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Tag Archives: #God #Mandir

ईश्वर को चाहना और ईश्वर से चाहना.. दोनों में बहुत अंतर है…


एक नगर के राजा ने यह घोषणा करवा दी कि कल जब मेरे महल का मुख्य दरवाज़ा खोला जायेगा..

तब जिस व्यक्ति ने जिस वस्तु को हाथ लगा दिया वह वस्तु उसकी हो जाएगी..

इस घोषणा को सुनकर सब लोग आपस में बातचीत करने लगे कि मैं अमुक वस्तु को हाथ लगाऊंगा..

कुछ लोग कहने लगे मैं तो स्वर्ण को हाथ लगाऊंगा, कुछ लोग कहने लगे कि मैं कीमती जेवरात को हाथ लगाऊंगा, कुछ लोग घोड़ों के शौक़ीन थे और कहने लगे कि मैं तो घोड़ों को हाथ लगाऊंगा, कुछ लोग हाथीयों को हाथ लगाने की बात कर रहे थे, कुछ लोग कह रहे थे कि मैं दुधारू गौओं को हाथ लगाऊंगा..

कल्पना कीजिये कैसा
अद्भुत दृश्य होगा वह !!

उसी वक्त महल का मुख्य दरवाजा खुला और सब लोग अपनी अपनी मनपसंद वस्तु को हाथ लगाने दौड़े..

सबको इस बात की जल्दी थी कि पहले मैं अपनी मनपसंद वस्तु को हाथ लगा दूँ ताकि वह वस्तु हमेशा के लिए मेरी हो जाएँ और सबके मन में यह डर भी था कि कहीं मुझ से पहले कोई दूसरा मेरी मनपसंद वस्तु को हाथ ना लगा दे..

राजा अपने सिंघासन पर बैठा सबको देख रहा था और अपने आस-पास हो रही भाग दौड़ को देखकर मुस्कुरा रहा था..

उसी समय उस भीड़ में से एक छोटी सी लड़की आई और राजा की तरफ बढ़ने लगी..

राजा उस लड़की को देखकर सोच में पढ़ गया और फिर विचार करने लगा कि यह लड़की बहुत छोटी है शायद यह मुझसे कुछ पूछने आ रही है..

वह लड़की धीरे धीरे चलती हुई राजा के पास पहुंची और उसने अपने नन्हे हाथों से राजा को हाथ लगा दिया..

राजा को हाथ लगाते ही राजा उस लड़की का हो गया और राजा की प्रत्येक वस्तु भी उस लड़की की हो गयी..
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जिस प्रकार उन लोगों को राजा ने मौका दिया था और उन लोगों ने गलती की..

ठीक उसी प्रकार ईश्वर भी हमे हर रोज मौका देता है और हम हर रोज गलती करते है..

हम ईश्वर को पाने की बजाएँ
ईश्वर की बनाई हुई संसारी वस्तुओं
की कामना करते है और
उन्हें प्राप्त करने के लिए यत्न करते है

पर हम कभी इस बात पर विचार नहीं करते कि यदि ईश्वर हमारे हो गए तो उनकी बनाई हुई प्रत्येक वस्तु भी हमारी हो जाएगी..

ईश्वर को चाहना और
ईश्वर से चाहना..
दोनों में बहुत अंतर है

 

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जो भी होता है, अच्छे के लिए होता है….


एक बार भगवान से उनका सेवक कहता है, भगवान आप एक जगह खड़े-खड़े थक गये होंगे. एक दिन के लिए मैं आपकी जगह मूर्ति बनकर खड़ा हो
जाता हूं, आप मेरा रूप धारण कर घूम आओ.

भगवान मान जाते हैं, लेकिन शर्त रखते हैं कि जो भी लोग प्रार्थना करने आयें, तुम बस उनकी प्रार्थना सुन लेना. कुछ बोलना नहीं, मैंने उन सभी के लिए प्लानिंग कर रखी है.

सेवक मान जाता है.

सबसे पहले मंदिर में बिजनेसमैन आता है और कहता है, भगवान मैंने नयी फैक्ट्री डाली है, उसे खूब उंचाई पर पहुंचाना और वह माथा टेकता है, तो
उसका पर्स नीचे गिर जाता है. वह बिना पर्स लिये ही चला जाता है.

सेवक बेचैन हो जाता है. वह सोचता है कि रोक कर उसे बताये कि पर्स गिर गया, लेकिन शर्त की वजह से वह नहीं कह पाता.

इसके बाद एक गरीब आदमी आता है और भगवान को कहता है कि घर में खाने को कुछ नहीं, भगवान मदद कर.
तभी उसकी नजर पर्स पर पड़ती है. वह भगवान का शुक्रिया अदा करता है और
चला जाता है.

अब तीसरा व्यक्ति आता है. वह नाविक होता है. वह भगवान से कहता है कि मैं 15 दिनों के लिए जहाज लेकर समुद्र की यात्रा पर जा रहा हूं यात्रा में कोई अड़चन न आये भगवान.

तभी पीछे से बिजनेसमैन पुलिस के साथ आता है और पुलिस को बताता है कि मेरे बाद ये नाविक आया है. इसी ने मेरा पर्स चुराया है, पुलिस नाविक को पकड के ले जा रही होती है कि भगवान की जगह खडा सेवक बोल पड़ता है कि
पर्स तो उस गरीब आदमी ने उठाया है.

अब पुलिस उस गरीबआदमी को पकड़ कर जेल में बंद कर देती है.

रात को भगवान आते हैं, तो सेवक खुशी-खुशी पूरा किस्सा बताता है.
भगवान कहते हैं, तुमने किसी का काम बनाया नहीं, बल्कि बिगाड़ा है.

वह व्यापारी गलत धंधे करता है. अगर उसका पर्स गिर भी गया, तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ना था. इससे उसके पाप ही कम होते, क्योंकि वह पर्स गरीब इनसान को मिला था. पर्स मिलने पर उसके बच्चे भूखों नहीं मरते.

रही बात नाविक की, तो वह जिस यात्रा पर जा रहा था, वहां तूफान आनेवाला था. अगर वह जेल में रहता, तो जान बच जाती. उसकी पत्नी विधवा होने से बच जाती. तुमने सब गड़बड़ कर दी.

बात पते की. कई बार हमारी लाइफ में
भी ऐसी प्रॉब्लम आती है, जब हमें लगता है कि ये मेरा साथ ही क्यों हुआ. लेकिन इसके पीछे भगवान की प्लानिंग होती है. जब भी कोई प्रॉब्लम आये. उदास मत होना. इस स्टोरी को याद करना और सोचना कि जो भी होता है, अच्छे के लिए होता है….

 

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મંદીર


એક ભાઇ ખુબ ધાર્મિક હતા. ઘરમાં એક સરસ મજાનું નાનુ મંદિર બનાવેલુ એમાં ભગવાનની મૂર્તિ પધરાવીને તેની સવાર સાંજ પૂજા કરતા હતા. ભગવાન કૃષ્ણ પ્રત્યે એમને અપાર શ્રધ્ધા આથી મુરલીધરની મૂર્તિની પૂજા કરતા હતા.

એકવાર કોઇ મોટી નાણાકિય મુશ્કેલી આવી એણે ઘરમંદિરમાં રહેલી મૂર્તિ સમક્ષ મુશ્કેલીના નિવારણ માટે પ્રાર્થના કરી. સમસ્યાનો નીવેડો આવવાને બદલે સમસ્યા વધતી ચાલી.

દિવસે દિવસે આ ભાઇને ભગવાન પ્રત્યેની શ્રધ્ધા ઘટવા લાગી.

ભગવાન કૃષ્ણ કંઇ કામ કરતા નથી એવી માન્યતા દ્રઢ થઇ એટલે એણે નક્કી કર્યુ કે જે મારી મુશ્કેલીના સમયે મને મદદ ન કરે એની પૂજા મારે શા માટેકરવી જોઇએ ?

ભગવાન કૃષ્ણની મૂર્તિ મંદિરમાંથી દુર કરી અને ભગવાન રામને પધરાવ્યા.

હવે એ ભગવાનરામની મૂર્તિની પૂજા કરવા લાગ્યો.એક દિવસ સવારમાં ભગવાન રામની મૂર્તિને પહેરાવેલા કપડા પર એ ભાઇ અતર છાંટતા હતા. અતર ખુબ સારુ હતુ. અતર છાંટતા છાંટતા એમનું ધ્યાન મંદિરમાંથી દુર કરેલી અને ઘરના ખુણામાં રાખી મુકેલી ભગવાન કૃષ્ણની મૂર્તિ તરફ ગયુ.

એ ભાઇ ઉભા થયા અને કૃષ્ણની મૂર્તિના નાકમાં રૂ ભરાવી દીધુ અને પછી બોલ્યો , ” કંઇ કામ તો કરતા નથી તો પછી આ અતરની સુગંધ મફતમાં નહી મળે.

“ભગવાન કૃષ્ણ ખડખડાટ હસી પડ્યા અને મૂર્તિમાંથી પ્રગટ થયા. પેલો ભક્ત તો જોઇ જ રહ્યો. એણે ભગવાનને ફરીયાદ કરી કે આટલા વર્ષોથી તમારી પૂજા કરતો હતો પણ કોઇ દિવસ મને દર્શન નથી આપ્યા અને હવે તમારી પૂજા બંધ કરી ત્યારે કેમ દર્શન દીધા ?

ભગવાને હસતા હસતા કહ્યુ , ” અત્યાર સુધી તું મને માત્ર મૂર્તિ જ સમજતો હતો પણ આજે પહેલી વાર મને પણ અતરની સુગંધ આવતી હશે એમ માનીને તેમને મૂર્તિને બદલે જીવંત સમજ્યો.

“મિત્રો, આપણે પણ આપણી જાતને સવાલ પુછવા જેવો છે કે મંદીરમાં આપણે માત્ર મૂર્તિના દર્શન કરવા જઇએ છીકે કે સાક્ષાત પ્રભુને મળવા જઇએ છીએ ?

 

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