब॒त कब हो जाये ,किसे पता ……..
हादसे  पूछ कर नही हुआ करते ………..!!!!!

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मैं हूँ दिल है तन्हाई है
तुम भी होते अच्छा होता
-फ़िराक़ गोरखपुरी

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यकीन है मुज पर तो बेपनाह इश्क कर,
वफाए मेरी जवाब देगी तू सवाल तो कर.

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खुशबू हवा की चुपके से कानों में कह गई…!!
पास तो नहीं हो मगर दिल में बसे हो तुम…!!

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तुम ढूंढोगे मुझको और मिल नहीं पाओगे
मैं चाँद के पीछे की बस्ती का अँधेरा हूँ।

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रिश्ते भी जाने क्या चीज होते हैं….
जब ख़त्म होने को आते हैं….तभी समझ आते हैं

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शीशे की तरह आर-पार हुं;
फिर भी बहुतों की समझ से बाहर हूं..!

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हर कोई अपने मतलब की बात करता है,,
नहीं सोचता कि दिल सामने वाले का भी दुखता है,,

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ख्वाब मत बना मुझे सच नहीं होते..
साया बना लो मुझे साथ नहीं छोडूंगा…!

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नजाकत तो देखिये, की सूखे पत्ते ने डाली से कहा ..
चुपके से अलग करना वरना लोगो का रिश्तों से भरोसा उठ जायेगा….

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हर रोज़ खा जाते थे वो कसम मेरे नाम की,
आज पता चला की जिंदगी धीरे धीरे ख़त्म क्यूँ हो रही है.

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मेरी यही आदत तुम सब को सदा याद रहेगी,
न शिकवा, न कोई गिला, जब भी मिला, मुस्कुरा के मिला..

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हमारा अंदाज कोई ना लगाए तो ही ठिक होगा,
क्यूंकि अंदाज तो बारिशों का लगाया जाता है तूफ़ान का नहीं.

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कैसे भूलेगी वो मेरी बरसोंकी चाहत को…,
दरिया अगर सूख भी जाये तो रेत से नमी नहीं जाती…

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“रूप”* और *”रुपैया”* देखकर हम किसीसे
दोस्ती नही करते,
हम तो देखते है सिर्फ एक “भला ईन्सान”,
वो भी “आप जैसा”!!

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थोडा इंतजार कर ए दिल,
उसे भी पता चल जाएगा की उसने खोया क्या है…

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इतनी सर्दी है आज कल के
कुछ रिश्ते भी ठंडे पढ गये हैं

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ईश्क के साथ अश्क फ्री मिलते है ..
येजो ऐक औफर है कभी खतम नहीं होती….

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ख्वाहिशे मेरी “अधुरी” ही सही पर ..
कोशिशे मै “पूरी” करता हुं….

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इंसान की फितरत को समझते है परिन्दे..
कितनी भी मुहब्बत से बुलाओ पास नहीं आते..

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रहने दे कुछ बाते…………यूँ ही अनकही सी,,
कुछ जवाब तेरी-मेरी … ख़ामोशी में अटके ही अच्छे हैं.

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मैं तबाह हूँ तेरे प्यार में तुझे दूसरों का ख्याल है….!!!
कुछ तो मेरे मसले पर गौर कर मेरी जिन्दगी का सवाल है…….

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चुभते हुए ख्वाबों से कह दो ..
अब आया ना करे..
हम तन्हा तसल्ली से रहते है….
बेकार उलझाया ना करे..

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सहारे ढूढ़ने की
आदत नही हमारी..!
हम अकेले पूरी
महफ़िल के बराबर  है..!!

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आज फिर की थी, मैंने मोहब्बत से तौबा !
आज फिर तेरी तस्वीर देखकर नियत बदल गयी !!

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तेरे दिलमे रुकी हुइ ए साँस मेरी,
तु मील जाये तो बन जाये बात मेरी।।।

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ठिठुर रहा है बदन साँस थम सी गई है…
आज सर्दी बहुत है शायरी जम सी गई है।।।

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छुपाने लगा हूं आजकल…कुछ राज अपने आप से,
सुना है कुछ लोग मुझको मुझसे ज्यादा जानने लगे हैं.

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खामोश मोहब्बत का एहसास है वो…
मेरी ख्वाहिश ….मेरे जज्बात है वो…

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अभिमन्यु की एक बात बहुत हिम्मत देती हैं,
हिम्मत से हारना पर हिम्मत मत हारना |

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मैं ‘ज़ख़्म’ हूँ… जाकर गले मिलूं किस से,
नमक़ से तर कपडे, यहाँ सभी पहने हुए हैं !!

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पर्दा तो शर्म का ही काफी है…
वरना इशारे तो घूंघट में भी होते हैं

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“शब्द” चाहे जितने हो मेरे पास……
जो तुम तक न पहुचे……सब “व्यर्थ” है……

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क़सम खायी थी कि अब ना करेंगे फिर कभी शायरी।
तेरा हुस्न देखा तो कलम ने बग़ावत कर दी

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पता नही होश मे हूँ…..
या बेहोश हूँ मैं…..

पर बहूत सोच …….
समझकर खामोश हूँ मैं.

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महसूस कर रहें हैं तेरी लापरवाहियाँ कुछ दिनों से…
याद रखना अगर हम बदल गये तो,मनाना तेरे बस की बात ना होगी !!

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फायदा सबसे गिरी हुई चीज़ है,
लोग उठाते ही रहते हैं।।

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नए जख्म के लिए तैयार हो जा ए दिल!
कुछ लोग प्यार से पेश आ रहे हैं…!!

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खिलखिलाती धूप सा मेरा इश्क़,
और सर्द रातो सा तेरा याद आना..

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वो इंसान था… या एहसान कोई…
दिल से मेरे अभी तक उतरा ही नहीं…!!

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परख से परे है
दोस्ती मेरी,मैं उन्हीं का हूं
जो मुझ पर यकिन रखते हैं…..

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लोग अच्छी ही चीजों को यहाँ ख़राब कहते हैं
दवा है हज़ार ग़मों की उसे शराब कहते हैं…!

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मोहब्बत की आजमाइश दे दे कर थक गया हूँ ऐ खुदा..
किस्मत मेँ कोई ऐसा लिख दे, जो मौत तक वफा करे।

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आदमी अच्छा था…
ये शब्द सुनने के लिए मरना पड़ता है…

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पतंग की उलझने भी अजीब थी ग़ालिब
जब वो डोर से कटा तो हर छत पे उसकी ही तड़प थी

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कहीं तुझमें न ढ़ल जाऊँ …मिला मत यूँ नज़र मुझसे …
नशा जो हो गया चाहत में …कैसे फिर संभालोगे मुझे …

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कितने बदल गए हैं आज के रिश्ते भी ।
आपकी चंद मुस्कान के लिए चुटकले सुनाने पड़ते हैं ।।

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कमाल की मोहब्बत थी उसको हम से …….
अचानक ही शुरू हुई और बिन बतायें ही ख़त्म …!!

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शब्द भी हार जाते हैं, कई बार जज्बातों से ,
कितना भी लिखो कुछ ना कुछ बाकी रह जाता है !

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“दो बूंद मेरे प्यार की पी ले…..!!
जिन्दगी सारी नशे में गुज़र जाएगी…..!!

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लोगों ने रोज़ ही नया कुछ माँगा खुदा से..
एक हम ही हैं जो तेरे ख्याल से आगे न गये..

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पतंग सी हैं जिंदगी, कहाँ तक जाएगी…..!!
रात हो या उम्र, एक ना एक दिन कट ही जाएगी….!!

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रिश्तों को कभी धोखा मत दो,
पसंद ना आऐ तो उसे पूर्णविराम कर दो,,,

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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो
तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है

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“रिश्तों को सम्भालते सम्भालते थकान सी होने लगी है,
रोज़ कोई ना कोई नाराज हो जाता है..

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कुछ पल का साथ देकर तुमने,
पल पल का मोहताज बना दिया

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जरा सी बात से मतलब बदल जाते हैं,
उंगली उठे तो बेइज्जती,

और अंगूठा उठे तो तारीफ…

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एक सपने के टूटकर चकनाचूर
हो जाने के बाद ,
दूसरा सपना देखने के हौसले
को ‘ज़िंदगी’ कहते हैं॥

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सिर्फ ख्वाब होते तो क्या बात होती…
तुम तो ख्वाहिश बन बैठे…वो भी बेइंतहा…

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सारी उम्र बस एक ही “सबक” याद
रखना…
“दोस्ती” और “इबादत” में बस नियत साफ़ रखना.!!!

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ठण्डा चूल्हा देखकर रात गुजारी उस गरीब ने,
आग थी की पेट में रात भर जलती रही !!

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देख कर मेरी तरफ़ उसने तो मुह को फेर लिया
इश्क़ कर के उसने मेरे साथ कैसा खेल किया

– नरेश के. डोडीया

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बहोत दर्द देता है उस इंसान का याद आना,
जो हमें कभी भूलकर भी याद नहीं करता !!

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हक़ हूँ में तेरा हक़ जताया कर,
यूँ खफा होकर ना सताया कर..

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मोहब्बत तेरा मेरा मसला था ,.,
ये ज़माना बीच में क्यूँ आ गया ,.,?

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जीनेकी कुछ तो वजह होनी चाहिए…..
वादे ना सही.. यादे तो होनी चाहिए…….!!

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मेरी कमियां और मेरी खूबियां सिर्फ मुझे ही बताना….
मेरी कोई ब्रांच नहीं है…

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कुछ लोग खोने को प्यार कहते हैं..
तो कुछ पाने को प्यार कहते हैं,
पर हकीक़त तो ये है
हम तो बस निभाने को प्यार कहते हैं.

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कभी बुरा नहीं था, उसनें मुझे बुरा कह दिया…
फिर मैं बुरा बन गया,..

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इतनी दूरियां ना बढ़ाओ थोड़ा सा याद ही कर लिया करो…
कहीं ऐसा ना हो कि तुम-बिन जीने की आदत सी हो जाए…

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कितना अच्छा लगता है ना जब मोहब्बत में कोई कहे,
क्यूँ करते हो किसी और से बात, मैं काफी नहीं आपके लिए ?

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गुम अगर सूई भी हो जाए तो दिल दुखता है,,
और हमने तो मुहब्बत में तुझे खोया था.

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इतना ही मालूम है,इस जीवन का सार,
बंद कभी होते नहीं,उम्मीदों के द्वार !!”

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चंद लफ्जो की तकल्लुफ में ,
ये इश्क रुक सा गया है….
वो इकरार पे रूके रहे ,
और हम इन्तजार मे….

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बस उसका जुर्म साबित होने को था

मगर

मैंने माफ़ी मांग ली थी….

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मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल दिल से मिलता है
मगर मुश्किल तो ये है दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है…

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जिन के पास होती हैं उमर भर की यादे
वो लोग तन्हाई में भी तन्हा नही होते….

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जन्नत की परवाह तो उन्हे होती है जिन्होने जन्नत नहीं देखी,
मेरी जन्नत तो तुमसे शुरू और तुम्ही पर खत्म होती है ….

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अमीर वो नही होते,जिनके सर हीरों से जड़े होते है..
अमीर वो होते है,जो  “दिलो “से जुड़े होते है….

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मेरे आँसूं उठा लेते है मेरे ग़मों का बोझ,
ये वो दोस्त है जो अहसान जताया नहीं करते !!

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खोटे सिक्के जो खुद कभी चले नहीं बाजार में,
वो भी कमियाँ खोज रहे है आज मेरे किरदार में !!

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ठण्डा चूल्हा देखकर रात गुजारी उस गरीब ने,
कमबख्त आग थी की पेट में रात भर जलती रही !!

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गरीबी थी जो सबको एक आंचल में सुला देती थी,
अब अमीरी आ गई तो सबको अलग मक़ान चाहिए !!

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किसी को पुरखों की ज़मीने बेचकर भी चैन नहीं,
और कोई गुब्बारे बेचकर ही सो गया सुकुन से !!

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सुनों एक आपकी ही ख्वाईस है हमें …!
सारी दुनिया किसने मांगा है ……?

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मुझसे बिछडके खुश रहते हो…
मेरी तरह आप भी झुटे हो…

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चलो मुस्कुराने की वजह ढुंढते है,
तुम हमें ढुंढो….  हम तुम्हे ढुंढते है!

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मैं वहाँ जाकर भी मांग लूँगा तुझे,,,
कोई बताये तो फैसले कुदरत के कहाँ होते है !

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मुद्दतों बाद जो उसने आवाज़ दी मुझे,
कदमों की क्या औकात थी…साँसें भी ठहर गयीं!

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किसी ने भेज कर काग़ज़ की कश्ती
बुलाया है समुंदर पार मुझको

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“वो खो गया है,,
जो कभी मिला ही नही था”

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लाऊंगा कहा से जुदाई का हौसला
क्यू इस कदर मेरे करीब आ रहे हो

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वक्त से पूछकर बताना ज़रा,
जख्म क्या वाकई भर जाता है

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कहो तो थोड़ा वक्त भेज दूँ..?
सुना है तुझे फुर्सत नहीं मुझसे बात करने की..

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ऐ जीन्दगी जा ढुंड॒ कोई खो गया है मुझ से…..
अगर वो ना मिला तो सुन तेरी भी जरुरत नही मुझे…..

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इंसान खामोश  तब ही होता है.
जब उसके अंदर बहुत शोर होता है.

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तुम्हारे हर सवाल का जवाब मेरी आँखों में मिलेगा,
तुम मेरी जुबान खुलने का इंतज़ार ना कर

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आया था साल नया लेकर…
वो जनवरी अब नही रहा …

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कुछ रिश्तों के खत्म होने की वजह सिर्फ यह होती है कि..
एक कुछ बोल नहीं पाता,और दुसरा कुछ समझ ही नहीं पाता…

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जिन्दगी सुन तू यही पर रुकना….।।
हम हालात बदल कर आते है..

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कतार में खड़े है खरीदने वाले…..,
शुक्र है मुस्कान नहीं बिकती…..!?

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ज़िन्दगी में एक ऐसे इंसान का होना बहुत  ज़रूरी है
जिसको दिल का हाल बताने के लिए लफ़्ज़ों की जरुरत न पड़े

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ज़मीं पर आओ फिर देखो, हमारी अहमियत क्या है
बुलंदी से कभी ज़र्रों का, अंदाज़ा नहीं होता….

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हम पर तुम्हारी चाह का संगीन सा इलज़ाम है
बदले में हम उम्र कैद के तलबगार हैं

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मुझे अल्फाजों की जरूरत ना पड़ती
अगर तुम ने  मेरी आँखों में लिखे अफसाने पढ़े होते…

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अहसास ए इश्क़ में हर उम्र में दिल मचलता है
इजहार ए फरवरी में दिल कहाँ संभलता है

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हमसे मिलना ज़रा संभलकर हम तुमको बताते हैं
हम बातों ही बातों में अक्सर दिल चुरा लेते हैं

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मत लगाओ बोली अपने अल्फाजों की
हमने लिखना शुरू किया तो तुम नीलाम हो जाओगे

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बिखरे अरमान, भीगी पलकें, और ये तन्हाई
कहूँ कैसे कि मिला, मोहब्बत में कुछ भी नहीं

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मोहब्बत करने वालो को वक़्त कहा जो गम लिखेगे
ए दोस्तों कलम इधर लाओ इनके बारे में हम लिखेगे

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कुछ तो सोचा होगा कायनात ने तेरे-मेरे रिश्ते पर,
वरना इतनी बड़ी दुनिया में तुझसे ही बात क्यों होती

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“वाह वाह बोलने की आदत डाल लो दोस्तों,
मैं मोहब्बत में अपनी बरबादियाँ लिखने वाला हूँ !!”

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ज़िद उसकी थी,जल्दी से चाँद देखने की,,
हूनर मेरा था, सामने आईना रख दिया.. !!!

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आज अचानक कोई मुझसे लिपट कर बहुत रोया,
कुछ देर बाद अहसास हुआ,ये तो मेरा ही साया है..

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बहुत लम्बी ख़ामोशी से ग़ुजरा हूँ मैं,
किसी से कुछ कहने की तलाश में…

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गहराइयों से कुछ नहीं लेना मुझ को
किनारा हूँ बस साथ साथ चलने दे…

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मेरी हर शायरी में सिर्फ तुम होते हो
दर्द बस इतना है की,सिर्फ शायरी में हीं क्यों होते हो

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यादें क्यों नहीं बिछड़ जाती,
लोग तो पल में बिछड़ जाते हैं…

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शब्दों के इत्तेफाक़ में
यूँ बदलाव करके देख…
तू देख कर न “मुस्कुरा”
बस “मुस्कुरा” के देख…

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काश हम भी किसी बूथ पर बूथ अधिकारी होते,
उनका हाथ थाम लेते स्याही लगाने के बहाने..!

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तेरी मर्जी से ढल जाऊं हर बार ये मुमकिन नहीं,
मेरा भी वजूद है, मैं कोई आइना नहीं…

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उसने पोंछे ही नही, अश्क मेरी आँखों से,
मैंने ख़ुद रो के, बहुत देर हसाया था जिसे…

*******

मेरी बराबरी करना आसान नहीं,
सच में नामुमकिन है !!

*******

रहने की बेहतरीन जगहों में से, एक जगह औकात भी है !!

*******

सब अपने से लगते है, लेकिन सिर्फ बातों से !!

*******

“तारीखों में बंध गया है अब,  इजहार ए मोहब्बत भी।।
रोज प्यार जताने की अब किसी को फुर्सत कहां।।

*******

हम वक्त गुजारने के लिए दोस्तों को नहीं रखते,
दोस्तों के साथ रहने के लिए वक्त रखते है !!

*******

प्यार मे ताकत हैं
दुनिया को झुकाने की ,,,
वरना क्या जरूरत थी
राम को झूठे बेर खाने की…!

*******

कुछ कहानियाँ Pen से लिखी जाती हैं,
और कुछ Pain से❣

*******

शराब की बोतल सी है ये ईमानदारी
कोई छोड़ता नहीं कोई छूता तक नहीं

*******

वक़्त आने पर लोग साथ कम..!!
मशवरा ज़्यादा देते है..!!

*******

देख ज़िन्दगी तू हमें रुलाना छोड दे,
अगर हम खफा हूऐ तो तूझे छोड देंगे…

*******

घोंसला बनाने में यूँ मशग़ूल हो गए,
उड़ने को पंख हैं हम ये भी भूल गए…

*******

मुझे बहुत प्यारी है, तुम्हारी दी हुई हर एक निशानी…
चाहे वो दिल का दर्द हो या आँखों का पानी….

*******

सोचा ही नहीं था जिंदगी में ऐसे भी
फसाने होंगे ..
रोना भी जरुरी होगा आंसू भी छुपाने होंगे….!!

*******

जिंदगी में कुछ सस्ते लोगों को
शामिल कर लो ।।।
बहुत महंगे सबक मिलेंगे.

*******

कभी किसी को छला नही,
इसलिये में चला नही…

*******

प्यार तो अमर है , अमर ही रहेगा ,
मरेगा तो वो , जिसने किया है ।

*******

घण्टों बैठकर

जश्न करते हैं…
मैं…दिल..और तेरी याद…

*******

अच्छा लगता हैं
तेरा नाम मेरे नाम के साथ,
जैसे कोई खूबसूरत सुबह
जुड़ी हो,
किसी हसीन शाम के साथ !

*******

ना जाने क्यों वो फिर भी इतना प्यार करती है मुझसे…
मैंने तो कभी माँ को गुलाब का फूल नहीं दिया !

*******

कुछ लोग दिल के इतने खुबसुरत होते हैं….
कि चाहे वो ना भी मिले पर…
उम्र भर उन्हे चाहने को दिल करता है…

*******

चलो इस रिश्ते को बेनाम ही रहने दो,
नाम वाले रिश्ते अक्सर निभाए नहीं जाते..

*******

ऐसा नहीं की मुझमें कोई ऐब नहीं..,..
..पर सच कहता हूँ,,,मुझमें कोई फरेब नहीं।।।।

*******

सलीका हो अगर भीगी हुई आँखों
को पढ़ने का,
तो जज़बात भी मेरे कयामत का असर रखते है !!

*******

जिंदगी भी कितनी अजीब है.. मुस्कुराओ तो लोग जलते है…
तन्हा रहो तो सवाल करते है…!!

*******

न मैं गिरा और न मेरी उम्मीदों के मिनार गिरे,
पर कुछ लोग मुझे गिराने में कई बार गिरे !

*******

अदब से पेश आ ज़िन्दगी,
हो गई तुजसे है दिल्लगी ।

*******

कभी पानी में तैरता  जलता हुआ दिया देखा है  ?
कितना खूबसूरत मंज़र होता है ।
बस कुछ ऐसा ही हाल है,
आँखों मेंतैरती हुई तेरी तस्वीर का ।

*******

बैठे चाय की प्याली लेकर पुराने किस्से याद करने…
चाय ठंडी होती गई और किस्से गरम होते गये !!

*******

तुम्हारी फिक्र के लिए हमारा..
कोई रिश्ता हो ज़रूरी तो नही..

*******

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Posted by on ફેબ્રુવારી 22, 2017 in Uncategorized

 

ટૅગ્સ:

ભારતીય સંસ્કૃતિ


ભારતીય સંસ્કૃતિ ના મૂલ્યો અને આધ્યાત્મિક વારસા થી અવગત બનીએ.

*(1) હિન્દુધર્મ પ્રમાણે માનવજીવનના સોળ સંસ્કારો :* 
1. ગર્ભાધાન સંસ્કાર 

2. પુંસવન સંસ્કાર 

3. સીમંતોન્ન્યન સંસ્કાર 

4. જાતકર્મ સંસ્કાર 

5. નામકરણ સંસ્કાર 

6. નિષ્ક્રમણ સંસ્કાર 

7. અન્નપ્રાશન સંસ્કાર 

8. વપન (ચૂડાકર્મ) સંસ્કાર 

9. કર્ણવેધ સંસ્કાર 

10. ઉપનયન સંસ્કાર 

11. વેદારંભ સંસ્કાર 

12. કેશાન્ત સંસ્કાર 

13. સમાવર્તન સંસ્કાર 

14. વિવાહ સંસ્કાર 

15. વિવાહગ્નિપરિગ્રહ સંસ્કાર 

16. અગ્નિ સંસ્કાર
 *(2) હિન્દુધર્મના ઉત્સવો :*
 1. નૂતન વર્ષારંભ 

2. ભાઈબીજ 

3. લાભપાંચમ 

4. દેવદિવાળી 

5. ગીતા જયંતિ (માગસર સુદ એકાદશી)

 6. ઉત્તરાયણ અને મકરસંક્રાંતિ 

7. વસંત પંચમી

 8. શિવરાત્રી 

9. હોળી 

10. રામનવમી 

11. અખાત્રીજ 

12. વટસાવિત્રી (જેઠ પૂર્ણિમા) 

13. અષાઢી બીજ 

14. ગુરુ પૂર્ણિમા 

15. શ્રાવણી-રક્ષાબંધન 

16. જન્માષ્ટમી 

17. ગણેશ ચતુર્થી 

18. શારદીય નવરાત્રી 

19. વિજ્યા દશમી 

20. શરદપૂર્ણિમા 

21. ધનતેરસ 

22. દીપાવલી. 
*(3) હિન્દુ – તીર્થો : ભારતના ચાર ધામ :*
 1. દ્વારિકા 

2. જગન્નાથપુરી 

3. બદરીનાથ 

4. રામેશ્વર 
*હિમાલય ના ચાર ધામ :* 
1. યમુનોત્રી 

2. ગંગોત્રી 

3. કેદારનાથ 

4. બદરીનાથ 
*હિમાલયના પાંચ કેદાર :*

 

1. કેદારનાથ 

2. મદમહેશ્વર 

3. તુંગનાથ 

4. રુદ્રનાથ 

5. કલ્પેશ્વર 
*ભારતની સાત પવિત્ર પુરી :* 
1. અયોધ્યા 

2. મથુરા 

3. હરિદ્વાર 

4. કાશી 

5. કાંચી 

6.. અવંતિકા 

7. દ્વારિકા
 *દ્વાદશ જ્યોતિલિંગ :*
 1. મલ્લિકાર્જુન (શ્રી શૈલ – આંધ્ર પ્રદેશ)

 2. સોમનાથ (પ્રભાસ પાટણ – ગુજરાત) 

3. મહાકાલ (ઉજ્જૈન –મધ્યપ્રદેશ) 

4. વૈદ્યનાથ (પરલી-મહારાષ્ટ્ર) 

5. ઓમકારેશ્વર (મધ્યપ્રદેશ) 

6. ભીમાશંકર (મહારાષ્ટ્ર) 

7. ત્ર્યંબકેશ્વર (મહારાષ્ટ્ર) 

8. નાગનાથ (દ્વારિકા પાસે – ગુજરાત)

 9. કાશી વિશ્વનાથ (કાશી – ઉત્તરપ્રદેશ) 

10. રામેશ્વર (તમિલનાડુ) 

11. કેદારનાથ (ઉત્તરાંચલ) 

12. ઘૃષ્ણેશ્વર (દેવગિરિ-મહારાષ્ટ્ર) 
*અષ્ટવિનાયક ગણપતિ :*

 

1. ઢુંઢીરાજ – વારાણસી 

2. મોરેશ્વર-જેજૂરી 

3. સિધ્ધટેક 

4. પહ્માલય 

5. રાજૂર 

6. લેહ્યાદ્રિ 

7. ઓંકાર ગણપતિ – પ્રયાગરાજ 

8. લક્ષવિનાયક – ઘુશ્મેશ્વર
 *શિવની અષ્ટમૂર્તિઓ :* 
1. સૂર્યલિંગ કાશ્મીરનું માર્તડ મંદિર / ઓરિસ્સાનું કોર્ણાક મંદિર / ગુજરાતનું મોઢેરાનું મંદિર 

2. ચંદ્રલિંગ – સોમનાથ મંદિર 

3. યજમાન લિંગ – પશુપતિનાથ (નેપાલ) 

4. પાર્થિવલિંગ – એકામ્રેશ્વર (શિવકાંશી) 

5. જલલિંગ – જંબુકેશ્વર (ત્રિચિનાપલ્લી) 

6. તેજોલિંગ – અરુણાચલેશ્વર (તિરુવન્નુમલાઈ)

 7. વાયુલિંગ – શ્રી કાલહસ્તીશ્વર 

8. આકાશલિંગ – નટરાજ (ચિદંબરમ) 
*પ્રસિધ્ધ 24 શિવલિંગ :*
 1. પશુપતિનાથ (નેપાલ) 

2. સુંદરેશ્વર (મદુરા) 

3. કુંભેશ્વર (કુંભકોણમ) 

4. બૃહદીશ્વર (તાંજોર) 

5. પક્ષીતીર્થ (ચેંગલપેટ)

 6. મહાબળેશ્વર (મહારાષ્ટ્ર) 

7. અમરનાથ (કાશ્મીર) 

8. વૈદ્યનાથ (કાંગજા) 

9. તારકેશ્વર (પશ્ચિમ બંગાળ) 

10. ભુવનેશ્વર (ઓરિસ્સા) 

11. કંડારિયા શિવ (ખાજુરાહો)

 12. એકલિંગજી (રાજસ્થાન) 

13. ગૌરીશંકર (જબલપુર) 

14. હરીશ્વર (માનસરોવર) 

15. વ્યાસેશ્વર (કાશી) 

16. મધ્યમેશ્વર (કાશી)

 17. હાટકેશ્વર (વડનગર) 

18. મુક્તપરમેશ્વર (અરુણાચલ) 

19. પ્રતિજ્ઞેશ્વર (કૌંચ પર્વત) 

20. કપાલેશ્વર (કૌંચ પર્વત) 

21.કુમારેશ્વર (કૌંચ પર્વત) 

22. સર્વેશ્વર (ચિત્તોડ)

23. સ્તંભેશ્વર (ચિત્તોડ) 2

4. અમરેશ્વર (મહેન્દ્ર પર્વત) 
*સપ્ત બદરી :* 
1. બદરીનારાયણ 

2. ધ્યાનબદરી 

3. યોગબદરી 

4. આદિ બદરી 

5. નૃસિંહ બદરી 

6. ભવિષ્ય બદરી

 7.. વૃધ્ધ બદરી. 
*પંચનાથ :*
 1. બદરીનાથ 

2. રંગનાથ 

3. જગન્નાથ 

4. દ્વારિકાનાથ 

5. ગોવર્ધનનાથ 
*પંચકાશી :* 
1. કાશી (વારાણસી) 

2. ગુપ્તકાશી (ઉત્તરાખંડ) 

3. ઉત્તરકાશી (ઉત્તરાખંડ)

 4. દક્ષિણકાશી (તેનકાશી – તમિલનાડુ) 

5. શિવકાશી 
*સપ્તક્ષેત્ર* 
: 1. કુરુક્ષેત્ર (હરિયાણા) 

2. હરિહિર ક્ષેત્ર (સોનપુર-બિહાર) 

3. પ્રભાસ ક્ષેત્ર (સોમનાથ – ગુજરાત)

 4. રેણુકા ક્ષેત્ર (મથુરા પાસે, ઉત્તરપ્રદેશ) 

5. ભૃગુક્ષેત્ર (ભરૂચ-ગુજરાત) 

6. પુરુષોત્તમ ક્ષેત્ર (જગન્નાથપુરી – ઓરિસ્સા) 

7. સૂકરક્ષેત્ર (સોરોં – ઉત્તરપ્રદેશ) 
*પંચ સરોવર :*
 1. બિંદુ સરોવર (સિધ્ધપુર – ગુજરાત) 

2. નારાયણ સરોવર (કચ્છ) 

3. પંપા સરોવર (કર્ણાટક) 

4. પુષ્કર સરોવર (રાજસ્થાન) 

5. માનસ સરોવર (તિબેટ) 
*નવ અરણ્ય (વન)  :* 
1. દંડકારણ્ય (નાસિક) 

2. સૈન્ધાવારણ્ય (સિન્ધુ નદીના કિનારે)

3. નૈમિષારણ્ય (સીતાપુર – ઉત્તરપ્રદેશ) 

4. કુરુ-મંગલ (કુરુક્ષેત્ર – હરિયાણા) 

5. કુરુ-મંગલ (કુરુક્ષેત્ર – હરિયાણા) 

6. ઉત્પલાવર્તક (બ્રહ્માવર્ત – કાનપુર) 

7. જંબૂમાર્ગ (શ્રી રંગનાથ – ત્રિચિનાપલ્લી) 

8. અર્બુદારણ્ય (આબુ) 

9. હિમવદારણ્ય (હિમાલય) 
*ચૌદ પ્રયાગ :*
 1. પ્રયાગરાજ (ગંગા,યમુના, સરસ્વતી)

 2. દેવપ્રયાગ (અલકનંદા, ભાગીરથી)

 3. રુદ્રપ્રયાગ (અલકનંદા, મંદાકિની) 

4. કર્ણપ્રયાગ (અલકનંદા, પિંડારગંગા) 

5. નંદપ્રયાગ (અલકનંદા, નંદા)

 6. વિષ્ણુપ્રયાગ (અલકનંદા, વિષ્ણુગંગા) 

7. સૂર્યપ્રયાગ (મંદાકિની, અલસતરંગિણી) 

8. ઈન્દ્રપ્રયાગ (ભાગીરથી, વ્યાસગંગા) 

9. સોમપ્રયાગ (મંદાકિની, સોમગંગા) 

10. ભાસ્કર પ્રયાગ (ભાગીરથી, ભાસ્કરગંગા) 

11. હરિપ્રયાગ (ભાગીરથી, હરિગંગા) 

12. ગુપ્તપ્રયાગ (ભાગીરથી, નીલગંગા) 

13. શ્યામગંગા (ભાગીરથી, શ્યામગંગા) 

14. કેશવપ્રયાગ (ભાગીરથી, સરસ્વતી) 
*પ્રધાન દેવીપીઠ :* 
1. કામાક્ષી (કાંજીવરમ્ – તામિલનાડુ) 

2. ભ્રમરાંબા (શ્રીશૈલ –આંધ્રપ્રદેશ) 

3. કન્યાકુમારી (તામિલનાડુ)

 4. અંબાજી (ઉત્તર ગુજરાત)

 5. મહાલક્ષ્મી (કોલ્હાપુર, મહારાષ્ટ્ર) 

6. મહાકાલી (ઉજ્જૈન-મધ્યપ્રદેશ)

 7. લલિતા (પ્રયાગરાજ-ઉત્તરપ્રદેશ)

 8. વિંધ્યવાસિની (વિંધ્યાચલ-ઉત્તરપ્રદેશ)

 9. વિશાલાક્ષી (કાશી, ઉત્તરપ્રદેશ) 

10. મંગલાવતી (ગયા-બિહાર) 

11. સુંદરી (અગરતાલ, ત્રિપુરા) 

12. ગૃહેશ્વરી (ખટમંડુ-નેપાલ) 
*શ્રી શંકરાચાર્ય દ્વારા સ્થાપિત પાંચ પીઠ :* 
1. જ્યોતિષ્પીઠ (જોષીમઠ – ઉત્તરાંચલ) 

2. ગોવર્ધંપીઠ (જગન્નાથપુરી-ઓરિસ્સા)

 3. શારદાપીઠ (દ્વારિકા-ગુજરાત)

 4. શ્રૃંગેરીપીઠ (શ્રૃંગેરી – કર્ણાટક) 

5. કામોકોટિપીઠ (કાંજીવરમ – તામિલનાડુ) 
*(4) ચાર પુરુષાર્થ :*
 1. ધર્મ 

2. અર્થ

 3. કામ 

4. મોક્ષ 

વૈષ્ણવો ‘પ્રેમ’ને પંચમ પુરુષાર્થ ગણે છે. 
*(5) ચાર આશ્રમ :* 
1. બ્રહ્મચર્યાશ્રમ 

2. ગૃહસ્થાશ્રમ 

3. વાનપ્રસ્થાશ્રમ 

4. સંન્યાસાશ્રમ 
*(6) હિન્દુ ધર્મની કેટલીક મુલ્યવાન પરંપરાઓ :* 
1. યજ્ઞ

 2. પૂજન 

3. સંધ્યા 

4. શ્રાધ્ધ 

5. તર્પણ 

6. યજ્ઞોપવીત 

7. સૂર્યને અર્ધ્ય 

8. તીર્થયાત્રા 

9. ગોદાન 

10. ગોરક્ષા-ગોપોષણ 

11. દાન 

12.ગંગાસ્નાન 

13.યમુનાપાન

14. ભૂમિપૂજન – શિલાન્યાસ – વાસ્તુવિધિ 

15.સૂતક 

16.તિલક 

17.કંઠી – માળા 

18. ચાંદલો – ચૂડી – સિંદૂર 

19. નૈવેદ્ય 

20. મંદિરમાં દેવ દર્શન, આરતી દર્શન 

21. પીપળે પાણી રેડવું 

22. તુલસીને જળ આપવું 

23. અન્નદાન – અન્નક્ષેત્ર 
*આપણા કુલ 4 વેદો છે. :*
 ઋગવેદ 

સામવેદ 

અથર્વેદ 

યજુર્વેદ 
*ભારતીય તત્વજ્ઞાનની આધારશીલા પ્રસ્થાનત્રયી કહેવાય જેમાં ત્રણ ગ્રંથોનો સમાવેશ થાય છે.:* 
ઉપનીષદો 

બ્રમ્હસુત્ર 

શ્રીમદ ભગવદગીતા 
*આપણા કુલ 6 શાસ્ત્ર છે.:*

 

વેદાંગ 

સાંખ્ય 

નિરૂક્ત

વ્યાકરણ 

યોગ 

છંદ 
*આપણી 7 નદી :* 
ગંગા 

યમુના 

ગોદાવરી 

સરસ્વતી 

નર્મદા 

સિંધુ 

કાવેરી 
*આપણા 18 પુરાણ :* 
ભાગવતપુરાણ 

ગરૂડપુરાણ 

હરિવંશપુરાણ 

ભવિષ્યપુરાણ

 લિંગપુરાણ 

પદ્મપુરાણ 

બાવનપુરાણ 

બાવનપુરાણ 

કૂર્મપુરાણ 

બ્રહ્માવતપુરાણ

 મત્સ્યપુરાણ 

સ્કંધપુરાણ 

સ્કંધપુરાણ 

નારદપુરાણ 

કલ્કિપુરાણ 

અગ્નિપુરાણ 

શિવપુરાણ 

વરાહપુરાણ 
*પંચામૃત :* 
દૂધ 

દહીં 

ઘી 

મધ 

ખાંડ 
*પંચતત્વ :* 
પૃથ્વી 

જળ 

વાયુ 

આકાશ 

અગ્નિ 
*ત્રણ ગુણ :* 
સત્વ 

રજ 

તમસ 
*ત્રણ દોષ :*
 વાત 

પિત્ત 

કફ 
*ત્રણ લોક :* 
આકાશ 

મૃત્યુલોક 

પાતાળ 
*સાત સાગર :* 
ક્ષીરસાગર 

દૂધસાગર 

ધૃતસાગર 

પથાનસાગર 

મધુસાગર 

મદિરાસાગર 

લડુસાગર 
*સાત દ્વીપ :* 
જમ્બુદ્વીપ 

પલક્ષદ્વીપ 

કુશદ્વીપ

 પુષ્કરદ્વીપ

 શંકરદ્વીપ 

કાંચદ્વીપ 

શાલમાલીદ્વીપ 
*ત્રણ દેવ :* 
બ્રહ્મા 

વિષ્ણુ 

મહેશ 
*ત્રણ જીવ :* 
જલચર 

નભચર 

થલચર 
*ત્રણ વાયુ :* 
શીતલ

મંદ 

સુગંધ 
*ચાર વર્ણ :* 
બ્રાહ્મણ 

ક્ષત્રિય 

વૈશ્ય 

ક્ષુદ્ર 
*ચાર ફળ :* 
ધર્મ 

અર્થ 

કામ 

મોક્ષ 
*ચાર શત્રુ :* 
કામ 

ક્રોધ 

મોહ, 

લોભ 
*ચાર આશ્રમ :* 
બ્રહ્મચર્ય 

ગૃહસ્થ 

વાનપ્રસ્થ 

સંન્યાસ 
*અષ્ટધાતુ :* 
સોનું 

ચાંદી 

તાબું 

લોખંડ 

સીસુ 

કાંસુ 

પિત્તળ 

રાંગુ 
*પંચદેવ :* 
બ્રહ્મા 

વિષ્ણુ 

મહેશ 

ગણેશ 

સૂર્ય 
*ચૌદ રત્ન :* 
અમૃત 

ઐરાવત હાથી 

કલ્પવૃક્ષ 

કૌસ્તુભમણિ 

ઉચ્ચૈશ્રવા ઘોડો 

પાંચજન્ય શંખ 

ચન્દ્રમા 

ધનુષ 

કામધેનુ

ધનવન્તરિ 

રંભા અપ્સરા 

લક્ષ્મીજી 

વારુણી 

વૃષ 
*નવધા ભક્તિ :*
 શ્રવણ 

કીર્તન 

સ્મરણ 

પાદસેવન 

અર્ચના 

વંદના 

મિત્ર 

દાસ્ય 

આત્મનિવેદન 
*ચૌદભુવન :*
તલ 

અતલ 

વિતલ 

સુતલ 

સસાતલ 

પાતાલ 

ભુવલોક

 ભુલૌકા 

સ્વર્ગ 

મૃત્યુલોક 

યમલોક 

વરૂણલોક 

સત્યલોક 

બ્રહ્મલોક

 
2 ટિપ્પણીઓ

Posted by on ફેબ્રુવારી 22, 2017 in અંગત

 

માતૃભાષા


માતૃભાષા એ મારું  સ્વાભિમાન

આદરણીય….. ( પ્રિન્સિપાલ / ટ્રસ્ટી / સાથી મિત્રો અને વિદ્યાર્થીઓ )

મને આજે બોલવાં  માટે 4 વિષય આપવામાં આવ્યા હતાં , એમાંથી મેં “માતૃભાષા એ મારુ સ્વાભિમાન ” વિષય પસંદ કર્યો છે, કારણકે એ સાચે જ મારું  સ્વાભિમાન, અભિમાન અને વ્યવસાય પણ છે.

માતૃભાષા જીવનનું અમૃત છે, જીવનનો ધબકાર છે, માતૃભાષા એ ગ્રહણશક્તિનું પ્રવેશદ્વાર છે, સમજણનું સાધના કેન્દ્ર છે, સંવેદનાઓનું ભાવવિશ્વ છે, સંસ્કૃતિ ની ઉર્જા છે, સ્વાભિમાન અને આત્મગૌરવની પૂર્વ શરત છે અને અભિવ્યક્તિ નું બળ  છે.

ઘણાં મહાન વ્યક્તિઓએ માતૃભાષાના સંવર્ધન માટે ઘણાબધા પ્રયત્નો કર્યા છે અને તેમાં આપણાં રાષ્ટ્રપિતા ગાંધી બાપુ પણ બાકાત નથી. તેમણે કહ્યું છે “કોઈપણ પ્રજાના યુવક વર્ગમાં પ્રજત્વ કાયમ રાખવું હોય તો તેમને ઊતરતી કે ચડતી બધીજ કેળવણી તેમની માતૃભાષા દ્વારા જ મળવી જોઈએ. બાળક જયારે શીખવાનો પ્રારંભ કરે છે ત્યારે કોઈ એક ભાષાના જ્ઞાનરૂપી મજબૂત પાયા પર જ અન્ય વિષયોની સમજણ રૂપી ઇમારત ઘડે છે. અને આ મૂળભૂત ભાષા એ બાળકની માતૃભાષા. આપણી માતૃભાષામાં શિક્ષણ મેળવવાથી કલ્પનાશક્તિ, તર્કશક્તિ વધું ખીલે છે. રવિન્દ્રનાથ ટાગોર જેવા વિશ્વકવિએ પણ માતૃભાષાનો મહિમા કરતાં  કહેલું કે માતૃભાષા તો માતાનું ધાવણ છે ને બાળકને માં નું દૂધ જ વધારે વિકસાવે છે – મજબૂત બનાવે છે. માં તે માં બીજા વગડાના વા.

શિક્ષણ જો સાર્વત્રિક અને સાર્વજનિક બનાવવું હોય તો તે માતૃભાષામાં આપવું જોઈએ, નહિતો સમાજમાં ભેદાભેદની દિવાલ  ઉભી થશે. આપણે ત્યાં વર્તમાન સમયમાં લોકોને અંગ્રેજીનું ઘેલું લાગ્યું છે, અંગ્રેજીની જરૂર છે એમાં કોઈ શંકા નથી, પણ માતૃભાષા બરાબર ના આવડે, તો બાવાના બેય બગડે. હું અન્ય ભાષાનો ઉપહાસ કરવા નથી માંગતી પરંતુ જો બાળકને તેની માતૃભાષા ગુજરાતી હોય અને અંગ્રેજી માધ્યમમાં તેને શિક્ષણ આપવામાં આવે તો તે તેના માટે એક જીર્ણ રોગ સમાન છે. કેટલાંય બાળ દેવતાઓ આ વિદેશી ભાષામાં શિક્ષણ આપવાની ઘેલછાં  માં ને ઘેલછાં  માં માતૃભાષા ના અમૂલ્ય વારસાથી અળગાં થઇ રહ્યા છે. માતૃભાષા એ બાળકની મૂળભૂત શક્તિઓને વિકસાવવા માટેનું મહત્તમ માધ્યમ છે.

આજેતો ગુજરાતી ભાષામાં જ્ઞાન નો ભંડાર એવો વિશ્વકોશ છે, એ પણ 26 ભાગમાં. દુનિયાભરનું જ્ઞાન એમાં છે, ગુજરાતી આવડે તો બધાંજ વિષયોનું જ્ઞાન વિશ્વકોશમાં હાજર છે. માતૃભાષા વિષે એવું કહેવાય છે કે આપણને વિચારો માતૃભાષા માં જ આવે છે, સ્વપ્ન પણ માતૃભાષા માં જ આવે છે. માતૃભાષા વિષે કોઈકે સરસ કહ્યું છે કે “હાથ કરતાં પણ વધુ હાથવગી માતૃભાષા છે.” આપણે પ્રેમ કરીએ, કજિયો કરીએ, રિસાઈએ-રડીએ , કિટ્ટા કરીએ કે વ્હાલ ! બધુજ માતૃભાષા માં વટબંધ થાય છે.

માટે મારા સ્નેહીજનો, માતૃભાષાને લુપ્ત થતી જતી બચાવવાનો સમય હવે પાકી ગયો છે. માતૃભાષા એ તો આપણી પોતીકી અણમોલ જણસ છે. એને આમ ખોવાતી, લૂંટાતી, ચૂંથાતી આપણાંથી ન જોવાય. માતૃભાષા આપણને સાદ કરી રહી છે, આપણું સ્વાભિમાન આપણને સાદ કરી રહ્યું છે, સાંભરી રહ્યું છે. આ કામને વહેલી તકે માથે ઉપાડી લેવું એ તો આપણાં સૌની નમ્ર ફરજ અને જવાબદારી છે. અને આપણે આટલું કરીશું તો પણ આપણાં  થકી  સમાજની બહુ મોટી સેવા કરી લેખાશે.

જય  જય  ગરવી ગુજરાત

(શિક્ષકમિત્ર ને સ્પર્ધા માટે ન લખી આપેલ.)

2-2-2017

 
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Posted by on ફેબ્રુવારી 2, 2017 in અંગત

 

ટૅગ્સ:

“સ્ત્રીની બુદ્ધિ પગ ની પાનીએ છે…..?!?”


કોઈએ સવાલ ઉઠાવ્યો કે સ્ત્રી ની બુદ્ધિ પગ ની પાનીએ છે એનો હકારાત્મક પર્યાય ખરો?
કહેનારાએ ભલે જે પણ ઉદ્દેશ થી આ કહું હોય પણ ભૂલથી પણ સત્ય કહ્યું છે.

હરેક સ્ત્રી પોતાની બુદ્ધિ જે પગ ની પાનીએ છે તે વાપરી પોતાનું ભાગ્ય લઇ એજ પગ થી

પુરુષ ના ઘરમાં પ્રવેશ કરે છે .એટલે સ્ત્રી ના ચરણ માં પુરુષ નું ભાગ્ય છે એ પુરવાર થાય છે.આ થયું સ્ત્રી નું પત્ની રૂપ.

પગ છે તે કોઈ પણ વ્યક્તિ ને પોતાની મંઝીલ સુધી પહોંચાડવા માટે ઝરૂરી છે. આનો મતલબ એજ થયો કે પુરુષ ની અક્કલ નહિ પણ સ્ત્રી નું માર્ગદર્શન પુરુષ ને મંઝીલ સુધી પહોચાડવા આવશ્યક છે.

દોડી દોડી ને ઘરના એકેક ખૂણે પોતાના કામ ની છાપ છોડનારી સ્ત્રી જ છે .

કારણકે સ્ત્રી ની બુદ્ધિ પગ ની પાની એ છે એટલે આ થયું સ્ત્રી નું કાર્યેષુ મંત્રી રૂપ.

જયારે પિતા એને છાતી સરસોજ ચાંપે છે જયારે માતા એનું છાતી થી પોષણ કરે છે.

બુદ્ધિ પગ ની પાનીએ છે એટલે જ હરેક વ્યક્તિ નું શીશ માતા ના ચરણમાં ઝુકે છે

આ થયું સ્ત્રી નું માતૃ રૂપ.

માનું છું કે આટલા કારણ બસ છે પુરવાર કરવા કે સ્ત્રી ની બુદ્ધી ખરેખર ઈશ્વરે પગ ની પાની એ રાખી છે.

Source : Whatsapp msg

 
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Posted by on સપ્ટેમ્બર 24, 2016 in અંગત

 

શ્રાદ્ધ – એક ભારતીય પરંપરા


 પ્રથમ શ્રાધ્ધઃ ૧૬ દિ’ પિતૃદેવોને શ્રાધ્ધ અર્પણ કરાશે

ધાર્મિક કારણ – શ્રાદ્ધએ એક પ્રકારનું સર્વ-પિતૃ નૈવૈધ છે, જે આપણા દિવંગત વડીલોને ઋણ પેટે ચૂકવીએ છીએ, અને તેમના આત્મા પ્રત્યે કૃતજ્ઞતા પ્રગટ કરીએ છીએ ..
સામાજિક કારણ – પિતૃની સ્મૃતિ નિમિતે આખું કુટુંબ સાથે મળી ભેગા થાય અને વર્ષ દરમિયાન કુટુંબમાં થયેલા નાના-મોટા મનદુઃખ કે ઝઘડા વડીલોની હાજરીમાં દુર કરવાની કોશિશ કરે અને સંપ અને એકતા ટકાવવા સમાધાન કરાવે અને કરે ..
વૈજ્ઞાનિક કારણ – વરસાદી વાતાવરણ અને કમજોર પાચન શક્તિને લીધે વા, પિત,અને કફજન્ય રોગોમાં આ સમયે પિતદોષ વધી જાય છે અને પિતનું મારણ ‘ ખીર’ છે દરેકને શ્રાદ્ધ આવે અને ખીર ખાયને પિતદોષ જાય ..
પ્રાકૃતિક કારણ – આ જ સમયમાં કાગડાનો સંવનન કાળ પૂરો થયો હોય તેમના માળામાં ઈંડા સેવવાનું અને બચ્ચા ઉછેરવાનું કામ ચાલુ હોય ત્યારે આસાનીથી તેને 16 દિવસ ખોરાક મળી રહે અને પ્રકૃતિનું ઋણ ચુકવવાની અહી ભાવના છે ..
કેટલી સુંદર ભાવનાઓ આપણા તહેવારોમાં ઓતપ્રોત થયેલી છે ક્યારેય વિચાર્યું છે ? હિંદુ સંસ્કૃતિ એ પ્રકૃતિ સાથે એકરસ થઇ જીવવાનું શીખવે છે, કુદરતમા ભળી જઈને અનુકૂળ થવાનું શીખવે છે !! આનંદથી જીવવાનું શીખવે છે, કુદરતનો વિરોધ કરવાનું નહી !!

 
1 ટીકા

Posted by on સપ્ટેમ્બર 17, 2016 in અંગત

 

​कछुआ और खरगोश की नयी  कहानी जो आपने कभी नहीं सुनी होगी ।


आपने कछुए और खरगोश की कहानीज़रूर सुनी होगी, just
to remind you; short में यहाँ बता देता हूँ:
एक बार खरगोश को अपनी तेज चाल पर घमंड हो गया और

वो जो मिलता उसे रेस लगाने के लिए challenge करता

रहता। 

         कछुए ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली।

रेस हुई। खरगोश तेजी से भागा और काफी आगे जाने पर

पीछे मुड़ कर देखा, कछुआ कहीं आता नज़र नहीं आया, उसने

मन ही मन सोचा कछुए को तो यहाँ तक आने में बहुत समय

लगेगा, चलो थोड़ी देर आराम कर लेते हैं, और वह एक पेड़ के

नीचे लेट गया। लेटे-लेटे कब उसकी आँख लग गयी पता ही

नहीं चला।

उधर कछुआ धीरे-धीरे मगर लगातार चलता रहा। बहुत देर

बाद जब खरगोश की आँख खुली तो कछुआ फिनिशिंग

लाइन तक पहुँचने वाला था। खरगोश तेजी से भागा,

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कछुआ रेस जीत

गया।
_Moral of the story: Slow and steady wins the race_

_धीमा और लगातार चलने वाला रेस जीतता है_
        ये कहानी तो हम सब जानते हैं, अब आगे की कहानी देखते

हैं:

रेस हारने के बाद खरगोश निराश हो जाता है, वो अपनी

हार पर चिंतन करता है और उसे समझ आता है कि वो over-

confident होने के कारण ये रेस हार गया…उसे अपनी

मंजिल तक पहुँच कर ही रुकना चाहिए था।

अगले दिन वो फिर से कछुए को दौड़ की चुनौती देता है।

कछुआ पहली रेस जीत कर आत्मविश्वाश से भरा होता है

और तुरंत मान जाता है।

रेस होती है, इस बार खरगोश बिना रुके अंत तक दौड़ता

जाता है, और कछुए को एक बहुत बड़े अंतर से हराता है।
_Moral of the story: Fast and consistent will always beat the slow and steady_ 

_तेज और लगातार चलने वाला धीमे और लगातार चलने वाले से हमेशा जीत जाता है।_

*यानि slow and steady होना अच्छा है लेकिन fast and consistent होना और भी अच्छा है*
कहानी अभी बाकी है जी….
इस बार कछुआ कुछ सोच-विचार करता है और उसे ये बात

समझ आती है कि जिस तरह से अभी रेस हो रही है वो

कभी-भी इसे जीत नहीं सकता।

वो एक बार फिर खरगोश को एक नयी रेस के लिए चैलेंज

करता है, पर इस बार वो रेस का रूट अपने मुताबिक रखने

को कहता है। खरगोश तैयार हो जाता है।

रेस शुरू होती है। खरगोश तेजी से तय स्थान की और

भागता है, पर उस रास्ते में एक तेज धार नदी बह रही होती

है, बेचारे खरगोश को वहीँ रुकना पड़ता है। कछुआ धीरे-

धीरे चलता हुआ वहां पहुँचता है, आराम से नदी पार करता

है और लक्ष्य तक पहुँच कर रेस जीत जाता है।

_Moral of the story: Know your core competencies and work accordingly to succeed_ 

_पहले अपनी strengths को जानो और उसके मुताबिक काम करो जीत ज़रुर मिलेगी_
कहानी अभी भी बाकी है जी …..
इतनी रेस करने के बाद अब कछुआ और खरगोश अच्छे दोस्त

बन गए थे और एक दुसरे की ताकत और कमजोरी समझने लगे

थे। दोनों ने मिलकर विचार किया कि अगर हम एक दुसरे

का साथ दें तो कोई भी रेस आसानी से जीत सकते हैं।

इसलिए दोनों ने आखिरी रेस एक बार फिर से मिलकर

दौड़ने का फैसला किया, पर इस बार as a competitor

नहीं बल्कि संघठित होकर काम करने का निश्चय लिया।

दोनों स्टार्टिंग लाइन पे खड़े हो गए….get set go…. और

तुरंत ही खरगोश ने कछुए को ऊपर उठा लिया और तेजी से

दौड़ने लगा। दोनों जल्द ही नहीं के किनारे पहुँच गए। अब

कछुए की बारी थी, कछुए ने खरगोश को अपनी पीठ

बैठाया और दोनों आराम से नदी पार कर गए। अब एक

बार फिर खरगोश कछुए को उठा फिनिशिंग लाइन की

ओर दौड़ पड़ा और दोनों ने साथ मिलकर रिकॉर्ड टाइम

में रेस पूरी कर ली। दोनों बहुत ही खुश और संतुष्ट थे, आज से

पहले कोई रेस जीत कर उन्हें इतनी ख़ुशी नहीं मिली थी।

_Moral of the story: 

संगठित कार्य हमेशा व्यक्तिगत प्रदर्शन से बेहतर होता है_

*Individually चाहे आप जितने बड़े performer हों लेकिन अकेले दम पर हर मैच नहीं जीता सकते अगर लगातार जीतना है तो आपको संघठन में काम करना सीखना होगा, आपको अपनी काबिलियत के आलावा दूसरों की ताकत को भी समझना होगा। और जब जैसी situation हो, उसके हिसाब से संघठन की strengths को use करना होगा*

 

‘લાઇફ લેસન !’


આજે ઘણાં દિવસો પછી બ્લોગ પર આવ્યો છું, હમણાં ઘણી મુશ્કેલીઓ માં અને હતાશા ની ખાઈ માં હતો, પણ આજે સવારે ગુજરાત સમાચાર ની પુરતી (શતદલ ) માં મારા પસંદીદા લેખકોમાંના એક એવા જય વસાવડા નો એક લેખ વાંચ્યો , જેમાં એને મારા ફેવરીટ કલાકાર શાહરૂખ ખાન ની એક સ્પીચ નો ઉલ્લેખ કર્યો જેમાં વિદ્યાર્થીઓ ને પ્રોત્સાહન આપવા માટે ની વાત હતી. પણ હકીકત માં એ બધી જ વાત દરેક માણસ ને લાગુ પડે નહીં કે ખાલી વિદ્યાર્થીઓ ને.

લેખ વાંચી ને તરત જયભાઈ ને whatsapp પર મેં થેન્કયુ નો મેસેજ કર્યો અને એમની પરવાનગી લઇને તમારા લોકો માટે એ લેખ ની લીંક  અહી શેર કરું છું… તમને પણ જયારે એમ લાગે કે તમે હતાશ છો, ત્યારે આ લેખ એક વાર જરૂર વાંચજો, મને આજે નવું જોમ પ્રદાન કર્યું છે આ લેખે અને એ માટે હું શાહરૂખ ખાન નો અને જાય વસાવડા નો ખુબ ખુબ આભારી છું.

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